भारत-रूस डिफेंस डील से क्यों खफा अमेरिका, क्या वास्तव में भारत पर प्रतिबंध लगा सकते हैं ट्रम्प / भारत-रूस डिफेंस डील से क्यों खफा अमेरिका, क्या वास्तव में भारत पर प्रतिबंध लगा सकते हैं ट्रम्प

DainikBhaskar.com

Oct 04, 2018, 02:49 PM IST

डील करीब 37 हजार करोड़ रुपए की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच इसी साल मई में इस डील पर सहमित बनी थी।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर प रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर प

नई दिल्ली. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत यात्रा पर हैं। पुतिन की यह यात्रा सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दक्षिण एशिया और दुनिया के शक्ति संतुलन के लिहाज से भी अहम है। दोनों देशों ने S-400 एयर डिफेंस सिस्टम डील पर दस्तखत कर दिए हैं। अमेरिका समेत दुनिया के बाकी देश इससे हैरान हैं। भारत की सुरक्षा और पड़ोसी देशों से खतरों को देखते हुए यह रक्षा समझौता बेहद जरूरी माना जा रहा है। यह डील करीब 37 हजार करोड़ रुपए की है। मोदी और पुतिन के बीच इसी साल मई में इस डील पर सहमित बनी थी। अमेरिका इस डील पर ऐतराज जता रहा है। उसकी तरफ से कहा गया कि अगर भारत यह डील करता है तो उसे अमेरिका के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। यहां हम आपको इस डील से जुड़े 10 अहम तथ्य बता रहे हैं।

1) क्या है ये डील?
भारत रूस से S-400 वायु सुरक्षा प्रणाली खरीदना चाहता है। रूस के अलावा यह डिफेंस सिस्टम सिर्फ हमारे पड़ोसी चीन के पास है और उसने यह रूस से ही खरीदा है। भारत को इसके लिए करीब 37 हजार करोड़ रुपए (5 अरब डॉलर ) चुकाने होंगे।

2) S-400 क्यों है खास?
S-400 एयर डिफेंस सिस्टम 400 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद दुश्मन के किसी भी मिसाइल, फाइटर जेट या ड्रोन को तबाह कर देगा। यह जमीन से हवा में मार करता है। इसके सेंसर्स दुनिया में सबसे बेहतरीन डिफेंस सेंसर्स बताए जाते हैं।

3) हमारे लिए क्यों अहम?
चीन और पाकिस्तान हमारे पड़ोसी हैं। दोनों से भारत के रिश्ते अच्छे नहीं हैं। दोनों की जुगलबंदी है और सबसे बड़ा खतरा कि दोनों परमाणु हथियारों से लैस हैं। मान लीजिए अगर चीन या पाकिस्तान भारत पर परमाणु या दूसरे मिसाइल से हमला करने का इरादा करते हैं और अगर ये S-400 डिफेंस सिस्टम हमारे पास है तो दुश्मन की किसी भी मिसाइल को भारत की वायु सीमा में पहुंचने के पहले ही ध्वस्त किया जा सकेगा।

4) क्यों विरोध कर रहा है अमेरिका?
भारत और अमेरिका के बीच स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप यानी रणनीतिक साझेदारी है। डोनाल्ड ट्रम्प ने सत्ता में आने के बाद अगस्त 2017 में एक कानून बनाया। इसके मुताबिक, अगर अमेरिका का कोई सहयोगी रूस से डिफेंस डील करता है तो उसे प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा। अमेरिका के रूस पर दो आरोप हैं। पहला- 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूस ने दखलंदाजी की साजिश रची। दूसरा- 2014 में क्रीमिया को यूक्रेन में मिलाने की कोशिश। आप कह सकते हैं कि इन दो बातों का बदला लेने के लिए अमेरिका अपने सहयोगी देशों को रूस से दूर करने की कोशिश कर रहा है। भारत पर भी दबाव डाला जा रहा है।

5) क्या भारत पर प्रतिबंध लगाएगा अमेरिका?
इसका जवाब अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट यानी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने पिछले दिनों दिया था। उनके मुताबिक- हम भारत जैसे अपने सबसे अहम स्ट्रैटेजिक पार्टनर के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने के बारे में नहीं सोच रहे हैं।

6) तो मायने क्या हुए?
पॉम्पियो के बयान को देखें तो अमेरिका किसी भी सूरत में भारत पर प्रतिबंध नहीं लगाएगा। इसकी दो वजह हैं। पहली- अमेरिका को एशिया में अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए भारत की जरूरत है। यहां चीन उसको चुनौती दे रहा है। दूसरा- अफगानिस्तान में अमेरिका को भारत की मदद की सख्त जरूरत है। क्योंकि, पाकिस्तान से उसके रिश्ते सबसे बुरे दौर में हैं और रूस तथा चीन मिलकर पाकिस्तान की मदद करते दिख रहे हैं। सीपैक और ज्वॉइंट मिलिट्री ड्रिल इसके उदाहरण हैं।

7) रूस ने क्या कहा?
चीन ने पिछले महीने रूस से फाइटर जेट डील की। नाराज अमेरिका ने चीन पर प्रतिबंध लगा दिए। तब रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रायवोकोव ने कहा- आग से खेलना मूर्खता है। यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

8) अब क्या करेगा अमेरिका?

अमेरिका के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं। पॉम्पियो खुद कह चुके हैं प्रेसिडेंट ट्रम्प इस मामले में अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं। बहुत आसान भाषा में समझें तो अधिकारों के इस्तेमाल का अर्थ ये है कि भारत को प्रतिबंधों या कानून के दायरे से बाहर रखा जाए।

9) भारत के लिए रूस अमेरिका से ज्यादा अहम क्यों

भारत और अमेरिका के बीच भले ही स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप हो लेकिन रूस से भारत के सैन्य और सांस्कृतिक रिश्ते अटूट हैं। एस-400 डील से यह और साफ हो जाता है। कुडनकुलम न्यूक्लियर प्रोजेक्ट का भी अमेरिका ने विरोध किया था। भारत नहीं झुका। 2012 से 2017 तक हथियार आयात के मामले में भारत नंबर एक था। कुल हथियार आयात में आज भी रूस का हिस्सा 65 फीसदी है। अमेरिका बहुत पीछे 15 फीसदी पर और इजराइल 11 प्रतिशत पर है। मेक इन इंडिया के लिए भी रूस भारत की हर शर्त मानने को तैयार है।

10) और ये भी आपके लिए जानना जरूरी
परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर अमेरिका ने ईरान पर सख्त प्रतिबंध लगाए हैं। भारत पिछले काफी समय से ईरान की मदद कर रहा है। वहां चाबहार पोर्ट भारत ने ही तैयार किया है। ईरान से हम लंबे वक्त से ऑयल इम्पोर्ट करते रहे हैं। अमेरिका ने जब इसे रोकना चाहा तो भारत ने इसमें छूट मांगी। अमेरिका का रुख अब तक लचीला रहा है। ट्रम्प ने कहा था- हमने सभी सहयोगियों से कहा है कि वो ईरान से कारोबारी रिश्ते ना रखें। इसमें सिर्फ भारत शामिल नहीं है। हमें उम्मीद है कि भारत हमारी चिंताओं को समझेगा।

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