Nirbhaya Case: निर्भया के 3 गुनहगारों पर रहम नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की सजा-ए-मौत टालने की याचिका

घटना में 6 आरोपी थे। बाद में इन्हें दोषी करार दिया गया था। इनमें से एक नाबालिग था। एक दोषी ने खुदकुशी कर ली थी।

DainikBhaskar.com| Last Modified - Jul 09, 2018, 03:34 PM IST

निर्भया की मां आशा देवी और पिता बद्रीनाथ सिंह। - फाइल

नई दिल्ली. Nirbhaya Case: निर्भया गैंगरेप और मर्डर केस मामले में सुप्रीम कोर्ट 3 दोषियों की रिव्यू पिटीशन (पुर्नविचार याचिका) खारिज कर दी है। इन दोषियों को अब फांसी की सजा होगी। तीनों ने सुप्रीम कोर्ट में मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने के लिए याचिका दायर की थी। निर्भया की मां आशा देवी और पिता बद्रीनाथ सिंह ने उम्मीद जताई थी कि फैसला उनके पक्ष में आएगा। 

 

फैसले के बाद किसने क्या कहा?

निर्भया के माता-पिता ने
- मां आशा देवी ने कहा, “वो नाबालिग नहीं थे। ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्होंने इस तरह के अपराध को अंजाम दिया। इस फैसले से हमारा न्यायपालिका में विश्वास बढ़ा है। पूरी उम्मीद है कि हमें निश्चित तौर पर इंसाफ मिलेगा। हमारा संघर्ष यहीं नहीं रुकेगा। न्याय में देरी हो रही है। इससे समाज की दूसरी बेटियां भी प्रभावित हो रही हैं। मेरी न्यायपालिका से भी अपील है कि वो अपने सिस्टम को सख्त बनाएं। निर्भया को न्याय तब मिलेगा, जब इन दरिंदों को जल्द से जल्द फांसी दी जाएगी।”


- पिता बद्रीनाथ सिंह ने कहा, “हम जानते थे कि रिव्यू पिटीशन जरूर खारिज हो जाएगी। लेकिन आगे क्या? क्योंकि, काफी वक्त गुजर चुका है और इस दौरान महिलाओं पर खतरा बढ़ता ही जा रहा है। मुझे लगता है कि उन्हें जितनी जल्दी फांसी हो जाए, उतना ही बेहतर है।”

 

दोषियों के वकील का रुख अलग - तीनों दोषियों के वकील एपी. सिंह ने कहा- न्याय सभी को मिलना चाहिए। इन बच्चों के साथ अन्याय हो रहा है। ये फैसला राजनीति, जनता और मीडिया के दबाव की वजह से आया है। महिला आयोग ने किया स्वागत - राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा- मैं इस फैसले का स्वागत करती हूं। इससे साबित हो गया कि न्याय में देरी हो सकती है लेकिन यह नकारा नहीं गया। यह फैसला मील का पत्थर साबित होगा। इससे यह भी साफ हो जाता है कि इस देश में कानून अपना काम जरूर करता है। निर्भया के परिवार के वकील ने क्या कहा? - निर्भया के परिवार के वकील रोहन महाजन ने कहा- यह हमारे लिए जीत का लम्हा है। न्यायपालिका में भरोसा बढ़ा है। हम आज संतुष्ट हैं। सरकार से सिर्फ यही गुजारिश है कि अब जो भी प्रकिया है उसे पूरा करे।

किसने सुनाया फैसला?
- सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच ने तीनों दोषियों की याचिका पर फैसला सुनाया। इस बेंच में जस्टिस आर, भानुमति और अशोक भूषण भी थे। 

 

फैसले से पहले निर्भया के पेरेंट्स ने क्या कहा था?
- न्यूज एजेंसी से बातचीत में निर्भया के पिता बद्रीनाथ सिंह ने कहा था- प्रधानमंत्री से अपील है कि वो महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ होने वाली अमानवीयता को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं। 

- वहीं, निर्भया की मां आशा देवी ने कहा था- घटना को 6 साल हो चुके हैं। इस तरह की घटनाएं रोज हो रही हैं। सही बात ये है कि हमारा सिस्टम फेल हो चुका है। हमें भरोसा है कि आज का फैसला हमारे पक्ष में आएगा। हमें इंसाफ मिलेगा। 

 

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क्या है निर्भया मामला?
- 6 साल पहले 16 दिसंबर 2012 की रात एक लड़की से गैंगरेप और क्रूरता की गई थी। बाद में उसे मरणासन्न स्थिति में सड़क पर फेंक दिया गया था। उसके साथ एक दोस्त भी था। उसके साथ भी काफी मारपीट की गई थी। घटना के खिलाफ देश का गुस्सा सड़क से संसद तक दिखाई दिया था।

- पीड़िता को इलाज के लिए सिंगापुर भी भेजा गया था। हालांकि, उसे बचाया नहीं जा सका। घटना में छह आरोपी थे। बाद में इन्हें दोषी करार दिया गया था। इनमें से एक नाबालिग था। वो तीन साल सजा काटकर बाहर आ चुका है। मुख्य दोषी रामसिंह ने जेल में खुदकुशी कर ली थी। बाकी चार जेल में हैं। इनमें से तीन ने सजा-ए-मौत के खिलाफ याचिका दायर की थी।  अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस याचिका को खारिज कर दिया है। 

 

 

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