घर का सपना कितना पूरा:लोन लेकर मकान खरीदने वालों के लिए बजट में नया कुछ नहीं, टैक्स में डेढ़ लाख रुपए की छूट एक साल बढ़ाई गई

2 वर्ष पहले

लोन लेकर मकान खरीदने वालों के लिए बजट में कुछ नया नहीं है। उन्हें लोन के ब्याज पर इनकम टैक्स में पिछले साल मिल रही कुल पांच लाख रुपए तक की छूट इस साल भी मिलेगी। दरअसल, लोन में ब्याज वाले हिस्से पर डेढ़ लाख रुपए की अतिरिक्त छूट मार्च 2022 तक के लिए बढ़ा दी गई है।

इनकम टैक्स में पांच लाख तक की छूट पा सकते हैं
आइए समझते हैं कि आप होम लोन पर किस तरह इनकम टैक्स में पांच लाख रुपए तक की छूट पा सकते हैं। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80 सी में होम लोन के प्रिंसिपल अमाउंट पर डेढ़ लाख रुपए तक की छूट ली जा सकती है। इस छूट को जस का तस रखा गया है। सेक्शन 24 के अंदर ब्याज पर दो लाख रुपए का डिडक्शन मिलता है, वह भी मिलता रहेगा।

डेढ़ लाख रुपए की अतिरिक्त छूट एक साल के लिए बढ़ी
बदलाव सिर्फ किफायती मकानों की खरीदारी पर होम लोन के ब्याज वाले हिस्से के भुगतान पर मिलने वाली टैक्स छूट को लेकर किया गया है। होम बायर्स को इनकम टैक्स के 80 ईई वाले सेक्शन में 45 लाख रुपए तक के लोन के इंटरेस्ट पर डेढ़ लाख रुपए की अतिरिक्त छूट मिल रही है। इसको एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है।

पचास लाख रुपए के मकान पर चार लाख रुपए तक का टैक्स बचेगा
अगर मकान की कीमत पचास लाख रुपए रहती है तो 80 ईईए वाले सेक्शन में 50 हजार रुपए की छूट मिलेगी। इस छूट को भी एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है। इस सूरत में होम लोन के प्रिंसिपल और इंटरेस्ट पर आपको कुल चार लाख रुपए तक का टैक्स बचाने में मदद मिलेगी। यह तो रही बजट से होम बायर्स को फायदे की बात। आइए देखते हैं कि इसमें रियल एस्टेट सेक्टर को क्या मिला है।

किफायती मकान बनाने वाले डेवलपर्स का टैक्स हॉलिडे एक साल बढ़ा
इंडिविजुअल बायर की तरह ही रियल एस्टेट सेक्टर को बजट से सीधे तौर पर कुछ खास नहीं मिला है। हां, यह बात जरूर है कि किफायती मकान बनाने वाले डेवलपर्स का टैक्स हॉलिडे एक साल के लिए बढ़ा दिया गया है। यानी उनको एक साल और अपने प्रॉफिट पर टैक्स नहीं देना पड़ेगा। इससे 2022 तक सबको मकान दिलाने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजना को सपोर्ट मिलेगा।

विदेशी निवेशकों को इनविट और रीट पर TDS नहीं देना होगा|
वित्त मंत्री ने रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को भी बढ़ावा देने की कोशिश की है। अब रियल एस्टेट कंपनियों के REIT यानी रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट और इनविट (इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट) में होने वाले निवेश के डिविडेंड पर TDS (टैक्स डिडक्टेड ऑन सोर्स) नहीं देना होगा। अभी विदेशी निवेशक इन दोनों तरीकों से इस सेक्टर में जो पैसा लगाते हैं, उस पर डिविडेंड के जरिए मिलने वाले रिटर्न पर 10% तक का टैक्स कटता है।

रियल्टी सेक्टर पर दिग्गजों की राय, सस्ती आवास योजना पर फोकस
दैनिक भास्कर ने बजट 2021 के बाद उसमें हुए ऐलानों का हाउसिंग सेगमेंट पर पड़ने वाले असर के बारे में रियल एस्टेट सेक्टर के दिग्गजों की राय जानी। क्रेडाई नेशनल के चेयरमैन जक्षय शाह, नारेडको महाराष्ट्र के ज्वाइंट सेक्रेटरी रोहित पोद्दार, नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और एमडी शिशिर बैजल, एज्लो रियल्टी के सीईओ क्रिश रवेशिया, एस रहेजा रियल्टी के डायरेक्टर राम रहेजा सहित कमोबेश सभी ने कहा कि बजट में रियल्टी को लेकर पीएम की सस्ती आवास योजना पर फोकस किया गया है।

बायर्स के लिए डिडक्शन, डेवलपर्स के लिए टैक्स हॉलिडे, REIT और INVit पर टैक्स छूट

इंडस्ट्री लीडर्स ने हमारा ध्यान उन बिंदुओं की तरफ खींचा, जो सस्ती आवास योजना पर फोकस की पुष्टि करते हैं। उनमें सस्ती आवास योजना में बायर्स का टैक्स डिडक्शन एक साल बढ़ाना, डेवलपर्स को एक साल और टैक्स छूट देना, NRI को डबल टैक्सेशन की मार से राहत दिलाना, रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट यानी रीट (REIT) और इंफ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट यानी इनविट (INVit) जैसे निवेश विकल्पों को आकर्षक बनाना शामिल है।

कितना बड़ा है अपना रियल्टी सेक्टर?

यह तो रही बजट की बात। आइए देखते हैं कि हमारी रियल एस्टेट इंडस्ट्री GDP में अहम योगदान करने वाले आर्थिक क्षेत्रोंं के बीच कहां खड़ी है। जहां तक देश की अर्थव्यवस्था में सेक्टर के योगदान की बात है तो इसका हिस्सा 7% है। 2030 तक देश के GDP में रियल एस्टेट का हिस्सा लगभग दोगुना यानी 13% पर पहुंच सकता है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि वर्कफोर्स का हर दूसरा आदमी इस सेक्टर में लगा है। एक अनुमान के मुताबिक, 2025 में रियल एस्टेट सेक्टर का साइज एक लाख करोड़ रुपए का हो सकता है।

पीएम आवास योजना-ग्रामीण में लगभग आधे मकान ही बन पाए हैं

किफायती मकान बनाने वाले डेवलपर्स का टैक्स हॉलिडे एक साल बढ़ाने से प्रधानमंत्री आवास योजना को काफी सपोर्ट मिलेगाए लेकिन यहां देखने वाली बात यह है कि डेडलाइन खत्म होने में सिर्फ एक साल रह गया है और पीएम आवास योजना-ग्रामीण में अब तक टारगेट से आधे ही मकान बन पाए हैं।

लॉकडाउन ​​​​से थमी थी ग्रामीण इलाकोंं में सस्ते मकान बनने की रफ्तार
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में 2022 तक 2 करोड़ 23 लाख मकान बनने हैं, लेकिन अब तक 1 करोड़ 27 लाख मकान ही बन पाए हैं। मकानों के समय पर तैयार नहीं होने का कारण कोविड-19 के चलते हुए लॉकडाउन को बताया जा रहा है। देखते हैं कि ताजा आंकड़े क्या कहते हैं।

किफायती मकानों के लिए होम लोन लेने पर इनकम टैक्स में मिल रही छूट एक साल बढ़ गई है, लेकिन आपकी जेब कहां, कितने तक का मकान खरीदने की इजाजत देती है, यह भी देखना जरूरी है।

किस शहर में सबसे किफायती है मकान खरीदना?
आइए, हम अब आपको बताते हैं कि देश के किस शहर में मकान खरीदना आपके लिए ज्यादा किफायती होगा। गुजरात का अहमदाबाद सबसे सस्ता शहर है जहां आपको मकान खरीदने के लिए अपनी इनकम का सबसे कम हिस्सा EMI में झोंकना पड़ेगा। नाइट फ्रैंक अफोर्डेबिलिटी इंडेक्स के मुताबिक, इसकी वजह मकानों की कीमत में गिरावट और कई दशक में सबसे कम ब्याज दर है। एक नजर इन शहरों की लिस्ट पर डाल लेते हैं।

लॉकडाउन खत्म होने के बाद हाउसिंग मार्केट में क्या हुआ, एक नजर इस पर भी मार लेते हैं।

किफायती मकानों की बिक्री कम रही, ज्यादा बिके 50 लाख रुपए से महंगे मकान
कोविड-19 के चलते पहली छमाही में इंडियन रियल एस्टेट मार्केट की सेल्स में तेज गिरावट आई थी। दूसरी छमाही में मामला उलट गया और पचास लाख रुपए से ज्यादा के मकानों की बिक्री ज्यादा हुई। दूसरी छमाही में जितने मकान बिके, उनमें 57% पचास लाख रुपए से ज्यादा के थे जबकि 43% मकान अफोर्डेबल थे।

बड़े शहरों में मकानों का पुराना स्टॉक निकालने में लगे रहे डेवलपर
अनबिके मकानों की संख्या दूसरी छमाही में मामूली तौर पर घटी। इसका मतलब डेवलपर पुराना स्टॉक निकालने में लगे रहे। इस बात का पता 8 बड़े शहरों में बिक्री के आंकड़ों से चलता है। मकानों का स्टॉक 2020 में लगातार छठे साल घटा और 2019 के मुकाबले 2% कम होकर 437,920 मकान रहा।

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