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रेलवे को 53% ज्यादा बजट:पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विस्टा डोम कोच वाली ट्रेनें चलेंगी, टियर-2 शहरों में मेट्रो लाइट्स और मेट्रो नियो शुरू होंगी

नई दिल्लीएक वर्ष पहले

इस बार के बजट में ट्रेन से सफर करने वालों के लिए कुछ खास नहीं था। एक भी नई ट्रेन चलाने की घोषणा नहीं की गई, हालाकि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विस्टा डोम कोच वाली ट्रेन चलाई जाएंगी। रेलवे कर्मचारियों को लेकर भी वित्त मंत्री कुछ नहीं बोलीं। हां, मेट्रो ट्रेन के विस्तार पर फोकस जरूर रहा।

इस बार रेलवे को 1.10 लाख करोड़ रुपए का बजट दिया है, जो पिछली बार से करीब 38 हजार करोड़ यानी 53% ज्यादा है। पिछले वित्त वर्ष के बजट में सरकार ने रेलवे को 72.21 हजार करोड़ रुपए दिए थे।

आम आदमी के लिए कुछ खास नहीं
यात्रियों को अच्छा अनुभव देने के लिए बजट में विस्टा डोम कोच शुरू करने की घोषणा की गई। दिसंबर 2020 में 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली विस्टा डोम कोच ट्रेन का कामयाब ट्रायल किया गया था। ये कोच टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किए जा रहे हैं।

विस्टा डोम कोचों में बड़े शीशे वाली साइड खिड़कियां लगी होती है और शीशे की छत होती है। कोच में घूमने वाली सीटें भी लगाई जाती हैं। यात्री इनकी मदद से बाहर के मनोरम दृश्यों का नजारा ले सकते हैं।

टियर-2 शहरों में मेट्रो लाइट्स और मेट्रो नियो शुरू होंगी
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने बताया कि 702 किमी ट्रैक पर मेट्रो अभी चल रही हैं। 27 शहरों में 1016 किमी मेट्रो पर काम और चल रहा है। इसके अलावा कम लागत से टियर-2 शहरों में मेट्रो लाइट्स और मेट्रो नियो शुरू होंगी।

कोच्चि मेट्रो में 1900 करोड़ की लागत से 11 किमी हिस्सा बनाया जाएगा। चेन्नई में 63 हजार करोड़ रुपए की लागत से 180 किमी लंबा मेट्रो रूट बनेगा। बेंगलुरु में भी 14788 करोड़ रुपए से 58 किमी लंबी मेट्रो लाइन बनेगी। नागपुर में 5976 करोड़ और नासिक में 2092 करोड़ से मेट्रो बनेगी।

माल ढुलाई: पुराने 'नेशनल रेल प्लान 2030' को ही दोहराया
माल ढुलाई को लेकर कोई नई घोषणा नहीं हुई। वित्त मंत्री ने अपने पुराने नेशनल रेल प्लान 2030 की ही बात की, जिसे 2020 में शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि रेलवे ने नेशनल रेल प्लान 2030 बनाया है ताकि फ्यूचर रेडी रेलवे सिस्टम बनाया जा सके और माल ढुलाई की लागत कम की जा सके। जून 2022 तक ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तैयार हो जाएगा। सोमनगर-गोमो सेक्शन पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP मोड) से बनाया जाएगा। गोमो-दनकुनी सेक्शन भी इसी तर्ज पर बनेगा। खड़गपुर-विजयवाड़ा, भुसावल-खड़गपुर, इटारसी-विजयवाड़ा में फ्यूचर रेडी कॉरिडोर बनाए जाएंगे। नेशनल रेल प्लान के तहत 2030 तक माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाकर 45% करने का लक्ष्य है।

दिसंबर 2023 तक सभी रेलवे लाइन को इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य
दिसंबर 2023 तक 100% ब्रॉडगेज (बड़ी लाइन) का इलेक्ट्रिफिकेशन का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, ये आसान नहीं होगा, क्योंकि मोदी सरकार में 2014 से 2019 तक यानी 5 सालों में 13,687 किलोमीटर ब्रॉडगेज को इलेक्ट्रिक लाइन में बदला गया। यानी हर साल करीब 2700 किमी। वहीं, 1 अक्टूबर 2020 तक 41,548 किमी ट्रैक को इलेक्ट्रिफिकेशन किया जा चुका है। यानी कुल 67,420 में से 41,548 किमी ट्रैक इलेक्ट्रिक हो गया है। अब 3 साल में करीब 26 हजार किमी का काम करना है। ऐसे में करीब सालाना 8,600 किमी लाइन इलेक्ट्रिक करनी होगी, जो आसान नहीं होगा।

सरकार का ध्यान प्राइवेट ट्रेनों पर, इनका किराया 50% तक ज्यादा
इस बार के बजट में सरकार का ध्यान प्राइवेट ट्रेन चलाने पर रहा। अभी देश में दो प्राइवेट ट्रेन 'तेजस एक्सप्रेस' लखनऊ-नई दिल्ली और अहमदाबाद-मुंबई रूट पर चलाई जा रही हैं। इन ट्रेनों का किराया आम एक्सप्रेस ट्रेनों के मुकाबले 50% तक ज्यादा है।

पिछले बजट में घोषित 150 ट्रेनों में से अभी तक 1 भी ट्रेन नहीं चली
वित्त वर्ष 2020-21 में सरकार ने जो 150 नई ट्रेन चलाने की घोषणा की थी, उनमें से अभी तक एक भी ट्रेन को लेकर काम शुरू नहीं हुआ है। हाल ही में इनके लिए आवेदन बुलाए गए थे जिनमें से 102 आवेदनों को योग्य पाया गया है। इनमें लार्सन एंड टुब्रो (L&T), BHEL, IRCTC और GMR समेत अन्य ऑपरेटर शामिल हैं।

पैसा कमाने के लिए रेलवे को ज्यादा खर्च करना पड़ रहा
देश में रेलवे की हालत ठीक नहीं है। रेलवे की हालत जानने का आसान तरीका है, ऑपरेटिंग रेशो। ऑपरेटिंग रेशो, यानी ‌100 रुपए कमाने के लिए रेलवे को कुल कितने रुपए खर्च करने पड़े। 1950-51 में यह 81 रुपए था जो 2019-20 में बढ़कर 98.41 रुपए हो गया। जो अब तक का सबसे खराब रेशो है।

कोरोना के दौर में टिकट कैंसिल करने के कारण हुआ नुकसान
रेलवे को कोरोना के दौर में यात्रियों को कैंसिल टिकट का पैसा वापस करने से बड़ा घाटा हुआ है। रेलवे ने कोरोना महामारी के कारण इस साल 1.78 करोड़ से ज्यादा टिकट रद्द किए। इसके कारण रेलवे को 2727 करोड़ रुपए की रकम यात्रियों को लौटानी पड़ी। रेलवे ने 25 मार्च 2020 से पैसेंजर ट्रेनों को रद्द कर दिया था।

रेलवे की आमदनी 71% घटी
रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने दिसंबर में बताया था कि मौजूदा वित्त वर्ष में यात्रियों से रेलवे को अब तक 4,600 करोड़ रुपए की कमाई हुई है और अनुमान है कि मार्च 2021 तक यह बढ़कर 15 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगी। पिछले साल (वित्त वर्ष 2019-20) रेलवे को यात्रियों से 53 हजार करोड़ रुपए की आमदनी हुई थी।

5 सालों में खर्च 43% और आय 32% बढ़ी
सरकार रेलवे को आधुनिक बनाने के लिए काफी पैसे खर्च कर रही है, लेकिन उसकी कमाई इस हिसाब से नहीं बढ़ रही है। बीते 5 सालों में रेलवे पर खर्च 43% बढ़ा है, जबकि इसकी कमाई में 32% की ही बढ़ोतरी हुई है।

भारतीय रेल में रोजाना सबसे ज्यादा 2.30 करोड़ लोग सफर करते हैं
देश में रोजाना 2.30 करोड़ लोग रेल यात्रा करते हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। चीन में रोजाना करीब 69 लाख लोग रेल सफर करते हैं। देश में वित्त वर्ष 2018-19 में 843 करोड़ लोगों ने रेल यात्रा की थी।

रेलवे ट्रैक बिछाने के मामले में मोदी सरकार आगे
मार्च 2014 तक देश में 65.15 हजार किलोमीटर का रेल मार्ग था। जो मार्च 2019 में बढ़कर 67.42 हजार किलोमीटर का हो गया। बीते 5 सालों यानी मार्च 2019 तक मोदी सरकार में 2270 किलोमीटर रेल मार्ग बनाया गया। मनमोहन सरकार की बात करें तो मार्च 2009 से मार्च 2014 तक यानी 5 सालों में 1690 हजार किलोमीटर रेल मार्ग ही बना था।

चीन स्पीड और ट्रैक के मामले में भारत से दाेगुना आगे
चीनी रेलवे भारत की तुलना में स्पीड और ट्रैक के मामले में काफी आगे है। यहां ट्रेन की मैक्सिमम स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटा है जो भारत में चलने वाली सबसे तेज ट्रेन तेजस एक्सप्रेस से दोगुना है। इसके अलावा चीन के रेलवे ट्रैक की कुल लंबाई भी भारत से ज्यादा है।