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मैं ट्रेन में सफर करती हूं, मुझे चाहिए सुरक्षा:रेल बजट में टिकट में छूट नहीं, हर डिब्बे में महिला पुलिस चाहिए, लोअर बर्थ मिले, दूध-पानी का इंतजाम हो

नई दिल्ली4 महीने पहलेलेखक: बजट टीम

मेरा नाम जागृति त्रिपाठी है। मेरा मायका इंदौर में है और ससुराल उदयुपर में। मैं कोशिश करती हूं कि साल में भाई दूज और राखी पर मायके में ही रहूं। मुझे रेल बजट में सस्ता टिकट या नई ट्रेन नहीं चाहिए। आपके पास जो कुछ भी है, पहले उसे ही ठीक कर लीजिए…

  • महिलाओं को लोअर बर्थ मिले। सोने के लिए ऊपर चढ़ो, सामान चढ़ाओ। बहुत परेशानी होती है।
  • हर डिब्बे में लेडीज के लिए अलग टॉयलेट हो। बहुत गंदगी रहती है।
  • डिब्बों में सीसीटीवी कैमरे लगे हों। कम से कम रात में चैन की नींद सो सकें।
  • ट्रेन में सब लड़कियों को छेड़छाड़ या भद्दे कमेंट्स सुनने पड़ते हैं। हर डिब्बे में महिला पुलिस हो।
  • मैं मेट्रो ट्रेन में भी बैठी हूं। वैसे ही सब ट्रेनों में महिलाओं के लिए अलग डिब्बे हों।
  • मैं एक बच्चे की मां हूं और मुझे ट्रेन में उसके लिए गरम दूध और पानी चाहिए होता है।
  • मैं या मेरा बच्चा बीमार पड़ें तो डॉक्टर या नर्स मिले। अब इसके लिए भी पैसे मत काट लेना।
  • सीट इतनी चौड़ी हो कि मां और बच्चा एक साथ सो सकें। नीचे की सीट में तो बैठने की भी जगह नहीं होती।
  • प्लेटफॉर्म तक जाने के लिए पहले सामान लेकर पूरी सीढ़ियां चढ़ो फिर नीचे उतरो। ये क्या सिस्टम है?

हमने आम बजट आने से पहले जागृति को फोन किया था। उनसे पूछा था कि बताइए, इस बार रेल बजट में आपको क्या चाहिए- नई ट्रेनें, सुपरस्पीड वाली बुलेट ट्रेन, मॉर्डन कोच, चमचमाते स्टेशन, फ्री वाई-फाई, अंडरग्राउंड ट्रेन, कवर्ड ट्रैक, एंटी फॉगिंग सिस्टम या इलेक्ट्रिक ट्रेन? जागृति ने कहा कि आप भी सरकार की तरह प्रॉब्लम को नहीं पकड़ पा रहे हैं। इन चीजों का मैं क्या करूंगी? एक तरफ आपके पास जो ट्रेनें हैं, उनमें इतनी गंदगी रहती है कि उबकाई आ जाए। दूसरी तरफ आप कहते हैं कि हम बुलेट ट्रेन लाएंगे। इमरजेंसी में ट्रेन रोकने के लिए या तो चेन नहीं होती। होती भी है तो वो खिंचती ही नहीं, और आप सोचते हैं कि हाई-फाई डिब्बे बना देंगे? पहले आपके पास जो भी है, उसी को ठीक कर लीजिए। जिस स्टेशन से दरवाजों से बाहर लटकते लोगों की ट्रेन जाती है वहां आप बुलेट ट्रेन कैसे चलाएंगे?

जागृति का कहना है कि ‘मुझे तो जो भी चीजें खराब लगीं, मैंने बता दीं। ऐसा भी नहीं है कि इसको ठीक करने के लिए सरकार को टिकट महंगा करना पड़े। जानकार बताते हैं कि दुनिया के चौथे सबसे लंबे रेल नेटवर्क- भारतीय रेलवे को पिछले साल 26 हजार करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ा है। इसकी बड़ी वजह कोरोना भी है। जिसकी वजह से पूरे साल पैसेंजर ट्रेनें नहीं चलीं। लॉकडाउन में काम-धंधा भी बंद हो गया था तो मालगाड़ियां भी कम ही चलीं। इससे देश में सबसे ज्यादा (करीब 15 लाख) सरकारी नौकरी देने वाले रेलवे को काफी घाटा सहना पड़ा। अभी सरकार के पास भारतीय रेल को चमकाने के लिए कई योजनाएं हैं, जिसके लिए काफी पैसे भी चाहिए होंगे। लेकिन जानकार बताते हैं कि आने वाले चुनावों को देखते हुए टिकट के दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे।

शिकवा-शिकायतों पर आगे बढ़ने से पहले, एक मिनट में हमारी रेल और इसके बजट की कहानी भी जान लीजिए

सरकार के सामने एक चुनौती यह भी है कि जागृति जैसी युवा महिलाओं की उम्मीदों पर खरी उतरे। आइए, जान लेते हैं कि अभी महिलाओं को ट्रेन में कौन सी 10 अहम छूट मिलती हैं-

  • 58 साल से ऊपर की महिलाओं का आधा टिकट लगता है।
  • लेडीज कोटे में हर डिब्बे में 6 लोअर सीट महिलाओं के लिए। मां और 12 साल तक के बच्चे को भी सीट।
  • 45 साल या इससे ऊपर की उम्र की महिलाओं के लिए 2 लोअर बर्थ। लेकिन इसमें एक बार में केवल 2 टिकट बुक होंगे।
  • अगर 45 साल से उम्र की 3 महिलाएं साथ सफर कर रही हैं, तो तीसरी को टिकट नहीं मिलेगा।
  • 45 साल से ऊपर की महिलाओं के लिए 12 सीट- स्लीपर में 6, 3AC और 2AC में 3-3 सीटें।
  • ट्रेन के चलने के बाद कोई सीट खाली है तो मिडिल या अपर सीट वाली महिला अपनी सीट बदलवा सकती है।
  • रेलवे स्टेशन के रिजर्वेशन काउंटर पर महिलाओं के साथ ही सीनियर सिटिजन के लिए अलग काउंटर होता है।
  • कई ट्रेनों में सबसे आगे लेडीज कोच या कंपार्टमेंट होता है।
  • महिलाओं के लिए वेटिंग रूम या वेटिंग हॉल अलग होता है।
  • शहीद की पत्नी को किराए में 45 फीसदी तक छूट मिलती है।

…लेकिन महिलाओं को मिलने वाली ये सीटें तुरंत भर जाती हैं। अगर सीट मिल भी गई तो ट्रेनों में छेड़छाड़ के केस सामने आते हैं। इसके लिए क्या किया जा सकता है?

सफर में मिले ‘मेरी सहेली’ का साथ

‘मेरी सहेली’, ट्रेन में सफर कर रही महिलाओं की सुरक्षा के लिए शुरू की गई मुहिम का नाम है। 17 अक्टूबर 2020 से देश भर में 244 टीमें अलग-अलग ट्रेनों में महिला यात्रियों के पास जाती है। उनका हाल-चाल लेती है और पूछती है उन्हें कोई परेशानी तो नहीं। कोई दिक्कत हुई तो उसे दूर भी किया जाता है। एक हेल्पलाइन नंबर भी है- 182, इसमें शिकायत करने पर तुरंत एक्शन लिया जाता है। अभी यह केवल लंबी दूरी की ट्रेनों में ही किया जा रहा है। जरूरत है कि सभी ट्रेनों में महिलाओं को ‘मेरी सहेली’ का साथ मिले।

ऐसा नहीं है कि महिलाएं सिर्फ रेल में सुविधाएं ही मांग रही हैं। कई जगहों पर तो महिलाएं रेल के सफर को सबके लिए सुविधाजनक बना रही हैं। यहां रेल से लेकर स्टेशन तक, सबकुछ महिलाएं ही चलाती हैं

माटुंगा रेलवे स्टेशन (महाराष्ट्र): लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज देश का पहला रेलवे स्टेशन जहां सभी 41 कर्मचारी महिला हैं।

गांधी नगर रेलवे स्टेशन (राजस्थान): जी हां, ये गुजरात वाला नहीं राजस्थान के जयपुर वाला गांधी नगर है। केवल महिला कर्मचारी वाला दूसरा रेलवे स्टेशन। यहां 40 महिला रेलवे कर्मी हैं।

अजनी रेलवे स्टेशन (महाराष्ट्र): केवल महिला कर्मचारी वाला तीसरा रेलवे स्टेशन है। 22 महिलाकर्मी तैनात हैं।

मणिनगर रेलवे स्टेशन (गुजरात): चौथा स्टेशन, जहां सभी महिला कर्मचारी। 36 महिलाओं पर पूरे स्टेशन का जिम्मा है।

चंद्रागिरी रेलवे स्टेशन (आंध्र प्रदेश): केवल महिलाओं वाला चौथा स्टेशन। इसमें 12 कर्मचारी।

अब चलते-चलते, एक नजर में हमारी रेल की ये अनोखी बातें भी जान लीजिए

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