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पर्सनल फाइनेंस:हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय देखें इसमें इलाज के अलावा कोरोना टेस्ट और एम्बुलेंस जैसे अन्य खर्चे भी कवर होंगे या नहीं?

नई दिल्ली2 वर्ष पहले
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हर बीमा कंपनी के अपने नियम होते हैं, उसी हिसाब से वे पॉलिसी बनाती हैं। हेल्थ पॉलिसी खरीदने से पहले यह समझ लें कि उसमें कितना और क्या आर्थिक कवर मिलेगा? - Dainik Bhaskar
हर बीमा कंपनी के अपने नियम होते हैं, उसी हिसाब से वे पॉलिसी बनाती हैं। हेल्थ पॉलिसी खरीदने से पहले यह समझ लें कि उसमें कितना और क्या आर्थिक कवर मिलेगा?
  • कई इश्योरेंस कंपनियों ने कोरोना के लिए अलग से प्लान शुरू किए हैं।
  • आयुष्मान योजना के तहत भी कोरोना का इलाज मुफ्त हो सकेगा।

अगर आप कोई ऐसा इंश्योरेंस लेना चाहते हैं जिसमें कोरोनावायरस का इलाज भी कवर हो, तो आपको इस दौरान इस बात का विशेष ध्यान देना चाहिए कि इलाज में क्या-क्या कवर होगा? कई इश्योरेंस कंपनियां ऐसी हैं जिन्होंने कोरोना के लिए अलग से प्लान शुरू किए हैं। अगर आप भी इन दिनों कोरोना या अन्य बीमारियों के इलाज को कवर करने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लेने का विचार कर रहे हैं तो हम आपको बता रहे हैं  कि हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

कोरोनावायरस जैसी महामारी कवर होंगी या नहीं?
हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लेने से पहले इस बात का ध्यान रखें की इसमें सभी बीमारियों के अलावा महामारी जैसे स्वाइल फ्लू या कोरोनावायरस के इलाज का खर्च कवर है या नहीं। एचडीएफसी एग्रो हेल्थ इंश्योरेंस के ब्रांच मैनेजर अतुल सागर ने बताया कि कोई भी व्यक्ति जिसने किसी भी कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस ले रखा हो, वह कोरोना के इलाज का क्लेम लेने के लिए पात्रता रखता है लेकिन शर्त यह है कि पॉलिसी का 30 दिन का वेटिंग पीरियड खत्म हो गया हो और वह हॉस्पिटल में एडमिट होकर कोरोनावायरस का इलाज करा रहा हो।

क्या-क्या कवर है इस बात का ध्यान रखें?
हर बीमा कंपनी के अपने नियम होते हैं, उसी हिसाब से वे पॉलिसी बनाती हैं। हेल्थ पॉलिसी खरीदने से पहले यह समझ लें कि उसमें कितना और क्या आर्थिक कवर मिलेगा? जिस पॉलिसी में ज्यादा से ज्यादा चीजें जैसे टेस्ट का खर्च और एम्बुलेंस का खर्च कवर हो उस पॉलिसी को लेना चाहिए। ताकि आपको जेब से पैसे खर्च न करने पड़ें।  

पहले से मौजूद बीमारियां कवर हैं कि नहीं?
सभी हेल्थ इंश्योरेंस प्लान पहले से मौजूद बीमारियों को कवर करते हैं। लेकिन, इन्हें 48 महीने के बाद ही कवर किया जाता है। कुछ 36 महीने बाद इन्हें कवर करते हैं। हालांकि, पॉलिसी खरीदते वक्त ही पहले से मौजूद बीमारियों के बारे में बताना होता है। इससे क्लेम सेटेलमेंट में दिक्कत नहीं आती है।

निवेश करने से पहले तुलना करें
प्रीमियम राशि की तुलना हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों के साथ हमेशा की जानी चाहिए जो एक जैसे फायदे देते हैं। यह सुनिश्चित करेगा कि आप अपनी हेल्थ इश्यारेंस पॉलिसी से अधिकतम लाभ प्राप्त करें। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, Clinikk और टाटा एआईए लाइफ इंश्योरेंस जैसी कई बीमा कपनियां कोरोना वायरस के लिए अलग से इंश्योरेंस प्लान लेकर आई हैं। आप इनमे से भी अपने लिए प्लान चुन सकते हैं।

अस्पतालों का नेटवर्क 
किसी भी हेल्थ प्लान में निवेश करने से पहले सुनिश्चित करें कि आप योजना के तहत आने वाले नेटवर्क अस्पतालों पर विचार किया है। नेटवर्क अस्पताल अस्पतालों का एक समूह हैं जो आपको अपनी वर्तमान हेल्थ प्लान को भुनाने की अनुमति देता है। हमेशा उसी प्लान के लिए जाएं जो आपके क्षेत्र में अधिकतम नेटवर्क अस्पताल प्रदान करता है अन्यथा आपका निवेश आपात स्थिति के समय में काम में नहीं आएगा।

लिमिट या सब लिमिट वाला प्लान न लें
अस्पताल में प्राइवेट रूम के किराए जैसी लिमिट से बचें। आपके लिए यह जरूरी नहीं है कि इलाज के दौरान आपको किस कमरे में रखा जाए। खर्च के लिए कंपनी द्वारा लिमिट या सब लिमिट तय करना आपके लिए ठीक नहीं है। पॉलिसी लेते समय इस बात का ध्यान रखें। सब-लिमिट का आशय री-इंबर्समेंट की सीमा तय करने से है। मसलन अस्पताल में भर्ती हुए तो कमरे के किराए पर बीमित राशि के एक फीसदी तक की सीमा हो सकती है। इस तरह पॉलिसी की बीमित राशि भले कितनी हो, सीमा से अधिक खर्च करने पर अस्पताल के बिल जेब से चुकाने पड़ सकते हैं।

आयुष्मान भारत-पीएम जन आरोग्य योजना के तहत भी मिलेगा इलाज
आयुष्मान भारत-पीएम जन आरोग्य योजना के तहत आपको मुफ्त इलाज तो मिलेगा ही साथ ही प्राइवेट लैब्स और हॉस्पिटल में होने वाला कोरोना टेस्ट भी इस योजना के तहत किया जाएगा। यानी इस योजना के लाभार्थियों का इलाज और टेस्ट फ्री हो जाएगा। सरकारी अस्पतालों में इसकी टेस्टिंग और इलाज पहले से ही फ्री है। करीब 50 करोड़ लोगों को फायदा मिलेगा।