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पर्सनल फाइनेंस / कोरोना संकट में पैसे की जरूरत पड़ने पर म्यूचुअल फंड से किस्तों में निकाल सकते हैं पैसा

कोरोनावायरस के कारण देशभर में लागू किए गए लॉकडाउन के मद्देनजर अनेक लोगों को नकदी की कमी के रूप में आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है कोरोनावायरस के कारण देशभर में लागू किए गए लॉकडाउन के मद्देनजर अनेक लोगों को नकदी की कमी के रूप में आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है
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कोरोनावायरस के कारण देशभर में लागू किए गए लॉकडाउन के मद्देनजर अनेक लोगों को नकदी की कमी के रूप में आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैकोरोनावायरस के कारण देशभर में लागू किए गए लॉकडाउन के मद्देनजर अनेक लोगों को नकदी की कमी के रूप में आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है

  • म्यूचुअल फंड से रिडेम्प्शन यानी निकासी भी एकमुश्त के बजाय सिस्टेमैटिक तरीके से मतलब किस्तों में की जा सकती है
  • लॉकडाउन या किसी भी आर्थिक दिक्कत के दौरान नकदी की जरूरत पड़ने पर यह एक बेहतर विकल्प है

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 07:57 AM IST

मुंबई. म्यूचुअल फंड में सिस्टेमैटिक तरीके से किया गया निवेश ‘सिप’ कहलाता है। लेकिन म्यूचुअल फंड से रिडेम्प्शन यानी निकासी भी एकमुश्त के बजाय सिस्टेमैटिक तरीके से मतलब किस्तों में की जा सकती है। यह संभव है सिस्टेमैटिक विड्रावल प्लान (SWP) के जरिए। कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए देशभर में लागू किए गए लॉकडाउन के मद्देनजर अनेक लोगों को नकदी की कमी के रूप में आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा और अब भी करना पड़ रहा है। ऐसे लोगों के लिए यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है। पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट अजीत कुमार आपको इस स्कीम के बारे में बता रहे हैं।

क्या है एसडब्ल्यूपी?

यह निवेशकों को नियमित अंतराल पर एक निश्चित राशि की निकासी की सुविधा उपलब्ध कराता है। इसके तहत आप म्यूचुअल फंड में जमा निवेश की राशि को मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना तौर पर निकाल सकते हैं। निवेशक चाहें तो हर अंतराल (मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना) पर कुल निवेश की एक निश्चित रकम निकाल सकते हैं या फिर चाहें तो वे सिर्फ निवेश पर मुनाफे की राशि (रिटर्न) निकाल सकते हैं।

कब कर सकते हैं शुरुआत?

इसकी शुरुआत कभी भी की जा सकती है। पहला निवेश करते ही इसे शुरू किया जा सकता है। वहीं बीच में भी यानी अगर किसी स्कीम में निवेश कर रहे हैं तो रेगुलर कैश फ्लो की जरूरत के लिए आप उसमें एसडब्ल्यूपी विकल्प को एक्टिवेट कर सकते हैं। इस सुविधा को कभी भी बंद किया जा सकता है।

इसे एक उदाहरण से समझते हैं

यदि आपके पास फिलहाल किसी म्यूचुअल फंड स्कीम की 10 हजार यूनिट हैं, जिसका प्रति यूनिट नेट एसेट वैल्यू यानी एनएवी 50 रुपए है तो आपका टोटल इन्वेस्टमेंट वैल्यू हुआ 10,000 X 50 = 5 लाख रुपए। यदि आप प्रति महीने 5,000 रुपए का एसडब्ल्यूपी (विड्रावल प्लान) चुनते हैं तो पहले महीने आपकी 100 यूनिट का रिडेम्प्शन हो जाएगा। अब आपके पास 9,900 यूनिट बचेंगी। अगले महीने यदि एनएवी गिरकर 50 रुपए से 45 रुपए हो जाता है तो आपके पास बची हुई 9,900 यूनिट (वैल्यूएशन 4,45,500 रुपए) में से अब 111 यूनिट का रिडेम्प्शन हो जाएगा, ताकि आपको करीब 5000 रुपए मिल सके (111 X 45 = 4995 रुपए)। कहने का मतलब प्रति महीने एनएवी के हिसाब से यूनिट में कमी होती जाएगी।

क्या हैं टैक्सेशन के प्रावधान?

इस स्कीम में विड्रावल की राशि में रिटर्न का जो कंपोनेंट होगा, केवल उसी पर टैक्स लगेगा। हालांकि टैक्सेशन के नियम इक्विटी और डेट फंड की तरह ही हैं। मसलन अगर डेट फंड है तो 36 महीने के अंदर रिडीम करने पर कैपिटल गेन, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स के तौर पर आपकी इनकम में जुड़ जाएगा और आपको टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होगा। वहीं अगर आप 36 महीने के बाद रिडीम करते हैं तो कैपिटल गेन पर 20 फीसदी का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स इंडेक्सेशन के फायदे को समायोजित करने के बाद देना होगा। वहीं अगर इक्विटी फंड है तो एक साल से पहले रिडीम करने पर कैपिटल गेन पर 15 फीसदी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स जबकि एक साल के बाद रिडीम करने पर सालाना एक लाख रुपए से ज्यादा की इनकम पर 10 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन गैक्स देना होगा। सिस्टेमैटिक विड्रावल पर टीडीएस का प्रावधान नहीं है।

सिप की तरह एसडब्ल्यूपी में भी एवरेजिंग का फायदा मिलता है, क्योंकि आम निवेशक के लिए मार्केट को टाइम करना (तेजी या मंदी का सटीक आकलन करना) आसान नहीं है। इसलिए अगर नियमित अंतराल पर पैसों की जरूरत है तो इस विकल्प को आजमाया जा सकता है।

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