पर्सनल फाइनेंस / कर्ज के साथ जीने की आदत से बाहर निकलने में देरी मत कीजिए, जीरो डेट जिंदगी की सबसे बड़ी असेट्स है

बदलते माहौल में अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाकर कर्ज मुक्त बन सकते हैं बदलते माहौल में अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाकर कर्ज मुक्त बन सकते हैं
X
बदलते माहौल में अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाकर कर्ज मुक्त बन सकते हैंबदलते माहौल में अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाकर कर्ज मुक्त बन सकते हैं

  • देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज अगले साल तक कर्ज मुक्त होने की राह पर है
  • व्यक्गित जीवन अगर कर्ज मुक्त है तो कोविड-19 जैसे माहौल में सुखी जीवन बिता सकते हैं

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 12:35 PM IST

मुंबई. आजकल अगर किसी कंपनी की सबसे ज्यादा चर्चा है तो वह है देश की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज। चर्चा इसलिए नहीं है कि वह सबसे बड़ी है। चर्चा इसलिए भी नहीं है कि मुकेश अंबानी अमीर बिजनेस मैन हैं। चर्चा इसलिए है कि इतनी बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज कर्ज मुक्त होने की राह पर है। जब एक कंपनी कर्जमुक्त हो रही है तो निश्चित तौर पर आपको व्यक्तिगत जीवन में इसका अनुसरण करना चाहिए।

कर्ज के साथ और कर्ज मुक्त जीवन का अंतर ऐसे समझिए

फर्ज कीजिए कि ए के पास आज की तारीख में 20 लाख रुपए का कर्ज है। उसकी सैलरी 40 हजार रुपए है। उसके ऊपर कार और घर दोनों का कर्ज चल रहा है। उसे महीने का 20 हजार रुपए ईएमआई चुकानी है। साथ ही उसके बच्चे की पढ़ाई के खर्च के साथ बीमारी के खर्च भी हैं। इस हिसाब से महीने में ए के पास कुछ बचत नहीं है। हालांकि आज जब आप घर में सिमट कर रह गए हैं, ऐसे में खर्च अपने आप कम हो गए हैं। इन खर्चों को बचाकर आप कुछ हद तक कर्ज की अदायगी भी कर सकते हैं।

दोनों स्थितियों में मेडिक्लेम लेना न भूलें

लेकिन बी को देखिए। अगर उसकी भी सैलरी 40 हजार रुपए है। लेकिन अगर उसके पास कार नहीं है। घर की कोई किश्त नहीं है तो उसके पास 20 हजार रुपए मासिक बचत है। यानी सालाना 2.40 लाख की बचत है। ऐसे में अगर कभी कोविड-19 जैसे हालात आते हैं तो ए की तुलना में बी ज्यादा सुखी होगा। हालांकि दोनों स्थितियों में अगर आपने एक मेडिक्लेम का पैकेज लिया है तो यह सोने पर सुहागा जैसी स्थिति है। क्योंकि मेडिक्लेम कम प्रीमियम में आपके भारी-भरकम मेडिकल के खर्च को कम कर देता है।

कर्ज कभी भी अस्वस्थ कर सकता है

किसी भी व्यक्ति के लिए कर्ज एक ऐसा मामला है जो कभी भी उसे अस्वस्थ कर सकता है। खासकर आज जब माहौल कोविड-19 की वजह से एकदम खराब है। नौकरी की गारंटी नहीं है। सैलरी कट रही है। जो बचत अब तक की, वो अब खर्च बन कर जा रहा है। समय कभी भी पल भर में पलट सकता है। किसे पता था कि जनवरी में नए साल की धूम मचाने के बाद मार्च से पूरी दुनिया ठप हो जाएगी। घरों में कैदी की तरह पूरी आबादी सिमट गई है।

क्रेडिट नहीं, डेबिट पर जीना सीखें

दरअसल भारत में हाल के कुछ सालों तक ऐसा चलन था कि जो कमाई बच रही है, उसी पर खर्च किया जाए। लेकिन पश्चिमी देशों के क्रेडिट कार्ड चलन ने भारत में इसे भी फैला दिया। कुछ जरूरतों ने तो कुछ फैशन ने भारत में इसकी जडें मजबूत कर दी हैं। हालांकि बावजूद इसके अभी भी डेबिट कार्ड की तुलना में क्रेडिट कार्ड कम है, पर यह कहीं न कहीं आपकी बचत की आदतों और क्रेडिट स्कोर को खराब करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

1.50 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है आरआईएल पर

एक बार इस पर फिर सोचते हैं। आखिर ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी कि मुकेश अंबानी को कर्जमुक्त कंपनी बनाने की दिशा में काम करना पड़ रहा है। लक्ष्य के मुताबिक अगले साल मार्च तक रिलायंस इंडस्ट्रीज कर्ज मुक्त हो जाएगी। 1.50 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। कंपनी इसके लिए तमाम निवेशकों से पैसे जुटा रही है। अब तक उसे 65,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि मिल चुकी है। अगर क्रूड की कीमतें नहीं गिरती तो शायद कंपनी का लक्ष्य अब तक करीब होता। खैर देर सबेर कर्जमुक्त होना तय है। 

आपके न रहने के बाद भी आपकी ईएमआई आती रहेगी

कहने का मतलब यही है कि कभी भी कर्जमुक्त होना आपके पूरे परिवार के लिए उत्तम है। खुदा ना खाश्ता मान लीजिए आपने एक घर लोन पर लिया और आपके साथ अनहोनी हो गई। आपको पता नहीं कि उस घर का पूरा लोन आपके वारिस से लिया जाएगा। ऐसे में अगर वारिस ईएमआई भरने के काबिल नहीं है तो आप की मेहनत की यह पूरी इमारत भी आपके वारिस के काम नहीं आएगी। इसलिए देर हो जाए, अनहोनी हो जाए, कोशिश कीजिए कर्जमुक्त जीवन जीवने की, खासकर कोविड-19 जैसी घटनाओं को देखते हुए इसे अपनाना जरूरी हो जाता है।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना