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बेहतर प्रदर्शन:एक्सपोर्ट सब्सिडी और महंगे एथनॉल से बढ़ेगा चीनी मिलों का प्रॉफिट

7 महीने पहले
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  • मौजूदा सीजन में चीनी मिलों का स्टॉक कमोबेश पिछले साल (1.07 करोड़ टन) जितना यानी 1.05-1.1 करोड़ टन रह सकता है
  • क्रिसिल के मुताबिक, चीनी मिलों के ऊपर कर्ज का बोझ कंट्रोल में रह सकता है जिससे उनके क्रेडिट प्रोफाइल को सपोर्ट मिलेगा

सरकार ने अक्टूबर 2020 से सितंबर 2021 वाले मौजूदा शुगर सीजन के लिए जो 3,500 करोड़ रुपये की एक्सपोर्ट सब्सिडी देने का एलान किया है, उससे चीनी का निर्यात पिछले साल जितना रह सकता है। घरेलू बाजार में चीनी की मांग मजबूत रहने के साथ एथनॉल के भाव में बढ़ोतरी के चलते इसके उत्पादन में ज्यादा गन्ना लगाया जा सकता है। इससे चीनी मिलों का ऑपरेटिंग मार्जिन मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में 1 से 2 पर्सेंटेज प्वाइंट बढ़कर 10.5-11.5 पर्सेंट तक हो सकता है।

चीनी उत्पादन बढ़ेगा, स्टॉक जस का तस रहेगा

मौजूदा सीजन में चीनी का उत्पादन पिछले शुगर सीजन के 2.7 करोड़ टन से बढ़कर 3-3.1 करोड़ टन हो जाने के बावजूद चीनी मिलों का स्टॉक कमोबेश पिछले साल (1.07 करोड़ टन) जितना यानी 1.05-1.1 करोड़ टन रह सकता है। क्रिसिल ने 24 चीनी मिलों की स्टडी में पाया कि इनके ऊपर कर्ज का बोझ कंट्रोल में रह सकता है जिससे उनके क्रेडिट प्रोफाइल को सपोर्ट मिलेगा।

पिछले सीजन में 10.4 रुपये प्रति किलो थी सब्सिडी

आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने हाल ही में 60 लाख टन तक के निर्यात के लिए लगभग 5.8 रुपये प्रति किलो की दर से सब्सिडी को मंजूरी दी है। CRISIL रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर अनुज सेठी के मुताबिक, ‘सब्सिडी पिछले सीजन के 10.4 रुपये प्रति किलो से काफी कम है लेकिन इससे मिलों को प्रॉडक्शन कॉस्ट निकालने में मदद मिलेगी और निर्यात करना फायदेमंद रहेगा।’

50-55 लाख टन चीनी का निर्यात होने का अनुमान

CRISIL को मौजूदा शुगर सीजन में कम वक्त मिलने से 60 लाख के टारगेट से कम 50-55 लाख टन चीनी का निर्यात होने का अनुमान है। पिछले सीजन में 57 लाख टन का निर्यात हुआ था। ग्लोबल प्रॉडक्शन में 30-40 पर्सेंट कंट्रिब्यूशन वाले ब्राजील का निर्यात दोबारा शुरू होने से पहले अप्रैल 2021 तक अधिकांश चीनी का निर्यात कर देना होगा, जबकि पिछले सीजन में सितंबर तक का वक्त मिला था।

पिछले साल जितनी रह सकती है घरेलू खपत

मौजूदा शुगर सीजन में बिस्कुट, चॉकलेट और कनफेक्शनरी की बढ़ी खपत के चलते औद्योगिक मांग ज्यादा रहने और निजी मांग स्थिर रहने से घरेलू बाजार में चीनी की खपत पिछले साल के 2.55-2.6 करोड़ टन जितनी रह सकती है। लेकिन होटल, रेस्टोरेंट और कैफे की मांग सुस्त है। गौरतलब है कि घरेलू बाजार में चीनी की 60 पर्सेंट मांग औद्योगिक क्षेत्र की होती है और उसमें 30 पर्सेंट हिस्सा बिस्कुट, चॉकलेट वगैरह का होता है।

1 दिसंबर से 6.2 पर्सेंट तक बढ़ा एथनॉल का दाम

ऑयल कंपनियों ने सप्लाई बढ़ाने के लिए 1 दिसंबर से एथनॉल का दाम 4.4-6.2 पर्सेंट बढ़ाया था। इससे इसके उत्पादन में ज्यादा गन्ना लगेगा और चीनी के उत्पादन में 20 लाख टन की कमी आएगी। इनमें पिछले सीजन में 8 लाख टन की कमी आई थी। CRISIL रेटिंग्स के डायरेक्टर गौतम शाही के मुताबिक, ‘एथनॉल का ऊंचा दाम मिलने के अलावा चीनी के दाम और बिक्री में स्थिरता रहने से मिलों का ऑपरेटिंग मार्जिन 1 से 2 पर्सेंटेज प्वाइंट बढ़ सकता है जिससे गन्ने के ऊंचे भाव की भरपाई हो जाएगी।’

ज्यादा कैश से बेहतर होगी ब्याज चुकाने की क्षमता

इस शुगर सीजन में चीनी मिलों के बेहतर परफॉर्मेंस से उनकी ब्याज चुकाने की क्षमता बेहतर (इंटरेस्ट कवरेज सालाना आधार पर 2.3 से बढ़कर 3) हो जाएगी। ज्यादा कैश हासिल होने और इनवेंटरी लिंक्ड लोन पिछले फिस्कल जितना रहने से इनका डेट टू इक्विटी रेशियो पिछले फिस्कल के 1.3 से घटकर 1.1-1.2 गुना पर आ सकता है।