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कोविड-19 में फायदा:लॉकडाउन में एफएमसीजी प्रोडक्ट्स की मांग में भारी उछाल, डिमांड ज्यादा होने पर कंपनियों ने डायरेक्ट बिक्री शुरू की

मुंबईएक वर्ष पहले
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ग्राहकों तक उत्पादों को पहुंचाने के लिए एफएमसीजी कंपनियों ने जोमैटो, स्विगी और फ्लिपकार्ट के साथ पहले ही टाईअप किया था - Dainik Bhaskar
ग्राहकों तक उत्पादों को पहुंचाने के लिए एफएमसीजी कंपनियों ने जोमैटो, स्विगी और फ्लिपकार्ट के साथ पहले ही टाईअप किया था
  • पहले लॉकडाउन के बाद पहले हफ्ते में बिक्री में 79 प्रतिशत की वृद्धि
  • लॉकडाउन के पूरे समय में बिक्री में 239 प्रतिशत का इजाफा हुआ

शहरों में रोजाना उपयोग में आनेवाली एफएमसीजी वस्तुओं की खरीदारी लॉकडाउन के समय में अच्छी खासी बढी है। पहली बार जब मार्च के अंतिम हफ्ते में 21 दिन का लॉकडाउन हुआ था, उस समय एफएमसीजी उत्पादों की मांग में 79 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई थी। हालांकि पूरे लॉकडाउन के समय में इन उत्पादों में 239 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

रिटेलर्स ने बल्क ऑर्डर में की उत्पादनों की बिक्री

पारले प्रोडक्ट्स के कटेगरी हेड मयंक शाह ने बताया कि बल्क ऑर्डर के मामले में रिटेलर्स को 8-10 प्रतिशत का मार्जिन मिला है। लॉकडाउन के कारण ग्राहक घर के अंदर बंद हैं। रेस्टोरेंट पर ताला लगा है। इस वजह से चीज, टेट्रापैक, दूध, नूडल्स, फ्रोजन नॉन वेज नाश्ता, बटर, बिस्किट और चॉकलेट्स की मांग अप्रैल में 50 से 150 प्रतिशत बढ़ी है। पारले प्रोडक्ट्स के मुताबिक कई रिटेलरों ने बल्क ऑर्डर में उत्पादनों की बिक्री की है।

अमूल ने हाउसिंग सोसाइटीज में डायरेक्ट बिक्री की

हालांकि इस दौरान कुछ कंपनियों ने ग्राहकों को सीधे अपने उत्पादनों की बिक्री की है। दूध उत्पादन में अग्रणी अमूल ने 10 शहरों की 500 सोसाइटीज को दूध, चीज, आइस्क्रीम सहित अन्य उत्पादों की सीधे आपूर्ति की थी। अमूल के एमडी आर. एस. सोढ़ी ने बताया कि हमने जब से इसकी शुरुआत की है, तब से विभिन्न शहरों के रेसिडेंशियल कांपलेक्स से ज्यादा मांग आई है। उन्होंने बताया कि सोसाइटीज से अच्छी मार्जिन मिलने से वहां बेचने में हमें काफी ज्यादा दिलचस्पी रही है।

एक-एक सोसाइटीज से 80,000 रुपए के मिले ऑर्डर

मुंबई, पुणे जैसे बड़े शहरों में रेड जोन वाले जो इलाके थे, उसमें बड़ी-बड़ी हाउसिंग सोसाइटीज ने बल्क में ऑर्डर दिया। इन सोसाइटीज ने रोजाना 80,000-90,000 रुपयों का ऑर्डर दिया। वैश्विक कंज्यूमर रिसर्च कंपनी केंटार वर्ल्ड पैनल के मुताबिक, लॉकडाउन के नियम जैसे-जैसे कड़क होते गए, वैसे-वैसे लोगों में घबराहट बढ़ी। इसकी वजह से खरीदारी भी ज्यादा होने लगी। आंकड़ों के मुताबिक, पहले लॉकडाउन के बाद पहले हफ्ते में एफएमसीजी उत्पादों की खरीदी में 47 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। जबकि लॉकडाउन जब बढ़ता गया तो उसके बाद इन उत्पादों में 239 प्रतिशत की ज्यादा बिक्री देखी गई।

मार्च में अधिकतर कंपनियों ने बढ़ाया था उत्पादन

केंटार के दक्षिण एशिया के एमडी के. रामक्रिष्णन ने बताया कि एक महीने में एफएमसीजी उत्पादों की जितनी मांग होती थी, उसकी 50 प्रतिशत की खरीदी लॉकडाउन के बाद पहले हफ्ते में की गई थी। अधिकतर कंज्यूमर गुड्स कंपनियों ने मार्च में उत्पादन बढ़ा दिया था, ताकि लोगों की मांग को पूरा किया जा सके। कोविड-19 के कारण ज्यादातर राज्यों ने ट्रांसपोर्ट पर प्रतिबंध लगा दिया था और इसलिए लोगों ने रोजाना उपयोग की चीजों की जमकर खरीदारी की।

हालत सामान्य होने के बाद बिक्री में आएगी गिरावट

पारले प्रोडक्ट के सीनियर कटेगरी हेड बी क्रिष्णा राव ने बताया कि शुरुआत में सप्लाई की दिक्कत थी, पर उसके बाद ग्राहकों ने जीवनोपयोगी वस्तुओं को जमा करना शुरू कर दिया था। हमारे अनुमान के मुताबिक ग्राहकों ने जितना स्टॉक अभी जमा किया है, लॉकडाउन खुलने के बाद इसकी मांग में कमी आने की आशंका है। एचयूएल और मैरिको सहित अन्य कंपनियों की बिक्री चौथी तिमाही में घटी है। उन्होंने कहा कि हालत सामान्य होने के बाद वास्तविक मांग के बारे में स्पष्ट पता चलेगा।

सैनिटाइजर्स, कूकिंग ऑयल्स कटेगरी में अच्छी बिक्री

एचयूएल के चेयरमैन संजीव मेहता ने फाइनेंशियल रिजल्ट की घोषणा के बाद अर्निंग कॉल में बताया था कि भविष्य में लॉकडाउन बढ़ेगा, इसलिए ग्राहकों ने जमकर खरीदी की है। जबकि वास्तविक मांग स्थिति सामान्य होने के बाद ही आएगी। केंटार के आंकड़ों के मुताबिक फ्लोर क्लीनर्स, सैनिटाइजर्स, कूकिंग ऑयल्स, बिस्किट्स कटेगरी की बिक्री में मार्च के अंतिम हफ्ते से ज्यादा उछाल देखा गया है। आईटीसी, ब्रिटानिया, डाबर, मैरिको, पारले, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी अग्रणी कंपनियों ने भी डाइरेक्ट टू कंज्यूमर पर फोकस किया था। इन कंपनियों ने ग्राहकों तक उत्पादों को पहुंचाने के लिए जोमैटो, स्विगी और फ्लिपकार्ट के साथ पहले ही टाईअप किया था।

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