पर्सनल फाइनेंस / ऐसे समझें आरबीआई द्वारा रेट कट को, कैसे और किस तरीके से बैंक आपके लोन पर अगले हफ्ते से करेंगे फैसला

कोई भी लोन स्विच करने से पहले उस पर अध्ययन जरूर करें कोई भी लोन स्विच करने से पहले उस पर अध्ययन जरूर करें
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कोई भी लोन स्विच करने से पहले उस पर अध्ययन जरूर करेंकोई भी लोन स्विच करने से पहले उस पर अध्ययन जरूर करें

  • ईबीएलआर और एमसीएलआर के आधार पर होगा फैसला
  • पुरानी ब्याज दर 7.40 प्रतिशत है। नई दर 7 प्रतिशत होगी

दैनिक भास्कर

May 22, 2020, 03:37 PM IST

मुंबई. आरबीआई द्वारा रेपो रेट में कटौती से अगले हफ्ते से बैंक ग्राहकों को इसका फायदा देने की शुरुआत करेंगे। बैंक मुख्य रूप से दो तरह के लोन देते हैं। एक एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (ईबीएलआर) और दूसरा मार्जिनल कॉस्ट लेंडिंग रेट (एमसीएलआर)। इसी आधार पर आपके लोन की ब्याज दरें तय होंगी। फिलहाल ब्याज दरें 7.40 प्रतिशत पर हैं। रेट कट के बाद नई दरें 7 प्रतिशत पर होंगी।  

30 लाख पर 726 रुपए और 40 लाख पर 960 रुपए की बचत

नई ब्याज दरें लागू होने के बाद 15 साल की अवधि वाले 30 लाख के होम लोन पर किश्त में मासिक 726 रुपए की बचत होगी। जबकि 40 लाख रुपए का 20 साल का कर्ज है तो इस पर आपको मासिक 960 रुपए की बचत होगी। अगर आपकी ईएमआई 23,985 रुपए मासिक आ रही है तो यह घटकर अब 23,259 रुपए हो जाएगी। मार्च से लेकर अब तक आरबीआई ने कुल 115 बेसिस पाइंट (बीपीएस) की कटौती की है।

ईबीएलआर से जुडे ग्राहकों के लिए क्या है

बैंकों के लोन दो तरह के होते हैं। इसमें एक एमसीएलआर पर होता है। दूसरा लोन ईबीएलआर पर होता है। जो ग्राहक एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े हैं उन्हें ऑटोमैटिक फायदा होगा। आरबीआई के सर्कुलर के मुताबिक बैंकों को हर तीन महीने में कम से कम एक बार इसे रीसेट करना होता है। अक्टूबर 2019 के बाद से जब से नया लेंडिंग रेट आया है, तब से आरबीआई ने तीन बार दरों में कटौती की है।  

एमसीएलआर से जुड़े ग्राहक के लिए क्या है

वे ग्राहक जो मार्जिनल कॉस्ट लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) से जुड़े हैं, उन्हें इसका फायदा तब मिलेगा, जब बैंक दरों में कटौती करेंगे। एमसीएलआर एक्सटर्नल फैक्टर्स से नहीं जुड़ा होता है। इसमें ढेर सारे आंतरिक कारण भी होते हैं। इसमें ग्राहक को फायदा तभी मिलेगा जब एमसीएलआर में बैंक कटौती करेंगे।

क्या एक दूसरे में स्विच हो सकता है लोन

हां, अगर आप एमसीएलआर से ईबीएलआर में लोन स्विच करना चाहते हैं तो कर सकते हैं। इसके लिए आपको बैंक की एडमिनिस्ट्रेटिव लागत चुकानी होगी। हालांकि फाइनेंशियल प्लानर यह सलाह देते हैं कि आप तभी स्विच करें जब दोनों की ब्याज दरों में आधा प्रतिशत से ज्यादा अंतर हो।

बैंक रेट कट के बाद क्या करते हैं

आमतौर पर बैंक होम लोन 6 महीने या एक साल के रीसेट की अवधि के लिए देते हैं। यानी हर 6 महीने या एक साल में आपके लोन की दरों को रीसेट करते हैं। इससे आपकी भविष्य की ईएमआई की गणना बैंक के एमसीएलआर और बैंक की मार्जिन के आधार पर होती है। वर्तमान में एसबीआई का एक साल का एमसीएलआर 7.25 प्रतिशत पर जबकि 6 महीने का एमसीएलआर 7.20 प्रतिशत पर है।

नए ग्राहकों के लिए क्या होगा

हाल में वित्तमंत्री ने अपने आत्मनिर्भर भारत अभियान पैकेज में सीएलएसएस यानी क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम को बढ़ाने की घोषणा की थी। यह प्रधानमंत्री आवास योजना की स्कीम है जो मार्च 2021 तक बढ़ गई है। इसके तहत जिनकी आय 6 लाख और 12 लाख रुपए है, वे 4 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी ले सकते हैं। मध्यम वर्ग जिनकी आय 12 और 18 लाख रुपए है वे 3 प्रतिशत ब्याज की सब्सिडी ले सकते हैं। अब ब्याज दरें कम होने से नया लोन सस्ता होगा। आप चाहें तो इस सब्सिडी के साथ ईबीएलआर का लोन ले सकते हैं। लेकिन इसके लिए भी आपको थोड़ा अध्ययन करना होगा। क्योंकि बैंक रिस्क प्रीमियम चार्ज भी लेते हैं।

क्या होगा अगर आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाएगा

ऐसा नहीं है कि आरबीआई हमेशा ब्याज दरें घटाएगा। जैसे ही स्थिति थोड़ी ठीक होगी, और मांग बढ़ेगी, आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाना शुरू कर देगा। ऐसी स्थिति में आपको यह करना होगा कि आप एमसीएलआर पर फोकस करें। क्योंकि जब आरबीआई दरें बढ़ाएगा तो ईबीएलआर में दरें अचानक बढ़नी शुरू हो जाएंगी। जबकि एमसीएलआर में बैंक कुछ समय तक के लिए इस रोक लेता है।

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