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पर्सनल फाइनेंस / मोराटोरियम के तहत लोन की किस्तें रोकना आपको पड़ेगा महंगा, चुकानी होंगी पहले से ज्यादा किस्तें

अगर आपने भी होम लोन लिया है और 6 महीने के मोराटोरियम पीरियड का लाभ लेते हैं तो आपके ईएमआई शेड्यूल पर असर पड़ेगा अगर आपने भी होम लोन लिया है और 6 महीने के मोराटोरियम पीरियड का लाभ लेते हैं तो आपके ईएमआई शेड्यूल पर असर पड़ेगा
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अगर आपने भी होम लोन लिया है और 6 महीने के मोराटोरियम पीरियड का लाभ लेते हैं तो आपके ईएमआई शेड्यूल पर असर पड़ेगाअगर आपने भी होम लोन लिया है और 6 महीने के मोराटोरियम पीरियड का लाभ लेते हैं तो आपके ईएमआई शेड्यूल पर असर पड़ेगा

  • RBI ने 1 मार्च से 6 महीने यानी अगस्त तक की ईएमआई मोराटोरियम की अनुमति दी है
  • मोराटोरियम लेने वालों पर कर्ज का अतिरिक्त भार पड़ेगा, इसीलिए इसे समझना जरूरी है

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 04:53 PM IST

नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मोराटोरियम की अवधि एक बार फिर तीन महीने बढ़ाकर 31 अगस्त, 2020 कर दी है। अब आपको अपने  होम,ऑटो और पर्सनल लोन जैसे टर्म लोन की किस्तों का भुगतान अगले 3 महीने तक नहीं करना होगा। लेकिन अगर आप इस मोराटोरियम का लाभ लेते हैं तो आपको इसके लिए अतिरिक्त ब्याज चुकाना होगा। यहां हम आपको बता रहे हैं कि अगर आप मोराटोरियम लेते हैं तो आपको कितने रुपए ज्यादा देने होंगे।

ब्याज पर भी देना होगा ब्याज?
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने साफ कहा कि लोन मोराटोरियम का मतलब EMI वेबर नहीं है। वहीं उन्होंने कहा कि ईएमआई टालने पर 6 महीने के संचित ब्याज को अब टर्म लोन में बदला जा सकता है। यानी इस ब्याज पर ग्राहकों को ब्याज देना होगा।  इसकस मतलब है कि 6 महीने बाद जो ईएमआई शुरू होगी, उसकी रकम बढ़ी होगी। या कुल ईएमआई की संख्या बढ़ जाएगी। जो भी विकल्प ग्राहक लेना चाहें। 

6 महीने बाद बैंक वसूलेंगे ब्याज
ज्यादातर बैंकों ने पहले ​ही कह दिया था कि इस बारे में घोषित योजना के अनुसार वे मोराटोरियम पीरियड के बाद इन 6 महीनों का ब्याज बाद में वसूलेंगे। इसका मतलब हुआ कि लोन लने वालों के सामने दोहरी समस्या है। बहुत से लोग ऐसे हें, जिनकी लॉकडाउन की वजह से आय प्रभावित हुई है। वहीं दूसरी ओर अगर वे RBI के लोन मोरेटोरियम की सुविधा लेते हैं तो उनकी ईएमआई की रकम बढ़ेगी या ईएमआई की संख्या पहले के मुकाबले बढ़ जाएगी। 

मोराटोरियम चुनने पर कितना देना होगा ब्याज
अगर आपने मोराटोरियम यानी मोहलत के विकल्‍प को चुना है तो आपको 6 महीने ईएमआई (मार्च, अप्रैल, मई, जून, जुलाई और अगस्‍त) नहीं देना है। इन छह महीनों की किस्‍तों पर जुटे ब्‍याज को आपको देना है। 
अगर आपने ईएमआई के पेमेंट में मोराटोरियम को चुना है तो बैंक आपको तीन विकल्‍प दे सकते हैं।
1 विकल्‍प: मोराटोरियम की अवधि खत्‍म होने के बाद जुटे हुए ब्‍याज का एकमुश्‍त भुगतान। 
2 विकल्‍प: बचे हुए लोन में ब्‍याज को जोड़ा जाए और लोन की बाकी अवधि में ईएमआई की रकम बढ़ाई जाए।
3 विकल्‍प: बकाया लोन में जुटे ब्‍याज को जोड़ा जाए और किस्‍त की वही रकम रखते हुए लोन की अवधि बढ़ा दी जाए। 
उदाहरण: मान लेते हैं कि उसने 8 फीसदी की ब्‍याज दर पर 20 साल के लिए 30 लाख रुपए का लोन लिया है। वह ईएमआई में 25,093 रुपए का भुगतान करता है। 
6 महीने का मोराटोरियम लेने पर आपके लोन पर क्या असर पड़ेगा

लोन का कितना समय बचा है मोराटोरियम से पहले बकाया (रु.) मोराटोरियम लेने पर कुल बकाया (रु.) मोराटोरियम लेने पर कितना रुपए ज्यादा देने होंगे (रु.) दूसरा विकल्प चुनते हैं तो किस्त कितनी बढ़ेगी?  तीसरा विकल्प चुनते हैं तो कितनी किस्तें बढ़ेंगी?
5 साल 1237557 1287057 49500 26097 रु. 2
10 साल 2068219 2150947 82728 26097 रु. 3
15 साल 2625768 2730798 105030 26097 रु. 4

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