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लाइसेंस / पीपल्स बैंक ऑफ चाइना सहित चीन के 16 वित्तीय संस्थानों ने भारत में एफपीआई के रूप में स्थाई रजिस्ट्रेशन कराया

चीन स्थित कई संस्थानों को भारतीय पूंजी बाजारों में निवेश के लिए रजिस्टर्ड किया गया है चीन स्थित कई संस्थानों को भारतीय पूंजी बाजारों में निवेश के लिए रजिस्टर्ड किया गया है
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चीन स्थित कई संस्थानों को भारतीय पूंजी बाजारों में निवेश के लिए रजिस्टर्ड किया गया हैचीन स्थित कई संस्थानों को भारतीय पूंजी बाजारों में निवेश के लिए रजिस्टर्ड किया गया है

  • हर तीन साल में रजिस्ट्रेशन को रिन्यूअल कराना होता है
  • ताइवान के 124 कॉर्पोरेट्स भारत में रजिस्टर्ड हैं

दैनिक भास्कर

May 22, 2020, 07:20 PM IST

मुंबई. चीन के कम से कम 16 संस्थानों ने भारत में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) के रूप में स्थाई रजिस्ट्रेशन कराया है। इसमें प्रमुख रूप से एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) और पीपल्स बैंक ऑफ चाइना (PBoC) का समावेश है। एआईआईबी एक मल्टीलेटरल डेवलपमेंट बैंक है, जिसमें भारत एक सदस्य है। वहीं पीबीओसी चीन का केंद्रीय बैंक है।

कई संस्थान लंबे समय से भारत में रजिस्टर्ड हैं

भारत में अन्य पंजीकृत एफपीआई में नेशनल सोशल सेक्युरिटी फण्ड (एनएसएसएफ) शामिल है, जो मुख्य रूप से सरकार द्वारा संचालित इन्वेस्टमेंट फंड है। इसमें चीन की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली के लिए धन प्रदान किया जाता है। सूत्रों ने कहा कि एफपीआई रजिस्ट्रेशन लंबे समय से भारत में एक बार की प्रक्रिया और स्थायी प्रक्रिया है। इनमें से अधिकांश चीन स्थित संस्थानों को कई वर्षों से भारतीय पूंजी बाजारों में निवेश के लिए रजिस्टर्ड किया गया है।

पीबीओसी का रजिस्ट्रेशन 2011 में हुआ था

सूत्रों के मुताबिक, PBoC मूल रूप से 4 मई, 2011 को एक विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) के रूप में पंजीकृत किया गया था। इसका पंजीकरण हर तीन साल में फीस के भुगतान के साथ जारी रखा गया है। 2014 से नई एफपीआई रेगुलेटरी स्कीम ने पहले के एफआईआई सिस्टम को बदल दिया, तब से डीडीपीएस द्वारा एफपीआई के रजिस्ट्रेशन और गतिविधियों को संभाला जा रहा है। उस समय सभी रजिस्टर्ड एफआईआई को इस नई एफपीआई व्यवस्था में बदलाव के बाद एफपीआई के रूप में रजिस्टर्ड माना गया था।

भारत में चीन के 16 कॉर्पोरेट्स रजिस्टर्ड हैं

भारत की अग्रणी डिपॉजिटरी नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में एफपीआई के रूप में 16 चीन आधारित संस्थाएं रजिस्टर्ड हैं। PBoC, एआईआईबी और एनएसएसएफ के अलावा बेस्ट इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन, चीन एएमसी ग्लोबल सेलेक्टिव इक्विटीज फंड, सीआईएफएम एशिया पैसिफिक एडवांटेज फंड,फ्लारिश इन्वेस्टमेंट कॉर्प, मनुलाइफ इंडिया ओप्पोर्टयूनिटी इक्विटी फंड और वी चिएह ली से जुड़े आठ एफपीआई हैं।

111 कॉर्पोरेट्स हांगकांग से हैं

बेस्ट इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन से जुड़े रजिस्टर्ड एफपीआई में ब्लैकरॉक एसेट मैनेजमेंट, कोलंबिया मैनेजमेंट इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स, फिशर एसेट मैनेजमेंट, इनवेस्को एसेट मैनेजमेंट, मेप11ल-ब्राउन एबॉट, टीटी इंटरनेशनल और वेस्टवुड मैनेजमेंट कॉर्प द्वारा प्रबंधित लोग शामिल हैं। इसके अलावा, भारत में एफपीआई के रूप में रजिस्टर्ड 111 संस्थाएं हांगकांग से और 124 ताइवान से हैं।

दस देशों के पास 28 लाख करोड़ रुपए से अधिक की कस्टडी

हालांकि चीनी संस्थाओं ने कथित तौर पर भारत में महत्वपूर्ण निवेश किया है। लेकिन इन संस्थाओं की कस्टडी में आने वाली एसेट्स अभी भी कई अन्य देशों की तुलना में छोटी हैं। एनएसडीएल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक एफपीआई की कस्टडी में एसेट के मामले में दस सबसे बड़े देश अमेरिका, मॉरीशस, सिंगापुर, लक्जमबर्ग, ब्रिटेन, आयरलैंड, कनाडा, जापान, नॉर्वे और नीदरलैंड हैं। एक साथ इन दस देशों के पास 28 लाख करोड़ रुपए से अधिक के एफपीआई की कस्टडी में है जो कुल संपत्ति का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है। चीन और हांगकांग सहित अन्य सभी देशों में सामूहिक रूप से 20 प्रतिशत से भी कम हिस्सेदारी है। 

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