सुविधा का फायदा / बैंक ऑफ बड़ौदा के 65 तथा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के 20 प्रतिशत ग्राहकों ने लिया मोराटोरियम का लाभ

लॉकडाउन में ढील होने और कैश फ्लो में सुधार के साथ मोराटोरियम की संख्या में कमी आएगी- बॉब सीईओ लॉकडाउन में ढील होने और कैश फ्लो में सुधार के साथ मोराटोरियम की संख्या में कमी आएगी- बॉब सीईओ
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लॉकडाउन में ढील होने और कैश फ्लो में सुधार के साथ मोराटोरियम की संख्या में कमी आएगी- बॉब सीईओलॉकडाउन में ढील होने और कैश फ्लो में सुधार के साथ मोराटोरियम की संख्या में कमी आएगी- बॉब सीईओ

  • आईएलएंडएफएस की घटना के बाद कुछ एनबीएफसी ने अपनी लिक्विडिटी प्रोफाइल बना ली है
  • एनबीएफसी के लिए पैसा जुटाने के बहुत साधन हैं और उनका मामला हम केस टू केस देखेंगे

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 04:47 PM IST

मुंबई. बैंक ऑफ बड़ौदा के एमडी एवं सीईओ संजीव चड्ढा ने कहा कि बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) के करीब 65 प्रतिशत ग्राहकों ने मोराटोरियम का लाभ लिया है। यह सुविधा कोविड-19 को देखते हुए आरबीआई ने शुरू की थी। उधर देश के सबसे बड़े कर्जदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के 20 प्रतिशत ग्राहकों ने मोराटोरियम का लाभ लिया है। 

यह बैंक के ऊपर है कि वे ग्राहकों को लाभ दें या नहीं 

बैंक ऑफ बड़ौदा के एमडी एवं सीईओ चढ्‌ढा ने कहा कि इसमें बैंकों के ऊपर यह निर्भर है कि वे इसका लाभ ग्राहकों को देंगे या नहीं। उन्होंने कहा कि हमने सभी उधारकर्ताओं और जो लोग नहीं चाहते हैं, उन्हें मोरेटोरियम की पेशकश की है। इसलिए जो लोग भुगतान नहीं कर रहे हैं, वे अपने आप योजना के लिए विचार कर रहे हैं। चड्ढा ने कहा, हमारी गणना से पता चलता है कि करीब 65 प्रतिशत उधारकर्ताओं ने इसके लिए चुना है।

एसबीआई से ज्यादा बीओबी के ग्राहकों ने लिया लाभ

बीओबी की संख्या स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) जैसे बैंकों की तुलना में अधिक है। एसबीआई ने कहा था कि इसके केवल 20 प्रतिशत उधारकर्ताओं ने मोराटोरियम का विकल्प चुना था। चड्ढा ने हालांकि कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह नँबर्स नीचे आएंगे। हम उम्मीद करते हैं कि लॉकडाउन में ढील होने और कैश फ्लो में सुधार के साथ संख्या में कमी आएगी।

मोराटोरियम भविष्य में ज्यादा महंगा पड़ेगा

कुछ ग्राहक वापस आएंगे और लोन का भुगतान करना पसंद करेंगे। क्योंकि मोराटोरियम का मतलब उनके लिए भविष्य में ज्यादा ब्याज के रूप में महंगा पड़ सकता है। चड्ढा ने हालांकि एनबीएफसी के लिए यह कहते हुए मोराटोरियम देने से इनकार कर दिया है कि बैंक अपने कई अन्य बड़े साथियों की तरह उस मुद्दे को केस टू केस आधार पर देखेगा।

टीएलटीआरओ के जरिए भी फंड जुटा सकती हैं कंपनियां

उन्होंने कहा कि यहां तक कि अगर हम उन्हें मोराटोरियम दे भी तो यह इन कुछ संस्थाओं के लिए कुल भुगतान का सिर्फ 5 से 7 प्रतिशत तक बनता है। उनके पास टारगेटेड लांग टर्म रेपो जैसे फंड जुटाने के अन्य साधन भी हैं। उनमें से कुछ ने आईएलएंडएफएस के बाद अपनी लिक्विडिटी प्रोफाइल बना ली है। चड्ढा ने कहा कि हम उनके साथ केस टू केस आधार पर जुड़ेंगे और देखेंगे कि हम उनकी मदद कर सकते हैं।

एमएसएमई को 12,000 करोड़ रुपए लोन देने की उम्मीद

बीओबी का अनुमान है कि वह 3 लाख करोड़ रुपए की सरकारी गारंटी योजना के तहत सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यमों को लगभग 12,000 करोड़ रुपए का ऋण दे सकता है। यह आंकड़ा इस क्षेत्र के लिए अपने 60,000 करोड़ रुपए के एक्सपोजर का 20 प्रतिशत है। बैंक ने कोविड-19 प्रकोप के लिए दिए गए आपातकालीन ऋणों सहित मार्च से कर्ज मंजूरी में 50 प्रतिशत की वृद्धि देखी है। चड्ढा ने कहा कि कोविड-19 योजना के तहत वितरित कुल राशि 1,500 करोड़ रुपए है।

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