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कोरोना क्राइसिस:एपल, अमेजन और माइक्रोसॉफ्ट जैसी शीर्ष अमेरिकी कपनियां एच-1बी कर्मचारियों को स्थानीय औसत से कम सैलरी पर करा रहीं काम

वॉशिंगटन2 वर्ष पहले
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इकॉनोमिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार ये कपनियां यहां चलाई जा रही योजना का लाभ उठाकर अपने एच-1 बी कर्मचारियों को मार्केट से कम सैलरी का भुगतान कर रही हैं। - Dainik Bhaskar
इकॉनोमिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार ये कपनियां यहां चलाई जा रही योजना का लाभ उठाकर अपने एच-1 बी कर्मचारियों को मार्केट से कम सैलरी का भुगतान कर रही हैं।
  • एच-1बी वीजा गैर-प्रवासी वीजा है। अमेरिकी कंपनियां दूसरे देशों के टेक्निकल एक्सपर्ट्स को नियुक्त करती हैं।
  • रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में 53,000 से अधिक लोगों को एच-1बी वीजा दिया गया।

कोरोनावायरस के कारण कई भारतीय दूसरे देशों में फस गए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार फेसबुक, गूगल, एपल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी प्रमुख कंपनियां जहां एच-1बी वीजाधारक बड़ी मात्रा में काम करते हैं। इकॉनोमिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार ये कपनियां यहां चलाई जा रही योजना का लाभ उठाकर अपने एच-1बी कर्मचारियों को मार्केट से कम सैलरी का भुगतान कर रही हैं।

60 फीसदी कामगार का  कीमत पर कर रहे काम
रिपोर्ट के अनुसार कई बड़ी कंपनियां अमेरिका में काम करने वाले एच-1बी वीजाधारक प्रवासी कामगारों को स्थानीय कार्यक्रम का फायदा उठाकर बाजार दर से कम वेतन दे रही हैं। मंदी के कारण प्रवासी कर्मचारी कम मेहनताने पर नौकरी करने को मजबूर हैं। एच-1बी वीजास एंड प्रेविल्लिंग वेज लेवल्स नाम से जारी इस रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी श्रम विभाग ने एच-1बी वीजा प्रोग्राम के तहत 60 फीसदी कामगारों को बाजार दर से कम मेहनताने पर काम करने के लिए प्रमाणित किया है।

हर 4 में से 1 एच-1बी वीजाधारक शीर्ष कंपनियों में कर रहे काम
रिपोर्ट के अनुसार साल 2019 में 53,000 से अधिक लोगों को एच-1बी वीजा दिया गया। अमेरिका के सिटीजन एंड माइग्रेशन डिपार्टमेंट ने 2019 में एच-1बी पर काम करने वालों की संख्या 3,89,000 तय की थी। इसमें से हर चार में से एक कामगार अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, वॉलमार्ट, गूगल, एपल और फेसबुक जैसी शीर्ष 30 कंपनियों में काम कर रहे हैं। 

थर्ड पार्टी के जरिए कपनियां देती हैं काम 
इन 30 शीर्ष नियोक्ताओं में से भी आधे सीधे एच-1बी वीजाधारक कामगार को काम पर नहीं रखते हैं बल्कि थर्ड पार्टी (किसी और कंपनी को ठेका देकर) के आधार पर काम कराते हैं। इन लोगों को लेवल 1 और 2 के तहत काम कराया जाता है जिसमे इन्हे स्थानीय मजदूरी से कम पैसा दिया जाता है।

क्या है एच-1बी वीजा?
एच-1बी वीजा गैर-प्रवासी वीजा है। अमेरिकी कंपनियां दूसरे देशों के टेक्निकल एक्सपर्ट्स को नियुक्त करती हैं। नियुक्ति के बाद सरकार से इन लोगों के लिए एच-1बी वीजा मांगा जाता है। अमेरिका की ज्यादातर आईटी कंपनियां हर साल भारत और चीन जैसे देशों से लाखों कर्मचारियों की नियुक्ति इसी वीजा के जरिए करती हैं। 

क्या है इसको लेकर नियम?
नियम के अनुसार,  अगर किसी एच-1बी वीजाधारक की कंपनी ने उसके साथ कांट्रैक्ट खत्म कर लिया है। तो वीजा स्टेटस बनाए रखने के लिए उसे 60 दिनों के अंदर नई कंपनी में जॉब तलाशना होगा। भारतीय आईटी वर्कर्स इस 60 दिन की अवधि को बढ़ाकर 180 दिन करने की मांग कर रहे हैं। यूएस सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) के मुताबिक, एच-1बी वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी भारतीय ही हैं।

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