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कोरोना के साइड इफेक्ट:चालू वित्त वर्ष के अंत तक दोगुना हो सकता है बैंकों का एनपीए, अभी 9.35 लाख करोड़ रुपए बैड लोन में फंसे हैं

नई दिल्ली7 महीने पहले
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वरिष्ठ अधिकारियों और बैंकर्स का मानना है कि कोरोना का अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है। इससे बैंकों का बैड लोन बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
  • 18 से 20 फीसदी पर पहुंच सकता है बैंकों का कुल एनपीए
  • बैंकर्स का अनुमान- 20 से 25 फीसदी लोन के डिफॉल्ट का खतरा

कोरोनावायरस महामारी का आर्थिक प्रभाव सभी सेक्टरों में दिखाई दे रहा है। बैंकिंग सेक्टर पर भी इसका बुरा प्रभाव दिख सकता है। वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और टॉप बैंकर्स के मुताबिक कोरोनावायरस के कारण भारतीय बैंकों का खराब लोन दोगुना हो सकता है। सितंबर 2019 तक बैंकों का करीब 9.35 लाख करोड़ रुपया खराब लोन में फंसा पड़ा है। यह बैंकों के कुल एसेट्स के 9.1 फीसदी के बराबर है।

20 से 25 फीसदी लोन के डिफॉल्ट होने का खतरा
इस मामले से वाकिफ अधिकारियों का कहना है कि सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक बैंकों के नॉन परफॉर्मिंग एसेंट्स (एनपीए) बढ़कर 18 से 20 फीसदी पर पहुंच सकते हैं। अधिकारियों के मुताबिक इस समय 20 से 25 फीसदी बकाया लोन के डिफॉल्ट होने का खतरा बना हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि खराब लोन बढ़ने से क्रेडिट ग्रोथ को झटका लगेगा। साथ ही कोरोना महामारी की आर्थिक रिकवरी में देरी हो सकती है।

पिछली तिमाही के मुकाबले दोगुना हो सकता है एनपीए
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के एक फाइनेंस हेड ने रॉयटर्स से बातचीत में कहा कि यह अनिश्चतता का समय है। हम उम्मीद जता रहे हैं कि बैंक पिछली तिमाही के मुकाबले इस बार दोगुना एनपीए राशि घोषित करेंगे। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने इस पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। वहीं रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने ई-मेल का कोई जवाब नहीं दिया है।

40 दिन के लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था में आया ठहराव
कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए 40 दिनों के देशव्यापी लॉकडाउन के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था में ठहराव सा आ गया है। लॉकडाउन को दो सप्ताह और बढ़ाकर 17 मई तक के लिए कर दिया है। हालांकि, इस अवधि के दौरान सरकार ने कोरोना से बचे हुए जिलों में कुछ ज्यादा छूट दी हैं।

अर्थव्यवस्था के जुलाई तक पूरी तरह खुलने की उम्मीद
कई बैंकर्स का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था जून या जुलाई के बाद ही खुलेगी। इस कारण लोन पर बुरा असर पड़ेगा। खासतौर पर स्मॉल एंड मीडियम साइज्ड कारोबार को दिया गया लोन बुरी तरह से प्रभावित होगा। इसका कारण यह है कि देश की सभी टॉप-10 शहर कोरोना के सबसे खतरा वाले रेड जोन में हैं और इन शहरों में सख्त प्रतिबंध लगे हुए हैं।

अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं टॉप-10 शहर
हाल ही में एक्सिस बैंक की ओर से जारी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि देश के टॉप-10 शहर अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। दिसंबर तक बैंकों की ओर से दिए गए कुल लोन का करीब 83 फीसदी हिस्सा इन्ही शहरों के कारोबार को दिया गया है। एक अन्य सूत्र का कहना है कि कोरोनावायरस के कारण आर्थिक ग्रोथ सुस्त पड़ा है और जोखिम उच्च स्तर पर है।

6 साल में बॉब का एनपीए 6 गुना बढ़ा
बैंक ऑफ बड़ौदा (बॉब) का एनपीए पिछले 6 साल में 6 गुना बढ़कर गया है। यह जानकारी एक आरटीआई के जवाब में सामने आई है। आरटीआई के मुताबिक मार्च 2014 में बॉब का एनपीए 11,876 करोड़ रुपए था जो 31 मार्च 2020 तक बढ़कर 73140 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। इसी प्रकार से इंडियन बैंक का एनपीए मार्च 2014 के 8068.05 करोड़ के मुकाबले दिसंबर 2019 तक करीब चार गुना बढ़कर 32,561 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।

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