किशोर बियानी की दिक्कतें बढ़ीं:कंपनी ने मार्च में लोन भुगतान में डिफॉल्ट किया, बैंकों ने हिस्सा बेचने के लिए दूसरी रिटेल कंपनियों से संपर्क किया लेकिन बियानी ने किया इनकार

मुंबई2 वर्ष पहले
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फ्यूचर रिटेल के शेयरों में लगातार गिरावट जारी है। बुधवार को शेयर में 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। - Dainik Bhaskar
फ्यूचर रिटेल के शेयरों में लगातार गिरावट जारी है। बुधवार को शेयर में 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
  • कर्ज घटाने के लिए लगातार कई कंपनियों को बेचा भी गया
  • कंपनी ने फाइनेंशियल सर्विसेस को 2013 में वारबर्ग को बेचा था

देश में रिटेल मॉल में अग्रणी फ्यूचर समूह के चेयरमैन किशोर बियानी की दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं। मार्च में प्रमोटर किशोर बियानी कर्ज के भुगतान में असफल हो गए थे। इस वजह से बियानी की कंपनी फ्यूचर रिटेल (एफआरएल) और उसके प्रमोटरों दोनों के शेयरों को किसी दूसरी रिटेल कंपनी के साथ विलय के लिए बैंक दबाव डाल रहे हैं। इस मामले में किशोर बियानी ने भास्कर से कहा कि यह सब खबर सही नहीं हैं। अभी तक किसी बैंक या किसी ने भी हमसे मूल्यांकन या किसी मर्जर या इस तरह की किसी संभावना के बारे में बात नहीं की।

बैंक दूसरी रिटेल कंपनियों में शेयरों के विलय के लिए डाल रहे हैं दबाव

एक अंग्रेजी अखबार की खबरों के मुताबिक बैंकों का एक्सपोजर फ्यूचर रिटेल और उसके प्रमोटर दोनों के साथ है। बैंक इस एक्सपोजर को लेकर दबाव डाल रहे हैं कि किशोर बियानी मौजूदा रिटेल प्लेयरों के साथ सभी शेयरों का विलय कर लें। बुधवार को फ्यूचर रिटेल का शेयर बीएसई पर 5 प्रतिशत गिरावट के साथ 73 रुपए पर कारोबार कर रहा था। इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 4,000 करोड़ रुपए से नीचे पहुंच गया है।

बैंकों ने कई टॉप रिटेल कंपनियों से किया है संपर्क

बैंकर के अनुसार, बैंकों ने विलय की संभावनाओं का पता करने के लिए कई टॉप रिटेल प्लेयरों से संपर्क साधा है। गिरते फाइनेंशियल मैट्रिक्स के कारण कंपनी को अच्छा वैल्यूएशन नहीं मिल सकता है। यह लगभग 200 करोड़ रुपए (दिसंबर 2019 तक) के नकदी से भी कम है। एक बैंकर ने कहा, इसलिए बैंकों ने रिलायंस रिटेल सहित सभी बड़ी कंपनियों से संपर्क किया है ताकि यह देखा जा सके कि क्या वे कंपनी के अधिग्रहण में दिलचस्पी रखते हैं।

बैंक ने दी असेट सेल करने की सलाह

प्रमोटरों के पास कंपनी की लगभग आधी इक्विटी है और इसमें से 50 प्रतिशत बैंकों के पास गिरवी है। फरवरी के बाद से शेयर की कीमत में गिरावट से बैंकों को कंपनी में अधिक इक्विटी का मालिक होना पड़ेगा। ऑपरेटिंग और प्रमोटर समूह दोनों स्तर पर कर्ज पुनर्गठन (debt restructuring) की मांग करने वाले प्रमोटरों के साथ, बैंकों ने कंपनी को सलाह दी है कि वह अपने बकाए का भुगतान करने के लिए परिसंपत्ति बिक्री (asset sale) के लिए जाएं।

बैंकों ने मंजूर क्रेडिट लाइन के वितरण को किया धीमा

बैंकों को इस बात की भी चिंता है कि फ्यूचर रिटेल और उसकी अन्य संबंधित कंपनियों में ऑनशोर डेट के पुनर्गठन से उसके 50 करोड़ डॉलर सिक्योर्ड नोटों पर क्रॉस-डिफॉल्ट हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रमोटर कर्ज (डेट) के पुनर्गठन से कंपनी के सीनियर सिक्योर्ड नोटों पर चेंज ऑफ कंट्रोल क्लॉज में बदलाव को गति मिल सकती है। क्योंकि प्रमोटर शेयरहोल्डिंग 26 प्रतिशत से नीचे गिर जाएगी। इसके साथ ही बैंकों ने फ्यूचर रिटेल की बैंकों से अप्रूव्ड क्रेडिट लाइन के वितरण को धीमा कर दिया है। कंपनी पर 2,125 करोड़ रुपए के वर्किंग कैपिटल क्रेडिट लोन शामिल हैं, जो अप्रैल में उपलब्ध होने की उम्मीद थी।

वर्किंग कैपिटल जारी होने पर कंपनी की फंड की जरूरत होगी पूरी

कंपनी अपनी लिक्विडिटी को सपोर्ट करने के लिए 650 करोड़ रुपए पीक सीजन वर्किंग कैपिटल क्रेडिट लाइन का लाभ उठाने की सोच रही है। हालांकि इस महीने बैंक वर्किंग कैपिटल को जारी कर सकते हैं, जिससे इसकी फंडिंग की जरूरतें पूरी हो सकती हैं। इससे फर्म अपने आप को बचा सकती है। इससे पहले मार्च के अंतिम हफ्ते में किशोर बियानी फ्यूचर रिटेल में हिस्सेदारी बेचने के लिए प्रेमजी इंवेस्ट से बातचीत कर रहे थे। साथ ही वे राइट्स इश्यू की भी तैयारी कर रहे थे। लेकिन बाजार की खराब हालत ने इस पर पानी फेर दिया। फ्यूचर ग्रुप पर कुल कर्ज 11,970 करोड़ रुपए है जबकि सभी ग्रुप कंपनियों के 90 प्रतिशत शेयरों को गिरवी रखा गया है।

पैंटालून को बेचकर जुटाए थे 1,600 करोड़ रुपए

दरअसल बिग बाजार की शुरुआती सफलता के बाद किशोर बियानी ने अपने बिजनेस को फाइनेंशियल सर्विसेस सहित अन्य सेक्टर में डाइवर्सिफाइ किया। इसमें कपड़े से लेकर बीमा तक का समावेश था। साल 2012 में बियानी ने अपने पैंटालून ब्रांड को आदित्य बिड़ला समूह को 1,600 करोड़ रुपए में बेच दिया। इस डील को भी कर्ज चुकाने के लिए ही किया गया था। पैंटालून को किशोर बियानी ने 1987 में शुरू किया था, जो उनका पहला ब्रांड था।

पैंटालून के बाद भी बियानी ने कई ब्रांडों को बेचा। इसमें फाइनेंशियल सर्विसेस को वारबर्ग के साथ 2012 में बेचा। 2013 में समूह ने जनरल इंश्योरेंस बिजनेस में 50 प्रतिशत हिस्सा एलएंडटी को 560 करोड़ रुपए में बेचने का फैसला किया था, लेकिन एक साल बाद इस डील को कैंसल कर दिया गया।

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