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कोरोना इफेक्ट:हर 5 में से एक भारतीय को सता रहा नौकरी जाने का डर, 16 फीसदी लोग सैलरी कटने की आशंका से चिंतित

नई दिल्ली2 वर्ष पहले
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सर्वे के मुताबिक, 20 फीसदी भारतीय ऐसे हैं जिन्हें नौकरी जाने का डर है। 16 फीसदी ऐसे हैं जिन्हें सैलरी में कटौती का डर है। वहीं, 8 फीसदी भारतीयों को बोनस और इक्रीमेंट नहीं होने का डर सता रहा है। - Dainik Bhaskar
सर्वे के मुताबिक, 20 फीसदी भारतीय ऐसे हैं जिन्हें नौकरी जाने का डर है। 16 फीसदी ऐसे हैं जिन्हें सैलरी में कटौती का डर है। वहीं, 8 फीसदी भारतीयों को बोनस और इक्रीमेंट नहीं होने का डर सता रहा है।
  • भारत में करीब 23 फीसदी लोगों के बेरोजगार होने की संभावना जताई जा रही है।
  • यह सर्वेक्षण 7-10 अप्रैल के बीच करीब 1,000 लोगों से पूछे गए सवालों पर आधारित है।

कोरोनावायरस महामारी के चलते देश में उद्योगों की हालात पस्त है। भारत की लगभग सभी कारोबारी गतिविधियां ठप हैं। इसकी वजह से लाखों लोगों की नौकरियों पर संकट आ गया है। साथ ही कर्मचारियों को सैलरी में कटौती और अप्रेजल न होने का डर सता रहा है। हाल ही में किए गए एक सर्वे के मुताबिक, इस समय हर 5 में से एक भारतीय के मन में नौकरी जाने का डर बना हुआ है।

20 फीसदी भारतीय में नौकरी जाने का डर
इंटरनेट आधारित बाजार अनुसंधान और डेटा एनालिटिक्स फर्म YouGov द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, कोरोनावायरस के चलते इकोनाॅमी पर गहरा असर पड़ सकता है। मौजूदा हालात को देखते अधिकतर लोगों में नौकरी जाने डर बना हुआ है। YouGov द्वारा किए गए सर्वे के मुताबिक, 20 फीसदी भारतीय ऐसे हैं जिन्हें नौकरी जाने का डर है। 16 फीसदी ऐसे लोग हैं जिन्हें सैलरी में कटौती को लेकर डर है। वहीं, 8 फीसदी भारतीयों को बोनस और इक्रीमेंट नहीं होने का डर सता रहा है। बता दें कि कई रिपोर्ट्स पहले की कह चुकी है कि कोविड-19 महामारी के चलते भारत में लाखों नौकरियां दांव पर हैं। शहरी बेरोजगारी दर 30.9 प्रतिशत तक बढ़ गई है। कुल मिलाकर बेरोजगारी दर पहले से 23.4 प्रतिशत अधिक बढ़ी है।

1,000 लोगों से पूछे गए सवालों पर आधारित है सर्वे
यह सर्वेक्षण YouGov द्वारा 7-10 अप्रैल के बीच करीब 1,000 लोगों से पूछे गए सवालों पर आधारित है। सर्वेक्षण में यह भी पता चला है कि करीब 47 फीसदी लोग खुद को फिट रखने के लिए घर में ही व्यायाम करना शुरू कर दिया है। 46 फीसदी लोग ऐसे हैं जो दोस्तों और परिवार के साथ वीडियो कॉल पर समय बिता रहे हैं।

भारतीय उद्योग परिसंघ की रिपोर्ट
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) एक सर्वेक्षण में भारी संख्या में लोगों की नौकरियां जाने का अंदेशा जता चुकी है। CII के करीब 200 मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के बीच किए गए ऑनलाइन सर्वेक्षण 'CII सीईओ स्नैप पोल' के मुताबिक मांग में कमी से ज्यादातर कंपनियों की आय गिरी है। इससे नौकरियां जाने का अंदेशा है। सर्वेक्षण के अनुसार, 'चालू तिमाही (अप्रैल-जून) और पिछली तिमाही (जनवरी-मार्च) के दौरान अधिकांश कंपनियों की आय में 10 फीसदी से अधिक कमी आने की आशंका है और इससे उनका लाभ दोनों तिमाहियों में पांच फीसदी से अधिक गिर सकता है।' सर्वेक्षण के अनुसार, लॉकडाउन खत्म होने के बाद 47 फीसदी कंपनियों में 15 फीसदी से कम नौकरियां जाने की संभावना है। वहीं 32 फीसदी कंपनियों में नौकरियां जाने की दर 15 से 30 फीसदी होगी।

टूरिज्म इंडस्ट्री पर सबसे ज्यादा असर
महामारी के कारण देश के टूरिज्म इंडस्ट्री पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। इस इंडस्ट्री को 5 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होने और 4-5 करोड़ लोगों का रोजगार छिनने का खतरा है। इस इंडस्ट्री के ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर जिसमें ब्रांडेड होटल, ट्यूर ऑपरेटर्स और ट्रैवल एजेंसी शामिल हैं उसे सबसे ज्यादा 1.58 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) ने यह अनुमान जताया है। रिपोर्ट के मुताबिक होटल ग्रुप्स को 1.10 लाख करोड़ रुपए के नुकसान की आशंका है। ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसीज को 4 हजार 312 करोड़, ट्यूर ऑपरेटर्स को 25 हजार करोड़, एडवेंचर ट्यूर ऑपरेटर्स को 19 हजार करोड़ और क्रूज ट्यूरिज्म को 419 करोड़ रुपए का घाटा होने की आशंका है।

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के रिपोर्ट
हाल में जारी अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 के चलते भारत में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले 40 करोड़ लोगों के प्रभावित हो सकते हैं। संगठन के अनुसार कोरोना संकट के कारण 2020 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में 6.7 प्रतिशत कामकाजी घंटे समाप्त होने की आशंका है। यानी कोरोनावायरस महामारी के कारण केवल दूसरी तिमाही में ही 19.5 करोड़ पूर्णकालिक नौकरियां खत्म हो सकती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 महामारी का फूड सर्विस, मैन्यूफैक्चरिंग, होस्पिटैलिटी, रिटेल, बिजनेस और इससे जुड़ी एडमिनिस्ट्रेटिव गतिविधियों पर सबसे ज्यादा असर होगा।

फियो की रिपोर्ट
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) ने शुक्रवार को कहा था कि कोरोनावायरस महामारी के कारण भारत के निर्यात क्षेत्र के 50 फीसदी से ज्यादा ऑर्डर निरस्त हो चुके हैं। इस कारण निर्यात क्षेत्र से जुड़े डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोगों की नौकरी पर संकट पैदा हो गया है। इसका अलावा अभी भविष्य में भी निर्यात के ऑर्डर मिलने की संभावना कम दिख रही है। मौजूदा हालातों को देखते हुए फियो ने निर्यातकों के लिए तुरंत राहत पैकेज घोषित करने की मांग की है। फियो के अध्यक्ष शरद कुमार सराफ ने कहा है कि इस समय जीवन और आजीविका के बीच संतुलन की आवश्यकता है, क्योंकि केवल एक का चयन करना देश के लिए विनाशकारी हो सकता है।

लॉकडाउन से 2.5 करोड़ नौकरियां जाने का खतरा
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में ट्रैवल, टूरिज्म और एविएशन इंडस्ट्री से करीब 6.2 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है। लेकिन कोरोनावायरस के चलते जारी लॉकडाउन की वजह से वैश्विक स्तर पर करीब 2.5 करोड़ लोगों के बेरोजगार होने का खतरा बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन की वजह से एयर ट्रैवल डिमांड में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। वैश्विक स्तर पर एविएशन इंडस्ट्री का एयरलाइंस सेक्टर अकेले 27 लाख लोगों को रोजगार देती है।