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इकोनॉमी / कोरोनावायरस संक्रमण के कारण देश के मंदी में फंसने और कंपनियों के दिवालिया होने का खतरा

corona ; coronavirus ; market crisis ; indian economy ; The risk of the country getting into recession and bankruptcy of companies due to coronavirus infection
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corona ; coronavirus ; market crisis ; indian economy ; The risk of the country getting into recession and bankruptcy of companies due to coronavirus infection

दैनिक भास्कर

Mar 26, 2020, 03:22 PM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस संक्रमण का भारतीय अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ने की आशंका है। आर्थिक रिसर्च एजेंसी डन एंड ब्रैडस्ट्रीट की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए किए गए 21 दिनों के देशव्यापी लॉकडाउन से कई सेक्टरों के कारोबार पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। इन सेक्टरों में मैन्यूफैक्चरिंग, पेट्रोलियम ऑयल, फाइनेंशियल व कई अन्य क्षेत्र शामिल हैं।


भारतीय कंपनियों के दिवालिया होने का खतरा बढ़ा
एजेंसी के ताजा आर्थिक अनुमान के मुताबिक देश के मंदी में फंसने और कई कंपनियों के दिवालिया होने की आशंका बढ़ गई है। पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा बढ़ गया है और भारत इससे अपने को अलग-थलग नहीं रख सकता है। एजेंसी के मुख्य अर्थशास्त्री अरुण सिंह ने कहा कि चीन के साथ ही दुनियाभर के कई और मैन्यूफैक्चरिंग हब्स भी लॉकडाउन से गुजर रहे हैं। इसलिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला खराब होने और वैश्विक विकास दर घटने का खतरा ज्यादा बढ़ गया है।


5 फीसदी से नीचे गिर सकती है भारत की विकास दर
भारत के आर्थिक विकास के बारे में सिंह ने कहा कि 21 दिनों के लॉकडाउन के कारण भारत की विकास दर में और गिरावट आ सकती है। 2019-20 में यह 5 फीसदी के हमारे पुराने अनुमान से भी नीचे गिर सकती है। अगले कारोबारी साल की विकास दर के बारे में अभी अनुमान लगाना कठिन है। रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन और कारोबारी गतिविधियों पर पाबंदी और लोगों के एक जगह इकट्‌ठा होने पर लगी रोक से मार्च 2020 के बाद वैश्विक और घरेलू विकास दर प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2020 में औद्योगिक विकास दर 4-4.5 फीसदी के दायरे में रहने का अनुमान है।


महंगाई में आएगी कमी
सिंह ने कहा कि संक्रमण का फैलाव किस हद तक बढ़ेगा इस बारे में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता है इसलिए विकास दर का सटीक अनुमान लगाना कठिन है और अनुमान में बदलाव करना पड़ सकता है। जहां तक महंगाई की बात है, मांग और उत्पादन गतिविधियों में कमी, क्रूड की अंतरराष्ट्रीय कीमत में भारी गिरावट, ऊर्जा, बेस मेटल और उर्वरक जैसी कई प्रमुख कमोडिटी के भाव में गिरावट के कारण महंगाई में कमी आ सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2020 में खुदरा महंगाई दर 6.5-6.7 फीसदी के दायरे में और थोक महंगाई दर 2.35-2.5 फीसदी के दायरे में रह सकती है।

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