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समस्या:सरकार को इस साल विनिवेश लक्ष्य हासिल करने में मुश्किल हो सकती है, वित्त वर्ष में 2.10 लाख करोड़ रुपए जुटाने की योजना

मुंबईएक वर्ष पहले
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एलआईसी के आईपीओ से 90 हजार करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद, लेकिन खराब माहौल में एलआईसी का वैल्यूएशन कम हो सकता है। आईपीओ लाने के लिए कानून में थोड़ा बदलाव भी करना होगा। - Dainik Bhaskar
एलआईसी के आईपीओ से 90 हजार करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद, लेकिन खराब माहौल में एलआईसी का वैल्यूएशन कम हो सकता है। आईपीओ लाने के लिए कानून में थोड़ा बदलाव भी करना होगा।
  • चालू वित्त वर्ष के पहले ढाई महीने में अब तक सरकार को विनिवेश से कुछ नहीं मिल पाया है
  • कोविड और खराब आर्थिक माहौल के कारण हिस्सेदारी बेचने का काम शुरू नहीं हो पाया है

सरकार को इस साल कंपनियों में हिस्सेदारी बेचकर 2.10 लाख करोड़ रुपए पाने का लक्ष्य हासिल कर पाना मुश्किल दिख रहा है। चालू वित्त वर्ष के दो महीनों में अभी तक सरकार को कुछ नहीं मिल पाया है। जून भी तकरीबन आधा बीत चुका है।

जून अंत तक सरकार दो-तीन कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है। यह पहली बार नहीं है जब सरकार लक्ष्य से चूक जाएगी। इसके पहले भी कई बार ऐसा हुआ है। लेकिन इस बार सरकार का खर्च बहुत बढ़ गया है, इसलिए यह राशि बेहद जरूरी हो जाती है।

दरअसल, कोविड और बाजार के खराब माहौल के कारण सरकार अभी तक हिस्सेदारी बेचने का काम शुरू नहीं कर पाई है। हालांकि विश्लेषक कहते हैं कि ज्यादातर विनिवेश दूसरी छमाही में होता है। इसलिए अभी इस पर काम थोड़ा धीमा हो रहा है। इस बार सरकार ने 2.10 लाख करोड़ रुपए का बड़ा लक्ष्य रखा है।

इस लक्ष्य में एलआईसी के आईपीओ से 90 हजार करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद थी। लेकिन खराब माहौल में एलआईसी का वैल्यूएशन कम हो सकता है। साथ ही उसका आईपीओ लाने के लिए कानून में थोड़ा बदलाव करना होगा।

विश्लेषकों के मुताबिक एलआईसी के आईपीओ में काफी काम किया जाना है। इसलिए हो सकता है कि यह आईपीओ अगले वित्त वर्ष में आए। अगर यह आईपीओ नहीं आता है तो 2.10 लाख करोड़ रुपए मिलना मुश्किल है। यही नहीं, बीपीसीएल को भी बेचने की योजना टल रही है। इसको खरीदने के लिए आवेदन करने की तारीख 31 जुलाई कर दी गई है। दूसरी बार इसकी तारीख बढ़ी है।

पिछले साल नवंबर में सरकार ने कहा था कि वह कई कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से कम कर सकती है। देश में करीबन 339 सरकारी कंपनियां (सीपीएसई) हैं। इनका पेड अप कैपिटल यानी चुकता पूंजी 2.5 लाख करोड़ रुपए है। इनके पास रिजर्व और सरप्लस 9.42 लाख करोड़ रुपए का है।

कंपनियों की हिस्सेदारी बेचकर जुटाई जाने वाली राशि को विनिवेश या डिसइनवेस्टमेंट कहते हैं। 1999-2004 के बीच सरकार ने इसके जरिए 24,620 करोड़ रुपए जुटाए थे। इसमें आईपीसीएल, वीएसएनएल, मारुति उद्योग, हिंदुस्तान जिंक और सीएमसी शामिल थीं। 2004 से 2009 तक सरकार ने 8,516 करोड़ रुपए जुटाए थे। इसमें एनटीपीसी, पावर ग्रिड और आरईसी शामिल थीं।

2009-14 के बीच सरकार ने सीपीएसई ईटीएफ, कोल इंडिया आईपीओ, सूटी विनिवेश के जरिये 1.05 लाख करोड़ रुपए जुटाए। 2014-2019 में भारत 22 ईटीएफ, एचपीसीएल, आरईसी विनिवेश के जरिये सरकार ने 2.80 लाख करोड़ रुपए जुटाए।

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