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  • Estimates of loss of 75 to 80 thousand crores due to 21 days lockdown, IndiGo is expected to lose 5494 crores and SpiceJet 1412 crores.

उड़ान जमीन पर / 21 दिन के लॉकडाउन से 75 से 80 हजार करोड़ रुपए का नुकसान होने की आशंका, इंडिगो को 5 हजार 494 करोड़ और स्पाइसजेट को 1 हजार 412 करोड़ का घाटा संभव

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  • कोरोना वायरस के चलते भारत की एविएशन सेक्टर को रोजाना 150 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो रहा
  • घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ाने रद होने के चलते एअर इंडिया को प्रतिदिन 30 से 35 करोड़ रुपए का नुकसान
  • एयर एशिया, विस्तारा आदि कंपनियों के लिस्टेड न होने के चलते नुकसान का अंदाजा नहीं लगाया जा सका

दैनिक भास्कर

Apr 04, 2020, 12:12 PM IST

नई दिल्ली. कोरोनावायरस से बचने के लिए केंद्र सरकार ने 21 दिनों का लॉकडाउन किया है। इससे देश में एविएशन सेक्टर को करीब 75 से 80 हजार करोड़ रुपए के नुकसान होने की आशंका है। दुनिया भर में एविशन सेक्टर को कुल 21 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। यह बात सेंटर फॉर एशिया पैसिफिक एविएशन इंडिया (CAPA) ने अपनी रिपोर्ट में कही है। देश की एयरलाइंस कंपनियों को अप्रैल-जून की तिमाही में सबसे ज्यादा कमाई होती है, लेकिन लॉकडाउन के चलते इस साल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। CAPA का कहना है कि 21 दिनों में हुए नुकसान के बाद एयरलाइंस इस हालात में नहीं होंगी कि वो 30 जून 2020 तक अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें दोबारा सही ढंग से शुरू कर सकें। एयरलाइंस कंपनियां नुकसान की वजह से वित्त वर्ष 2021 में फ्लीट के विस्तार, टिकट की कीमत समेत अपने पूरे बिजनेस मॉड्यूल को बदल सकती हैं।

एविएशन सेक्टर को रोजाना 150 करोड़ रुपए का नुकसान

कोरोना वायरस के चलते देश में एविएशन सेक्टर को रोजाना 150 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हो रहा है। देश में प्रतिदिन करीब 4000 घरेलू और 500 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन होता है। अकेले दिल्ली में ही रोजाना 900 से अधिक उड़ानों का संचालन होता है। भारतीय विमानन उद्योग को 75 से 80 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के नुकसान की आशंका है। इस वजह से रेवन्यू भी 40% गिर सकता है। डीजीसीए के एक अधिकारी का कहना है कि कोरोना संकट से पहले देश में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का एक दिन का रेवन्यृ करीब 350-400 करोड़ रुपए था, जो अब आधा रह गया है।

दिल्ली एयपोर्ट पर मेंटेनेंस और सुरक्षाकर्मी ही मौजूद हैं।
  • यह ंकंपनी की कुल सिटिंग क्षमता है, प्रति फ्लाइट एयरक्राफ्ट की आक्यूपेंसी अलग-अलग होती है।
  • ऑक्यूपेंसी और किराया सीजन के अनुसार बदलता रहता है।

इंडिगो को 5 हजार 494 करोड़ और स्पाइसजेट को 1 हजार 412 करोड़ रुपए का संभव 

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक इंडिगो को 21 दिनों के लॉकडाउन के चलते 5494 करोड़ रुपए का नुकसाना हो सकता है जबकि स्पाइसजेट को करीब 1412 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। दूसरी एयरलाइंस कंपनियों को भी 21 दिनों के लॉकडाउन के चलते भारी नुकसान होगा लेकिन इन कंपनियों के लिस्टेड न होने के चलते नुकसान का अंदाजा नहीं लगाया जा सका है।

एअर इंडिया को रोजाना 30 से 35 करोड़ रुपए का नुकसान

एक अनुमान के मुताबिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद होने के चलते एअर इंडिया को प्रतिदिन 30 से 35 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। एअर इंडिया का कहना है कि फ्लाइट बंद होने के चलते फ्यूल, ग्राउंड हैंडलिंग, एयरपोर्ट चार्ज पर होने वाले खर्च बच रहा है लेकिन सैलरी, अलाउंसेस, लीज रेंट और मिनिमम मेंटेनेंस और इंटरेस्ट पेमेंट देना होगा। एअर इंडिया की डेली आमदनी करीब 60 से 65 करोड़ रुपए है। इसमें से 90% कमाई पैसेंजर ट्रैवल से होती है। एअर इंडिया की मानें, तो अभी पैसेंजर ट्रैवल से होने वाली कमाई पूरी तरह से ठप है। एअर इंडिया को कर्मचारियों की सैलरी के तौर पर 250 करोड़ रुपए प्रतिमाह खर्च करने होते हैं, जबकि एरक्राफ्ट की लीज और रेंट पर करीब प्रतिमाह 226 करोड़ रुपए का खर्च आता है। एयरलाइंस ने करीब 21 बोइंग B787-800s लीज पर ले रखें हैं। जबकि इसके अतिरिक्त 27 एयरबस A320Neo प्लेन की लीज देनी होती है। एअर इंडिया को एक बोइंग B787 एयरक्राफ्ट के लिए 7.5 करोड़ रुपए प्रतिमाह के हिसाब से किराए का भुगतान करना होता है। इसके अलावा, एयरलाइन को अन्य तमाम तरह के ब्याज के रूप में प्रति माह 225 करोड़ रुपए का पेमेंट करना होता है।

मुंबई एयरपोर्ट पर भी केवल मेंटेनेंस कर्मचारी मौजूद हैं। 

मुंबई एयरपोर्ट पर मेंटनेंस के लिए पार्क एयरक्राफ्ट।

लॉकडाउन बढ़ा ताे कैश रिजर्व समाप्त होने पर बंद करना पड़ेगा ऑपरेशन

CAPA की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कोविंड 19 की वजह से शुरुआती तौर पर 21 दिनों का लॉकडाउन किया है। लेकिन इस लॉकडाउन के बढ़ने का अंदेशा जाहिर किया जा रहा है। अगर लॉकडाउन तीन माह तक जारी रहता है, तो दो लिस्टेड एयरलाइंस इंडिगो और स्पाइसजेट का वित्त वर्ष 2020 की चौथी और वित्त वर्ष 2021 की पहली तिमाही में साझा नुकसान करीब 1.25 से लेकर 1.50 बिलियन डॉलर होगा। ऐसे में इंडिगो का अन्य छोटी एयरलाइंस कैरियर का कैश रिजर्व खत्म हो सकता है और उन्हें अपना कामकाज हमेशा के लिए बंद करना पड़ सकता है। 

  • एयरलाइंस की ओर से एयरक्राफ्ट के आर्डर कैंसिल किए जा सकते हैं। साथ ही लीज में बदलाव किया जा सकता है। इसकी वजह से एयरलाइंस को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
  • टाटा संस अपनी रणनीति में बदलाव करके अपनी दो एरलाइंस (एयरएशिया और विस्तारा) को मिलाकर एक साथ ऑपरेट कर सकता है।
  • एयर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन का प्लान वित्त वर्ष 2021 के लिए स्थगित किया जा सकता है। ऐसे में सरकार को एयरइंडिया के लिए दूसरा प्लान लाना होगा। साथ ही आगे एयर इंडिया को आगे के ऑपरेशन जारी रखने के लिए 1.5 बिलियन डॉलर की मदद की जरूरत होगी।
  • लॉकडाउन कब तक जारी रहेगा यह तय नहीं है। ऐसे में लॉकडाउन के बाद भी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में यात्री संख्या में 30 से 50 फीसदी की गिरावट दर्ज की जाएगी।

एयरलाइंस कंपनियों के सामने मेंटेनेंस, नाइट पार्किंग और सीमित स्टाफ रखने जैसी कई समस्याएं

एयरलाइंस मैन्यूफैक्चरिंग गाइडलाइन के मुताबिक पार्क किए गए प्लेन को भी मेंटिनेंस की जरूरत होती है। ऐसे में एयरलाइंस को सीमित तादाद में स्टॉफ को ड्यूटी पर रखना होता है। इससे सबसे ज्यादा नुकसान छोटी एयरलाइंस कंपनी जैसे ट्रूजेट और स्टार एयरएयर को होगा। इन एयरलाइंस के पास बड़ी संख्या में मैनपावर और रिसोर्स की कमी होती है। भारत के सामने 650 कमर्शियल और निजी जेट विमानों के बेड़े की नाइट पार्किंग या अनिश्चित कालीन पार्किंग के लिए सरकार या हवाई अड्डे के ऑपरेटर से अनुमति की जरूरत होती है। अगर विमान में नाइट पार्किंग नहीं है, तो सरकार की ओर से विमान के आयात की इजाजत नहीं दी जाती है। ऐसे में भारत के 650 प्लेन के पास नाइट पार्किंग प्लेस होता है, तो उन्हें पूरी रात बिना किसी पार्किंग के विमान को घुमाना होता है।

दिल्ली में 205 तो मुंबई एयरपोर्ट पर 100 एयरक्राफ्ट पार्क  

यह बड़ा सवाल है कि आखिर 650 प्लेन को कहां पार्क किया गया है। फ्लाइट रडार 24 के मुताबिक भारत की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइंस इंडिगो के करीब 60 एयरक्राफ्ट दिल्ली में पार्क हैं, जो कि कुल फ्लीट का एक चौथाई है। वहीं एयर इंडिया के करीब 50 प्लेन दिल्ली में पार्क हैं।

एयरलाइंस कंपनियों के विमान छह बड़े शहरों के एयरपोर्ट पर पार्क किए गए हैं 

दिल्ली, मुंबई, बेंग्लुरू, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता एयरपोर्ट पर सबसे ज्यादा एयरक्राफ्ट पार्क किए गए हैं। इसके अलावा कुछ एयरक्राफ्ट इंदौर, पुणे, अमृतसर, गुवाहाटी, चंढ़ीगढ़, जयपुर, लखनऊ, कालीकट और त्रिरुअनंतपुरम में पार्क हैं। 

एविएशन इंडस्ट्री के इन सेक्टर पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर 

  • एयरपोर्ट ऑपरेटर्स
  • ड्यूटी फ्री, रिटेल, फूड एंड ब्रेवरेज और एयरपोर्ट की अन्य छूट
  • ग्राउंड हैंडलिंग
  • MROs
  • फ्लाइट की कैटरिंग कंपनी
  • हवाई यात्रा

कोलकाता एयरपोर्ट पर पसरा सन्नाटा।

सरकार से कर्मचारयों को 3 से 6 महीने सैलरी देने के लिए आर्थिक मदद की मांग

संकट से जूझ रही एविएशन इंडस्ट्री ने सरकार से तत्काल सहायता की मांग की है। CAPA ने तीन चरणों में सरकार से एविेएशन सेक्टर को आर्थिक मदद देने को कहा है।

  • पहला चरण - सरकार की तरफ से पहले चरण में तत्काल प्रभाव से आर्थिक मदद की जानी चाहिए। जिससे एयरलाइंस अपने कर्मचारियों को 3 से 6 माह की सैलरी दे सकें।
  • दूसरा चरण - एयरपोर्ट चार्ज, एविएशन टर्बाइन फ्यूल, जीएसटी और अन्य टैक्स में छूट की मांग की गई है। साथ ही अगले 3 से 6 माह तक ब्याज और प्रिंसिपल पेमेंट को आगे बढ़ाने की अपील की गई है.
  • तीसरा चरण - तीसरे चरण में रिकवरी के तरीके में बदलाव की मांग की गई है। इसमें एविएशन टर्बाइन फ्यूल को जीएसटी फ्रेमवर्क के तहत लाने को कहा गया है। जिससे फुल इनपुट टैक्स क्रेडिट उपलब्ध कराया जा सकेगा। साथ ही एटीएफ पर सेल टैक्स घटाकर 4 फीसदी करने की मांग की है। एयरलाइंस को बैंक की तरफ से क्रेडिट उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

इंडस्ट्री सपोर्ट - एयरपोर्ट को रेवेन्यू में हिस्सेदारी के तौर पर मिलने वाली रकम में 3 से 6 माह की छूट दी जानी चाहिए

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पूर्व जनरल मैनेजर जीएस बावा ने कहा कि आईएटीए (इंटरनेशनल एयर ट्रैफिक एसोसिएशन) का एक डेटा कहता है कि कोविद -19 के प्रकोप के कारण ग्लोबल एविएशन इंडस्ट्री को करीब 25 बिलियन डॉलर (1.8 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में एविएशन इंडस्ट्री को नुकसान की भरपाई के लिए आर्थिक पैकेज की जरूरत होगी।

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