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एविएशन पर रिपोर्ट:कोविड-19 से एविएशन सेक्टर को 25,000 करोड़ रुपए का घाटा होने की आशंका, पटरी पर लौटने में दो साल लगेंगे- क्रिसिल

मुंबईएक वर्ष पहले
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क्रिसिल ने रिपोर्ट में कहा है कि फिलहाल विमान सेवा कंपनियां अपने बेड़े में विस्तार नहीं करेंगी। - Dainik Bhaskar
क्रिसिल ने रिपोर्ट में कहा है कि फिलहाल विमान सेवा कंपनियां अपने बेड़े में विस्तार नहीं करेंगी।
  • एविएशन उद्योग उबरने की कोशिश कर रहा था, पर कोविड-19 से ठप हो गया
  • सरकार को वित्तीय पैकेज जारी करना चाहिए, विमान ईंधन को जीएसटी में लाना चाहिए

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अनुमान लगाया है कि कोविड-19 महामारी की वजह से एविएशन सेक्टर को 25,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। इस सेक्टर को पटरी पर लौटने में दो साल का समय लग सकता है।

अलग-अलग तरीके से होगा नुकसान

क्रिसिल ने अपनी जारी रिपोर्ट में कहा है कि इस लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर विमान सेवा कंपनियों को होगा। उन्हें तकरीबन 17-18 हजार करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान उठाना होगा। हवाई अड्डा संचालकों को पांच हजार करोड़ रुपए के नुकसान की आशंका है। हवाई अड्डों पर बने आउटलेटों को 1,700 करोड़ रुपए से 1,800 करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है। क्रिसिल के निदेशक (परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स) जगननारायण पद्मनाभन ने रिपोर्ट पर एक टेलीकॉन्फ्रेंस में कहा कि जेट एयरवेज के बंद होने के कारण पिछले साल घरेलू विमानन क्षेत्र की वृद्धि दर घटकर 2.5 प्रतिशत रह गई थी। अभी यह उद्योग उससे उबरने की कोशिश ही कर रहा था कि कोरोना वायरस के कारण कारोबार पूरी तरह ठप हो गया।
एविएशन सेक्टर में विलय और अधिग्रहण हो सकता है

कोरोना से घरेलू विमान सेवा कंपनियों की उड़ानों में औसतन 90 फीसदी सीटें भरी होती थीं। कोरोना के बाद शुरू में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत तक रहेगा और इसे पुराने स्तर तक पहुंचने में दो साल का समय लग सकता है। पद्मनाभन ने कहा कि कोविड-19 के बाद पूरे एविएशन सेक्टर में कई ढांचागत बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कुछ विमान सेवा कंपनियों के विलय एवं अधिग्रहण की भी संभावना है। उन्होंने कहा कि अभी फिलहाल विमान सेवा कंपनियां अपने बेड़े में विस्तार नहीं करेंगी।
विमानों के ऑर्डर रद्द हो सकते हैं
उन्होंने कहा कि भारतीय एयरलाइंस ने बड़ी संख्या में विमानों के जो ऑर्डर दिए हैं उनमें कुछ ऑर्डर रद्द हो सकते हैं या कम से कम भविष्य के लिए स्थगित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के बाद हवाई यातायात में 40 से 50 फीसदी की गिरावट आएगी। क्रिसिल ने सरकार से विमानन क्षेत्र के लिए वित्तीय पैकेज देने, विमान ईंधन को जीएसटी में लाने और इसके दाम कम करने, विमान ईंधन के मूल्य के भुगतान के लिए अधिक समय देने और एयरपोर्ट चार्ज माफ करने की मांग की। हालांकि एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने स्वीकार किया कि यदि सरकार विमान ईंधन पर शुल्क नहीं बढ़ाती है तो यह भी बड़ी बात होगी।

वॉरेन बफे ने एयरलाइंस के बेच डाले थे पूरे शेयर

अरबपति निवेशक वारेन बफे ने कहा कि उनकी कंपनी बर्कशायर हैथवे ने एयरलाइन कंपनियों के अपने सभी शेयर बेच डाले हैं। बफे का यह बयान अमेरिका के एयरलाइन उद्योग के लिए खतरे का संकेत है। यह उद्योग कोविड-19 (नया कोरोनावायरस) महामारी के कारण तबाही के कगार पर पहुंच गया है। बफेट बर्कशायर हैथवे के चेयरमैन हैं। उनके बयानों पर दुनियाभर के निवेशकों की नजर रहती है और वे इसका उपयोग अपने भावी निवेश के फैसले लेने में करते हैं। कंपनी ने जनवरी-मार्च तिमाही में 50 अबर डॉलर का घाटा दर्ज किया है।

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