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आम बजट का लेखा-जोखा:सरकार ने शुरू की वित्त वर्ष 2022-23 का बजट बनाने की तैयारी, नवंबर के पहले हफ्ते तक वित्त मंत्रालय की प्री-बजट मीटिंग होगी

4 दिन पहले
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यह तो हम सब जानते हैं कि सरकार हर साल बजट पेश करती है जिसमें वह बताती है कि नए वित्त वर्ष में कहां कितना खर्च करेगी। वह यह भी बताती है कि खर्च किया जाने वाला पैसा कहां से आएगा। कितना पैसा टैक्स और दूसरे तरीकों से जुटाया जाएगा और कितना उधार लिया जाएगा।

आम-बजट के लिए सलाह मशविरे का दौर शुरू

आप सोच रहे होंगे कि हम बजट की बात अभी क्यों बात कर रही हैं जबकि यह अगले साल 1 फरवरी को आएगा। दरअसल, सरकार आज यानी 12 अक्टूबर 2021 से आम-बजट की औपचारिक तैयारी शुरू कर रही है। इसके तहत आज से नवंबर के पहले हफ्ते तक वित्त मंत्रालय की प्री-बजट मीटिंग होगी।

मौजूदा वित्त वर्ष के रिवाइज्ड एस्टीमेट पर विचार

जानकारी के मुताबिक, आज प्री बजट मीटिंग में दो मसलों पर बात हुई है। सरकार मौजूदा वित्त वर्ष के लिए रिवाइज्ड एस्टीमेट पर विचार कर रही है। देखा जा रहा है कि किस विभाग को अपनी स्कीमें और टारगेट पूरा करने के लिए कितनी अतिरिक्त रकम की जरूरत होगी।

फर्टिलाइजर सेक्टर को अतिरिक्त फंड मिलने की संभावना

फर्टिलाइजर सेक्टर को रिवाइज्ड एस्टीमेट के तहत अतिरिक्त फंड मिलने की संभावना है। जलशक्ति, एडुकेशन, एग्रीकल्चर सेक्टर को ज्यादा फंड मिल सकता है। नए साल का बजट कोविड को देखते हुए अहम होगा जिसमें विनिवेश का टारगेट बढ़ाया जा सकता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का चौथा बजट

आपको बता दें कि अगले साल मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का चौथा बजट होगा। आपको यह याद ही होगा कि आम बजट 2016 तक हर फरवरी के अंतिम संसदीय कार्यकारी दिन पेश किया जाता था लेकिन 2017 से यह 1 फरवरी को पेश किया जा रहा है।

दिसंबर तिमाही के आरंभ में शुरू होती है

बजट बनाने के लिए सलाह मशविरे का दौर वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही यानी दिसंबर तिमाही के आरंभ में शुरू होता है। यह चार चरणों में पूरी होती है: (1) खर्च और आमदनी का अनुमान (2) बजट घाटे का शुरुआती अनुमान (3) घाटा कम करने की कवायद (4) बजट प्रस्तुति और मंजूरी।

वित्त, राजस्व और व्यय सचिव की भूमिका अहम

आम बजट बनाने में केंद्र सरकार के वित्त सचिव, राजस्व सचिव और व्यय सचिव की भूमिका अहम होती है। बजट की तैयारी में नॉर्थ ब्लॉक या वित्त मंत्री के निवास पर उनसे उनकी रोज कई बार मीटिंग होती है। इसको लेकर वित्त सचिव प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के दफ्तर बुलाए जाते रहते हैं।

उद्योग चैंबरों, संस्थाओं और संगठनों से बातचीत

वित्त मंत्री बजट के बारे में इनपुट लेने के लिए CII और FICCI जैसे उद्योग चैंबर के प्रतिनिधियों, उद्योगपतियों, एकेडेमिशियन वगैरह जैसे इंटरेस्ट ग्रुप को बुलाते हैं। लेकिन आम जनता भी बजट को लेकर अपने सुझाव वित्त मंत्रालय को भेज सकती है।

प्रक्रिया अगस्त सितंबर से छह महीने चलती है

बजट तैयार करने की जिम्मेदारी आर्थिक मामलों के विभाग के बजट खंड की होती है। बजट बनाने की प्रक्रिया अगस्त सितंबर से शुरू होती है जो छह महीनों में पूरी होती है। इसे नया वित्त वर्ष शुरू होने पहले संसद के दोनों सदनों- लोकसभा और राज्यसभा में पास कराना जरूरी होता है।

पूरा प्रोसेस कुछ ऐसा होता है:

1. सबसे पहले वित्त मंत्रालय एक सर्कुलर जारी कर सभी मंत्रालयों, राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों, स्वायत्त संस्थाओं को नए साल के लिए एस्टीमेट बनाने के लिए कहता है। उन्हें नए साल के लिए अनुमान देने के अलावा पिछले साल की खर्च और आमदनी का ब्योरा भी देना होता है।

2. एस्टीमेट मिलने के बाद केंद्र सरकार के आला अफसर उसकी पड़ताल करते हैं। इस पर संबंधित मंत्रालयों और व्यय विभाग के अधिकारियों की गहन चर्चा होती है। इसके बाद आंकड़ों को सिफारिशों के साथ वित्त मंत्रालय के पास भेजा जाता है।

3. वित्त मंत्रालय सभी सिफारिशों पर गौर करने के बाद विभागों को उनके खर्च के लिए राजस्व का आवंटन करता है। राजस्व और आर्थिक मामलों का विभाग हालात को गहराई से समझने के लिए किसानों और छोटे कारोबारियों के प्रतिनिधियों और विदेशी संस्थागत निवेशकों से संपर्क करता है।

4. प्री बजट मीटिंग में वित्त मंत्री संबंधित पक्षों के प्रस्ताव और मांगों को जानने के लिए उनसे मिलते हैं। इनमें राज्यों के प्रतिनिधि, बैंकर, कृषि विज्ञानी, अर्थशास्त्री और कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। प्री-बजट मीटिंग खत्म होने के बाद वित्त मंत्री सभी मांगों पर अंतिम फैसला लेते हैं। बजट को अंतिम रूप दिए जाने से पहले उसको लेकर वित्त मंत्री प्रधानमंत्री से भी बात करते हैं।

5. बजट पेश होने से कुछ दिन पहले हलवा सेरेमनी होती है। एक बड़ी सी कड़ाई में तैयार किया जाने वाला हलवा वित्त मंत्रालय के स्टाफ में बांटा जाता है। इसी के साथ बजट की छपाई प्रक्रिया शुरू होती है। प्रक्रिया में लगे अधिकारी और सपोर्ट स्टाफ बजट पेश होने तक मंत्रालय में ही रहते हैं। इस वित्त वर्ष के बजट की प्रिंटिंग नहीं हुई और संसद सदस्यों को उसकी सॉफ्ट कॉपी दी गई।

6. वित्त मंत्री आम बजट को लोकसभा में पेश करते हैं। 2016 तक फरवरी के अंतिम दिन पेश होता था। 2017 से यह हर साल 1 फरवरी को पेश होने लगा। इस साल पहली बार बजट के सभी दस्तावेज Union Budget मोबाइल पर उपलब्ध कराए गए।

आइए अब आम बजट से जुड़े कुछ रोचक तथ्यों की बात करते हैं। जैसे कि बजट शब्द का इस्तेमाल 18वीं सदी के मध्य में ब्रिटिश संसदीय व्यवस्था में शुरू हुआ था। बजट फ्रांसीसी शब्द से लिया गया था जिसका मतलब चमड़े की थैली होता था।

  • अगर आम बजट की बात करें तो यह ब्रिटिश शासन काल से साल 2000 तक शाम 5 बजे को आता रहा था। साल 2001 में एनडीए सरकार के शासन काल में पहली बार आम बजट सुबह 11 बजे पेश किया गया।
  • 2019 में निवर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट को ब्रीफकेस के बजाय लाल रंग के बही-खाता में लेकर आईं। उसके बाद 2021 में वह बजट को टैबलेट में लेकर आईं और उसके प्रेजेंटेशन को पूरी तरह डिजिटल कर दिया।
  • भारत का पहला बजट स्कॉटिश इकोनॉमिस्ट और पॉलिटिशियन जेम्स विल्सन (द इकोनॉमिस्ट के संस्थापक) ने पेश किया था। इन्हें 1857 के हुए स्वतंत्रता संग्राम के चलते देश में पैदा हुए वित्तीय संकट का समाधान निकालने का जिम्मा दिया गया था।
  • 1924 तक यानी ब्रिटिश शासनकाल में भारत का रेल बजट आम बजट का हिस्सा होता था। जब इसका साइज आम बजट के लगभग 70% तक पहुंच गया तो सरकार ने इस पर विशेष ध्यान देने के लिए इसको आम बजट से अलग कर दिया।
  • इस तरह 1924 से 2017 तक रेल बजट आम बजट से पहले अमूमन 25 फरवरी को पेश किया जाता रहा था। लेकिन सरकार ने 72 साल बाद 1 अप्रैल 2017 को रेल बजट को फिर से आम बजट में शामिल कर दिया।
  • स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को देश के पहले वित्त मंत्री आर के षणमुखम चेट्टी ने पेश किया था। सबसे ज्यादा बजट पेश करने वाले वित्त मंत्री मोरारजी देसाई रहे हैं, जो 1977 से 1979 तक पीएम भी रहे थे। उन्होंने कुल दस, पी चिदंबरम ने नौ और प्रणव मुखर्जी ने आठ बजट पेश किए हैं।
  • 1955 तक आम बजट अंग्रेजी में पेश किया जाता था। उसके बाद सरकार ने बजट दस्तावेजों को अंग्रेजी के साथ ही हिंदी में भी छापने का फैसला किया। इंदिरा गांधी 1970 में देश का बजट पेश करने वाली पहली वित्त मंत्री थीं। उनके बाद 2019 में निर्मला सीतारमण को मोदी सरकार में आम बजट पेश करने का मौका मिला था।
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