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आंध्र प्रदेश गैस रिसाव:विशाखापट्‌टनम में गैसकांड वाली एलजी पॉलीमर को खरीदने वाली पैरेंट कंपनी 1947 में लकी केमिकल के नाम से शुरू हुई थी, दुनियाभर में फैला है कारोबार

मुंबईएक वर्ष पहले
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भारत में एलजी पॉलीमर्स के विशाखापट्‌‌टनम, गुड़गांव, चेन्नई, मुंबई, कोलकाता, विजयवाड़ा, पुणे में ऑफिसेस और प्लांट हैं। - Dainik Bhaskar
भारत में एलजी पॉलीमर्स के विशाखापट्‌‌टनम, गुड़गांव, चेन्नई, मुंबई, कोलकाता, विजयवाड़ा, पुणे में ऑफिसेस और प्लांट हैं।
  • ग्लोबल लेवल की यह चौथे नंबर की सबसे मूल्यवान केमिकल कंपनी है। इसका वैल्यूएशन 2019 में 350 करोड़ डॉलर रहा है।
  • दुनिया भर में 24 मैन्यूफैक्चरिंग सब्सिडियलरी, 13 सेल्स ऑफिस और 5 रिजनल ब्रांच ऑफिस हैं। भारत में मुंबई हेड ऑफिस है।

आंध्र प्रदेश के विशाखापट्‌टनम जिले के वेंकटपुरम में एलजी पॉलीमर्स प्लांट से गैस रिसाव ने इस कंपनी को चर्चा में ला खड़ा कर दिया है। हालांकि भारत में यह बहुत अग्रेसिव कंपनी नहीं है, लेकिन पूरी दुनिया में इसके नेटवर्क फैले हुए हैं। लकी नाम से शुरू हुई एलजी पॉलीमर्स की पैरेंट कंपनी आज दुनिया भर में कई सेक्टरों में अपने डाइवर्सिफाइ बिजनेस को लेकर अग्रेसिव है।

भारत में अधिग्रहण के साथ कारोबार शुरू किया था एलजी केम ने

मूलरूप से यह कोरिया की कंपनी है, जिसने भारत में अपना ऑपरेशन अधिग्रहण के साथ शुरू किया था। भारत में इस कंपनी के विशाखापट्‌टनम, गुड़गांव, चेन्नई, मुंबई, कोलकाता, विजयवाड़ा, पुणे में ऑफिसेस और प्लांट हैं। भारत में इसका मुख्य कार्यालय मुंबई के पवई इलाके में है। 1947 में लकी केमिकल इंडस्ट्रियल कॉर्पोरेशन के रूप में कंपनी ने दक्षिण कोरिया से अपनी शुरुआत की। उसके बाद यह 1969 में कोरिया स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई। 1974 में कंपनी का नाम बदलकर लकी कॉर्पोरेशन हुआ। बाद में इसका भी नाम बदलकर एलजी केम कर दिया गया। यही वह कंपनी थी जिसने भारत में 1996 में हिंदुस्थान पॉलीमर्स लिमिटेड का अधिग्रहण किया और बाद में इस कंपनी का नाम एलजी पॉलीमर्स हो गया। इसकी पैरेंट कंपनी एलजी केम है, जो दुनिया भर में फैली है। एलजी पॉलिमर्स मल्टीनेशनल कंपनी है।

1961 में बनी थी हिंदुस्तान पॉलीमर्स, जो अब एलजी पॉलीमर्स है

1961 में हिंदुस्तान पॉलिमर्स कंपनी की स्थापना हुई थी। 1978 में विजय माल्या के यूबी ग्रुप की मैकडॉवल एंड कंपनी में मर्ज हो गई। वेंकटपुरम गांव के गोपालनट्‌टनम इलाके में एलजी पॉलिमर्स का प्लांट 1997 से है क्योंकि 1996 में एलजीकेम ने इस कंपनी का अधिग्रहण कर लिया था। लॉकडाउन की वजह से प्लांट काफी दिनों से बंद था। बुधवार को ही इसे दोबारा शुरू करने के लिए खोला गया था। यह कंपनी मूलरूप से हाई इंपैक्ट वाला पॉलीस्ट्रीन का निर्माण करती है। हालांकि इसके दुनिया भर में कई बिजनेस हैं।

2.50 लाख कर्मचारी, 137 अरब डॉलर का कारोबार

पूरी दुनिया भर में इस कंपनी के 2,50,000 कर्मचारी हैं। 137.2 अरब डॉलर के बिजनेस वाली इस कंपनी की 2019 में 24.5 अरब डॉलर की कुल बिक्री हुई थी। ऑपरेटिंग लाभ 0.8 अरब डॉलर था। हालांकि 2018 में यह लाभ 2 अरब डॉलर से ज्यादा था। 2019 में कंपनी ने रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी आरएंडडी पर 9.69 करोड़ डॉलर का खर्च किया था। इसके आरएंडडी में कुल 5,700 कर्मचारी हैं। पूरी दुनिया भर में 24 मैन्यूफैक्चिरंग सब्सिडियरी,13 सेल्स सब्सिडियरी और 5 रिजनल ब्रांच ऑफिस हैं।

भारत को महत्वपूर्ण बाजार समझता है एलजी केम

एलजी केमिकल भारत को एक महत्वपूर्ण बाजार समझता है और इसके आक्रामक वैश्विक विकास (aggressive global growth) योजना ने हिंदुस्तान पॉलिमर्स को 100 प्रतिशत अधिग्रहण के माध्यम से भारतीय बाजार में प्रवेश करने के लिए एक उपयुक्त कंपनी के रूप में पहचाना। एलजी केम द्वारा अधिग्रहण करने के बाद हिंदुस्तान पॉलिमर्स का नाम जुलाई, 1997 में बदलकर एलजी पॉलिमर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एलजीपीआई) रखा गया था।

दक्षिण कोरिया में मजबूत है इसकी प्रजेंस

एलजी केमिकल की दक्षिण कोरिया में स्टायरनिक्स बिजनेस में बहुत मजबूत प्रजेंस है। इसकी योजना पीएस और ईपीएस के वर्तमान प्रोडक्ट रेंज द्वारा भारतीय बाजार में मजबूत उपस्थिति स्थापित करने की है। वर्तमान में एलजीपीआई भारत में पॉलीस्टीरिन और एक्सपेंडेबल पॉलीस्टीरिन के अग्रणी निर्माताओं में से एक है। LGPI, सही एलजी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपनी वैल्यू एडेड सर्विसेज, प्रोडक्ट क्वालिटी, सेवा और समृद्ध ग्राहकों में उत्कृष्टता के लिए प्रतिबद्ध है।

पिछले साल टॉप 10 ग्लोबल केमिकल कंपनी में मिली थी इसे जगह

कंपनी की वेबसाइट पर कहा गया है कि एलजीपीआई में, हम पॉलीमर्स के क्षेत्र में विकास, निर्माण और सेवाओं में नेतृत्व करने का प्रयास करते हैं। हम भारत और दुनिया भर में अपने पेशेवर दृष्टिकोण और सेवाओं के माध्यम से अपने ग्राहकों के लिए मूल्य में इन प्रोडक्ट्स को प्रस्तुत करते हैं। 2019 में यह पहली कोरियन केमिकल कंपनी थी जिसने ग्लोबल टॉप 10 में एंट्री की थी। वैश्विक स्तर पर यह चौथे क्रम की सबसे मूल्यवान केमिकल कंपनी है, जिसका वैल्यूएशन 350 करोड़ डॉलर है।

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