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  • In The Country With A Population Of 130 Crores, There Was No Sale Of Any Vehicles In The Month Of April, April Will Be Remembered For Zero Sales.

ऑटो सेक्टर का रिकॉर्ड:130 करोड़ की आबादी वाले देश में पिछले महीने एक भी गाड़ियों की नहीं हुई बिक्री, जीरो सेल के लिए याद किया जाएगा अप्रैल

मुंबई2 वर्ष पहले
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अग्रणी पैसेंजर कार कंपनी मारुति सुजुकी और एमजी मोटर्स ने अप्रैल महीने में एक भी कार नहीं बेची - Dainik Bhaskar
अग्रणी पैसेंजर कार कंपनी मारुति सुजुकी और एमजी मोटर्स ने अप्रैल महीने में एक भी कार नहीं बेची
  • मई में भी इसी तरह की स्थिति बने रहने की उम्मीद
  • कमर्शियल, पैसेंजर वेहिकल और टू व्हीलर प्रभावित

ऑटो इंडस्ट्री के लिए साल 2020 का अप्रैल महीना जीरो सेल के लिए याद किया जाएगा। हालांकि यह स्थिति मई के लिए भी हो सकती है, पर अप्रैल पहले ही इसे अपने नाम कर चुका है। देश भर में ऑटो सेक्टर में कमर्शियल, पैसेंजर और टू व्हीलर में कोई बिक्री अप्रैल महीने में नहीं हुई।

मारुती सुजुकी और एमजी मोटर्स ने जीरो सेल किया

देश में पैसेंजर कारों में अग्रणी कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया और एमजी मोटर्स ने कहा है कि अप्रैल महीने में उनकी बिक्री शून्य रही है। हालांकि यह हालात केवल इन कंपनियों के लिए नहीं, बल्कि सभी कंपनियों के लिए है। बैंकों ने बताया कि वेहिकल लोन में अप्रैल महीने में क्रेडिट ग्रोथ जीरो रही है। डीलरों ने भी यही कहा है कि अप्रैल महीने में उनकी बिक्री जीरो रही है।

कमर्शियल वाहनों की भी बिक्री नहीं हुई

कमर्शियल वेहिकल के डीलर अंबिका ऑटो के कन्नू भाई मोदी कहते हैं कि मार्च महीने में मैने 279 गाड़ियां बेची थीं। लेकिन अप्रैल में एक भी नहीं बेची है। मैं कमर्शियल गाड़ी बेचता हूं। चूंकि अप्रैल से बीएस-6 आनेवाला था और इसलिए मार्च में थोड़ी ज्यादा बिक्री बीएस-4 की हुई। लेकिन अप्रैल में जब सभी गतिविधियां बंद हो गई तो गाड़ियों के लिए कोई भी डिमांड नहीं आई। उनके मुताबिक रिटेल मांग तो पूरी तरह से ठप रहने की आशंका है। एक ही उम्मीद है की सेकेंड हैंड की गाड़ियों की मांग लॉकडाउन के बाद आ सकती है।

डीलरों के पास बीएस-6 के एक भी वाहन नहीं

वे कहते हैं कि मई भी अप्रैल के जैसे ही रहेगा। क्योंकि बीएस-6 की इन्वेंटरी डीलरों के पास जीरो है। अब जब कहीं से मांग आएगी तो हम उसे कंपनी के पास भेजेंगे। फिर कंपनी उसे डिलिवरी करेगी। लेकिन जिस तरह के हालात हैं, ऐसे में नहीं लगता है कि कंस्ट्रक्शन की गतिविधियां शुरू होंगी और इन वेहिकल की मांग आएगी। वे कहते हैं कि अगर इंडस्ट्री शुरू भी हो गई तो लेबर नहीं हैं। साथ ही छोटे मोटे फ्लीट वाले तो खत्म हो जाएंगे। क्योंकि रोड टैक्स से लेकर कई तरह के खर्चे हैं जो वे वहन नहीं कर पाएंगे।

बैंकों द्वारा रिटेल लोन में ऑटो के लिए जीरो क्रेडिट ग्रोथ

बैंक ऑफ महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक मार्च में बैंक का वेहिकल लोन 36 करोड़ रुपए था, लेकिन अप्रैल में एक भी रुपए का लोन नहीं दिया गया है। इसका कारण यह है कि वेहिकल लोन के लिए कोई मांग ही नहीं आई। यही बात यस बैंक के ऑटो सेक्टर के एक अधिकारी ने कही। इस अधिकारी के मुताबिक अप्रैल में कोई बिक्री हमने नहीं की है। बल्कि पुरानी गाड़ियों के लिए हमने बीमा पॉलिसियों की बिक्री की है।

डीलर अब मई महीने को भी लेकर आशंकित

कई बैंकों के अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल में ऑटो सेक्टर के लिए कोई डिमांड कर्ज की नहीं रही है। हालांकि कंपनियों के लिए थोड़ी बहुत हुई भी होगी, लेकिन रिटेल सेल पूरी तरह से जीरो रहा है। यही नहीं, बीमा कंपनियों का भी यही कहना है कि नई गाड़ियों के लिए कोई बीमा पॉलिसी अप्रैल में जारी नहीं हुई हैं। डीलरों के मुताबिक अप्रैल तो जैसे-तैसे चल गया, लेकिन अगर यही हाल मई में रही तो इसका असर भविष्य में बहुत भयानक होगा।

लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी करना होगा इंतजार

एक डीलर ने बताया कि ऐसा कभी नहीं होता था कि किसी महीने में जीरो बिक्री रहे। लेकिन अप्रैल के बाद मई भी इसी तरह का महीना रहनेवाला है। इस डीलर के मुताबिक 4 मई से कुछ चालू होने जैसा नहीं है। अगर ग्रामीण इलाकों में थोड़ा बहुत चालू होता भी है तो पहले लोग कामकाज और उसे लाइन पर लाने की कोशिश करेंगे। ऐसा संभव नहीं है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद तुरंत शोरूम पर गाड़ियों के लिए लाइन लग जाए।

लोग जरूरी खर्चों पर फिलहाल करेंगे फोकस

दरअसल ग्राहकों के नजरिए से देखा जाए तो फिलहाल लोगों को नौकरी को बचाए रखना, भविष्य में रोजी रोटी की चिंता पहली प्रायोरिटी है। एक अध्ययन के मुताबिक जिस तरह से नौकरी जा रही है और अभी तक कोई सुनिश्चित नहीं है कि कब तक यह लॉकडाउन चलेगा, ऐसे में लोग अगले 4-6 महीने तक किसी तरह से जरूरी चीजों पर ही खर्च करेंगे। ऐसे माहौल में वाहनों की बिक्री या फ्लैट की बिक्री या इस तरह के किसी भी खर्च से लोग कुछ समय तक दूर रहेंगे।

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