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तेल कीमत बढ़ने का असर / डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से सफर महंगा होगा, माल ढुलाई बढ़ने से दवा, सब्जी समेत कई चीजों के दाम बढ़ सकते हैं

Increase in diesel prices will make transport expensive, most items including passenger fares, medicines, vegetables, fruits, grains will soon be expensive
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Increase in diesel prices will make transport expensive, most items including passenger fares, medicines, vegetables, fruits, grains will soon be expensive

  • ट्रकों के खर्चों में पहले 50 प्रतिशत खर्च डीजल पर होता था, अब यह बढ़कर 64 प्रतिशत होगा
  • डीजल की वजह से मालों की ढुलाई होगी महंगी, इससे सामानों की कीमतें बढ़नी शुरू हो जाएंगी

दैनिक भास्कर

Jun 29, 2020, 07:45 PM IST

मुंबई. डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से जल्द ही बसों, टैक्सियों के जरिए यात्रा महंगी होगी। वहीं, ट्रकों का किराया बढ़ने से दवाओं, सब्जियों, फलों, अनाजों समेत ज्यादातर चीजें भी महंगी होंगी। इस संबंध में ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने अपने सदस्यों को बता दिया है। एसोसिएशन ने सदस्यों से कहा कि डीजल की कीमतें पास ऑन करना शुरू कर दें।

ट्रकों से माल ढुलाई का बढ़ जाएगा किराया

दरअसल आम लोगों को डीजल की कीमतें बढ़ने से परेशानी इसलिए होगी, क्योंकि माल ढुलाई महंगी हो जाएगी। मान लीजिए अभी मुंबई से दिल्ली का ट्रक का किराया किसी माल के लिए 35,000 रुपए है। अब डीजल की कीमतें बढ़ने से यह किराया 39,000 रुपए हो जाएगा। यह चार हजार रुपए किराया जो बढ़ेगा, ट्रक मालिक यह किराया जिसका माल होगा उससे लेंगे। अब माल वाला आगे यह पैसा अपने माल की कीमतों में बढ़ाकर ग्राहक से वसूलेगा। इस तरह से डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर आम ग्राहक पर होगा।

एक महीने में डीजल की कीमतें 12 रुपए प्रति लीटर बढ़ीं

बता दें कि एक महीने में डीजल की कीमतों में 12 रुपए प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। सोमवार को इसकी कीमतें 80.53 रुपए पर पहुंच गई हैं। ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट मोटर कांग्रेस की कोर कमिटी के चेयरमैन बल मलकीत सिंह कहते हैं कि हमने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सदस्यों को कह दिया है कि वे कीमतों को पास ऑन करना शुरू कर दें। यानी डीजल की कीमतें जो बढ़ी हैं, वो उन लोगों से वसूली जाएंगी जिनका माल है। माल वाले फिर इसकी कीमत ग्राहकों से वसूलेंगे। इस तरह से डीजल की कीमतों का इस तरह से सीधा प्रभाव आम आदमी पर पड़ेगा।

ऑपरेशनल कॉस्ट का 65 प्रतिशत हिस्सा डीजल पर होता है खर्च

बल मलकीत सिंह ने कहा कि हमारे ऑपरेशनल कॉस्ट का 65 प्रतिशत हिस्सा डीजल में चला जाता है। डीजल की कीमत बढ़ेगी तो निश्चित तौर पर हमारे लिए यह बोझ है। लागत बढ़ेगी तो वह पास ऑन करना होगा। प्रोडक्ट में कीमतों को जोड़ा जाएगा। इसका आम लोगों पर होगा असर। ट्रांसपोर्ट सेक्टर के 20 करोड़ लोग इससे प्रभावित होंगे, पर डायरेक्ट या इनडायरेक्ट 135 करोड़ लोगों पर इसका बोझ जरूर पड़ेगा।

6 साल में 8 गुना बढ़ी एक्साइज ड्यूटी

उनके मुताबिक काम नहीं चल रहा है। बेरोजगारी है। जिनकी नौकरी है, उनकी सैलरी आधी हो चुकी है। सरकार एक जेब से निकाल रही है दूसरी जेब में डाल रही है। हमारी मांग है कि डीजल को जीएसटी में लाना चाहिए। तिमाही इसकी समीक्षा करें कि लोगों पर इसका क्या असर हो रहा है। 6 साल में डीजल पर 8 गुना एक्साइज ड्यूटी बढ़ी है। राज्य सरकार का भी वैट है। हमारी मांग है कि एक्साइज के साथ वैट को घटाया जाए।

इंडस्ट्री 50 प्रतिशत डिमांड पर चल रही है

इंडस्ट्री 50 प्रतिशत डिमांड पर चल रही है। कुछ दिनों में पास ऑन करना होगा या गाड़ी खड़ी करनी होगी। लागत को पास ऑन करने के लिए सभी सदस्यों को कह दिया है गया है। कुछ एसोसिएशन का कहना है कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर पहले से ही मजदूरों की कमी, यात्रा पर प्रतिबंध से बिजनेस में गिरावट से मुश्किल में है। डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि से यह सेक्टर बुरी तरह प्रभावित होगा।

फार्मिंग सेक्टर भी होगा प्रभावित

एक एसोसिएशन के अनुसार फार्मिंग सेक्टर पहले से ही मजदूरों की कमी का सामना कर रहा है। डीजल में बढ़ रही कीमतें किसानों को और मुश्किल में डालनेवाली हैं। किसानों के लिए दिक्कत यह है कि उनको जो मजदूर मिल रहे हैं, वे काफी महंगे मिल रहे हैं। यही नहीं, डीजल की वजह से जनरेटर्स को भी किसान बंद रख रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन के मुताबिक डीजल की कीमतों में वृद्धि से इनपुट कॉस्ट बढ़ेगी। साथ ही बिजली की कटौती से इंधन का उपयोग बढ़ा था इससे और लागत बढ़ जाएगी।

ट्रांसपोर्ट सेक्टर पहले से ही बुरे दौर से गुजर रहा है

लुधियाना ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के महासचिव जनक राज गोयल कहते हैं कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर इस समय अपने बुरे दौर से गुजर रहा है। डीजल की कीमतों से यह और बुरे दौर में पहुंच गया है। गोयल कहते हैं कि हम लुधियाना से दिल्ली के लिए 10 हजार रुपए किराया लेते हैं। इसमें से 50 प्रतिशत से ज्यादा लागत ईंधन पर खर्च होती है। हालांकि अब जब डीजल की कीमत बढ़ गई है तो यह लागत 65 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि कोविड ने पहले से ही ट्रांसपोर्ट को झटका दिया है। ऐसे में अगर डीजल की कीमतें बढ़ती रहीं तो हमारे पास बिजनेस को बंद करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।

पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि से माल ढुलाई पर ज्यादा असर नहीं 

इसी तरह बस ऑपरेटर्स भी परेशान हैं। बस ऑपरेटर्स का कहना है कि उनका एसोसिएशन लगातार मंत्रालय को पत्र लिख रहा है, लेकिन इस पर कोई अमल नहीं हो रहा है। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन का कहना है कि पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि से ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि उससे माल ढुलाई नहीं होती है। पर डीजल की कीमतों से बहुत ज्यादा फर्क पड़ रहा है। कोरोना के संकट में छोटे ट्रांसपोर्ट मालिक दूध सब्जी और फल की सप्लाई में लगे थे। इन्हें अब महंगे डीजल और पेट्रोल खरीदने पड़ रहे हैं।

दिल्ली में लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों के साथ ड्राइवर्स का भी पलायन हुआ है। डिमांड कम हुआ तो ट्रांसपोर्टर्स का 65 फीसदी काम खत्म हो गया। सिर्फ 30 फीसदी ट्रक मालिक अब पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों की मार से जूझ रहे हैं।

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