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  • IndiGo Lost Rs 871 Crore In March Quarter, Debt Increased More Than 8 Times To Rs 24,000 Crore In One Year

फाइनेंशियल रिजल्ट:इंडिगो को मार्च तिमाही में 871 करोड़ रुपए का घाटा, एक साल में कर्ज 8 गुना से ज्यादा बढ़कर 24,000 करोड़ रुपए हुआ

मुंबई5 महीने पहले
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मार्च तिमाही के अंत तक कंपनी के पास फ्री कैश रिजर्व 8,928 करोड़ रुपए था
  • दिसंबर तिमाही में कंपनी का लाभ 496 करोड़ रुपए था
  • मार्च 2019 में कंपनी का शुद्ध लाभ 589 करोड़ रुपए था

देश की अग्रणी विमानन कंपनी इंडिगो को जनवरी-मार्च तिमाही में 871 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा हुआ है। यह घाटा मुख्य रूप से कोविड-19 के कारण ट्रैवेल इंडस्ट्री के बंद होने से हुआ है। इससे एक साल पहले इसी अवधि में कंपनी को 589.6 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हुआ था। जबकि दिसंबर तिमाही में 496 करोड़ रुपए का लाभ हुआ था। उधर कंपनी पर कुल कर्ज 2,400 करोड़ से 835 प्रतिशत बढ़कर 22,719 करोड़ रुपए हो गया है।

भविष्य की वृद्धि पर कोई टिप्पणी नहीं

कंपनी ने मंगलवार को अपना वित्तीय परिणाम जारी किया। कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर लॉकडाउन शुरू होने से फ्लाइट के ऑपरेशन को बंद करना पड़ा। इसका असर दिखा है। कंपनी ने कहा कि अभी भी महामारी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, इसलिए आगे के ग्रोथ के गाइडेंस के बारे में हम कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं। हालांकि भारत में लॉकडाउन मार्च के आखिरी हफ्ते में शुरू हुआ है, इसलिए इसका सही असर जून तिमाही में कंपनियों पर दिखेगा।

मार्च तिमाही में केवल 5 नया एयरक्राफ्ट लिया

कंपनी ने मार्च तिमाही में अपने बेड़े में महज 5 एयरक्राफ्ट जोड़ा है। इसके साथ ही इसके कुल एयरक्राफ्ट की संख्या 262 हो गई है। पूरे वित्त वर्ष के दौरान इस लो कॉस्ट करियर का शुद्ध घाटा 233.7 करोड़ रुपए रहा है। हालांकि एनालिस्ट के अनुसार शुद्ध घाटा इससे ज्यादा होना था। एचएसबीसी ने 1,015 करोड़ रुपए के घाटे का अनुमान लगाया था। ऑपरेशन से रेवेन्यू मार्च तिमाही में 8,299 करोड़ रुपए रहा है। यह इसके पहले के साल की समान अवधि की तुलना से 5.27 प्रतिशत ज्यादा है।

लोड फैक्टर गिरकर 82.8 प्रतिशत हुआ

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने लिखा कि हमारा अनुमान रेवेन्यू में 11 प्रतिशत गिरावट का था। इसमें से 5 प्रतिशत पैसेंजर वोल्यूम और 6.5 प्रतिशत किराये में गिरावट की आशंका थी। एयरलाइंस का लोड फैक्टर गिरकर 82.8 प्रतिशत पर रहा है। यह एक साल पहले समान अवधि में 86 प्रतिशत था। लागत की बात करें तो एयरलाइंस का ईंधन पर खर्च 3 प्रतिशत बढ़कर 2,860 करोड़ रुपए हो गया। इसी तरह सप्लीमेंट्री रेंटल और एयरक्राफ्ट रिपेयर कॉस्ट बढ़कर 1,681 करोड़ रुपए हो गई।

मार्च तिमाही के अंत तक कंपनी के पास फ्री कैश रिजर्व 8,928 करोड़ रुपए था। एक साल पहले चौथी तिमाही में यह 6,079 करोड़ रुपए था। मार्च तिमाही के दौरान कंपनी का शेयर बीएसई पर 20 प्रतिशत गिरकर मंगलवार को 946 रुपए पर पहुंच गया था।

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