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फैमिली फर्म्स पर ISB की स्टडी:जिन फर्म्स के प्रमोटर गिरवी रखते हैं शेयर, उनके वैल्यूएशन में गिरावट आने और डूबने का खतरा ज्यादा

नई दिल्लीएक महीने पहले
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जिन फैमिली फर्म्स के प्रमोटर उधार लेने के लिए अपने शेयर गिरवी रखते हैं, उनके वैल्यूएशन में गिरावट आने और डूबने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसी कंपनियों के साथ एक दिक्कत यह भी आती है कि उनमें इनोवेशन पर जरूरत से कम निवेश किया जाता है। ये बातें इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) ने एक रिसर्च स्टडी से निकलकर सामने आई हैं।

शेयर गिरवी रखकर पूंजी जुटाना प्रमोटरों के लिए सही नहीं होता, यह धारणा गलत

ISB ने यह स्टडी कंपनी, खासतौर पर फैमिली फर्म के शेयर गिरवी रखकर प्रमोटरों या शेयरधारकों के उधार लेने के घरेलू ट्रेंड और उसके नतीजों को लेकर की है। यह स्टडी डॉ. नुपुर पवन बंग, प्रोफेसर सौगत रे, नंदिल भाटिया और प्रोफेसर कविल रामचंद्रन ने उस गलत धारणा को दूर करने के मकसद से की है कि यह तरीका आमतौर पर प्रमोटरों के लिए सही नहीं होता।

किस तरह की कंपनियां कहलाती हैं फैमिली फर्म्स?

आमतौर पर फैमिली फर्म्स उन कंपनियों को कहते हैं जिनमें मेजोरिटी स्टेक किसी एक फैमिली का होता है। ISB के मुताबिक अगर कोई कंपनी शेयरहोल्डिंग के अलावा एक और पैमाने पर खरा उतरती है, तो वह इसमें शुमार होती है। 1. 20% से ज्यादा शेयरहोल्डिंग फैमिली मेंबरों या फैमिली मेंबरों की कंपनियों के पास हो। 2. बोर्ड का चेयरमैन फैमिली मेंबर हो या बोर्ड में दो या ज्यादा फैमिली मेंबर हो। 3. कारोबार में कई पीढियां या एक पीढ़ी के कई सदस्य हों।

निवेश योजना पर फैसले लेने में गलती और उसके अति महत्वाकांक्षी होने पर दिक्कत

रिपोर्ट के मुताबिक, निवेश योजनाओं को लेकर फैसले लेने में गलती और उनके अति महत्वाकांक्षी होने के चलते प्रमोटर के शेयर रखकर पूंजी जुटाने के बाद कई फैमिली फर्म की संपत्तियां पूरी तरह बर्बाद हो गईं। ऐसे में फैमिली बिजनेस को लेकर मजबूत गवर्नेंस प्रोसेस बनाना और उसको लेकर जागरूकता फैलाना जरूरी है ताकि ज्यादा शेयर गिरवी रखने पर लगाम लगाई जा सके।

प्रमोटर लोन चुकाने की रणनीति पहले से न बनाएं तो कंपनी के वजूद पर आ सकता है संकट

स्टडी के मुताबिक, योजना अति महत्वाकांक्षी हो या जरूरत से ज्यादा शेयर गिरवी रख दिए गए हों और लोन चुकाने की रणनीति पहले से नहीं बनी हो तो कंपनी के वजूद पर संकट आ सकता है। निवेशकों को निवेश पर नजर बनाए रखने की जरूरत है। उन्हें देखना चाहिए कि उन्होंने जिन कंपनियों में निवेश किया है, क्या उनके प्रमोटरों ने शेयर गिरवी रखे हैं।

शेयरहोल्डर्स ज्यादा शेयर गिरवी न रखें, इसके लिए डायरेक्टर्स को सावधानी बरतने की जरूरत

स्टडी में यह भी कहा गया है कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को शेयरहोल्डर्स को जरूरत से ज्यादा शेयर गिरवी नहीं रखने को लेकर आगाह करते रहना चाहिए। अगर शेयरहोल्डरर्स के पास मार्जिन कॉल आती है तो उसके लिए अफरातफरी मचाए जाने पर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को कंपनी बचाने की कोशिश करनी चाहिए।

उद्यमियों के लिए अपनी संपत्ति के सहारे कारोबार को बढ़ावा देने का अच्छा तरीका

स्टडी रिपोर्ट को लेकर हुए वेबिनार में डॉ नुपुर पवन बंग ने कहा, 'शेयर गिरवी रखकर उधार लेना फैमिली प्रमोटरों के लिए पूंजी जुटाने का अहम तरीका है। यह उद्यमियों के लिए अपनी संपत्ति के सहारे कारोबार को बढ़ावा देने का भी अच्छा तरीका है। अगर फैमिली फर्म मुसीबत में है तो यह उससे उबरने का अच्छा जरिया बन सकता है। रेगुलेटरों को पॉलिसी बनाते समय इसको लेकर संतुलित रवैया अपनाने की जरूरत है।'

क्या होती है शेयर प्लेजिंग और यह कैसे दोधारी तलवार बनती है?

जब भी उद्यमी बैंक से कारोबार के विस्तार के लिए कर्ज मांगते हैं तो बैंक उनसे जमानत के तौर पर कंपनी के शेयर मांगते हैं। मिसाल के तौर पर बैंक उद्यमी से तीन गुना का कोलैटरल यानी जमानत मांग सकता है जिससे उसका लोन और उस पर बना रिस्क कवर हो जाए।

शेयरों की कीमतों में उतार-चढ़ाव आता रहता है। ऐसे में अगर वह बैंक की तरफ से तय स्तर से नीचे आ जाता है और उससे लोन रिस्क कवर नहीं होता है तो, बैंक मार्जिन कॉल करता है। वह बॉरोअर से ज्यादा शेयर मांगता है या मूलधन का कुछ हिस्सा चुकाने के लिए कहता है।

मार्जिन कॉल पर अतिरिक्त शेयर या मूलधन का एक हिस्सा नहीं मिलने पर बैंक या वित्तीय संस्थान को हक होता है कि वह गिरवी रखे शेयरों को खुले बाजार में बेच दे। मार्जिन कॉल को आमतौर पर नेगेटिव माना जाता है जो कंपनी के शेयर को लेकर बना सेंटीमेंट बिगड़ देता है।

ऐसे कई मामले हुए हैं, जिनमें प्रमोटर ने बहुत ज्यादा स्टेक गिरवी रखे गए थे और नेगेटिव सेंटीमेंट के चलते शेयरों की कीमत में गिरावट आने पर जिनके हाथों से कंपनी की कमान निकल गई। जी एंटरटेनमेंट, कैफे कॉफीडे और RADAG इसके उदाहरण हैं।

लेकिन एशियन पेंट्स, अपोलो हॉस्पिटल्स, ग्रैन्यूल्स इंडिया और लॉरस लैब्स के लिए पूंजी जुटाने का यह तरीका काफी फायदेमंद रहा है।

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