ऑटो / एल जी केमिकल ने लिथियम बैटरी के प्रोजेक्ट को स्थगित किया, भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण को लगेगा झटका

तीन वर्ष बाद भी नीति आयोग की गाइडलाइंस के बारे में स्पष्टता नहीं है तीन वर्ष बाद भी नीति आयोग की गाइडलाइंस के बारे में स्पष्टता नहीं है
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तीन वर्ष बाद भी नीति आयोग की गाइडलाइंस के बारे में स्पष्टता नहीं हैतीन वर्ष बाद भी नीति आयोग की गाइडलाइंस के बारे में स्पष्टता नहीं है

  • बैटरी की ज्यादा से ज्यादा मांग को पहले चरण में पूरा करने की योजना बनाई गई थी
  • महिंद्रा, ह्युंडई और रेनो ने कंसोर्टियम बनाकर एल.जी.को बिजनेस देने का निर्णय लिया था

दैनिक भास्कर

May 21, 2020, 07:24 PM IST

मुंबई. विश्व की अग्रणी केमिकल कंपनी एल.जी. केमिकल ने भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल लिथियम आयन बैटरी के प्रोजेक्ट को स्थगित कर दिया है। कारण यह है कि नीति आयोग द्वारा घोषित बैटरी स्टोरेज पॉलिसी में काफी कुछ स्पष्ट नहीं है। इस वजह से भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण पर झटका लग सकता है।

एल.जी. केमिकल, एल.जी. पॉलीमर्स की पैरेंट कंपनी है। एल.जी. पॉलीमर्स के प्लांट में हाल में गैस लीक होने से विशाखापट्‌टनम में 12 लोगों की मौत हो चुकी थी।

विश्व की अग्रणी बैटरी कंपनियों में है एल.जी पॉलीमर्स

बता दें कि कोविड-19 की वजह से ऑटो सेक्टर इस समय मंदी में है। ऐसा माना जा रहा था कि भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल उद्योग भविष्य में इस सेक्टर के लिए वरदान साबित होगा। लेकिन एल.जी. केमिकल के फैसले ने इस पूरे भविष्य को अंधकार में रख दिया है। गौरतलब है कि एल.जी. केमिकल्स विश्व की अग्रणी लिथियम आयन बैटरी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में से एक है।

महिंद्रा समूह के साथ की गई थी साझेदारी

साल 2018 की शुरुआत में इलेक्ट्रिक व्हीकल प्रोजेक्ट के लिए लिथियम आयन बैटरी का उत्पादन करने के लिए भारत के बड़े औद्योगिक घरानों में से एक महिंद्रा एंड महिंद्रा ने इसके साथ भागीदारी की घोषणा की थी। हालांकि बाद में प्रोजेक्ट का दायरा बढ़ाकर इसे ह्युंडई और रेनो जैसे अन्य ऑटो कंपनियों को बैटरी आपूर्ति करने का निर्णय लिया गया था। बाद में महिंद्रा, ह्युंडई और रेनो ने एक कंसोर्टियम बनाकर एल.जी. केमिकल्स को बिजनेस देने का निर्णय लिया था। साथ ही इस प्रोजेक्ट में इक्विटी भागीदार के रूप में शामिल होने की योजना बनाई थी।

50 करोड़ डॉलर का अनुमानित निवेश होना था 

एल.जी. केमिकल ने भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए लिथियम आयन बैटरी की मांग कितनी रहेगी, इसे तय करने के लिए पहले चरण में ही इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा था। इससे निवेश की योजना बनाने में आसानी थी। अनुमानित 50 करोड़ डॉलर के निवेश के साथ 2019-20 की अंतिम तिमाही में उत्पादन शुरू करने की योजना बनाई गई थी।

बैटरी स्टोरेज पॉलिसी में स्पष्टता की कमी

विश्लेषकों के मुताबिक नीति आयोग की ओर से बैटरी स्टोरेज पॉलिसी की घोषणा के बारे में अस्पष्टता होने से एल.जी. केमिकल ने इंतजार करो की नीति अपनाई थी। इसमें देरी होने से भी कंपनी ने इस प्रोजेक्ट को स्थगित करने का फैसला लिया है।बैटरी इंसेंटिव, लोकलाइजेशन में वृद्धि और आयात टैरिफ में गिरावट जैसे मामलों को लेकर स्टोरेज पॉलिसी में कोई स्पष्टता नहीं थी। ऑटो सेक्टर की संस्था सियाम के मुताबिक तीन वर्ष बाद भी इस गाइडलाइंस के बारे में स्पष्टता नहीं है।

30 प्रतिशत की दर से बढेगा ईवी बाजार

इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इलेक्ट्रिकल व्हीकल बाजार 30 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। 2026 तक 28 गीगावाट की वृद्धि देखी जाएगी। 2018 में हुई भागीदारी के तहत एल.जी. केमिकल द्वारा महिंद्रा को इलेक्ट्रिक व्हीकल के लिए लिथियम आयन की आपूर्ति करनी थी। महिंद्रा इलेक्ट्रिक के सीईओ महेश बाबू कहते हैं कि इस प्रोजेक्ट के बारे में कई बार चर्चा हुई है, लेकिन यह प्रोजेक्ट कब शुरू होगा, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

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