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विवाद:धोखाधड़ी की कानूनी देनदारी से बचने के लिए पेटीएम फाइनेंशियल अपनी खामियों को दूसरे पर शिफ्ट कर रही है- रिलायंस जियो, कोर्ट में सुनवाई 24 जून को

मुंबई2 वर्ष पहले
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विवाद के बीच रिलायंस जियो और पेटीएम ने कोर्ट का सहारा लिया है - Dainik Bhaskar
विवाद के बीच रिलायंस जियो और पेटीएम ने कोर्ट का सहारा लिया है
  • पेटीएम ने कहा कई लोग और कंपनियां पेटीएम से मिलते जुलते नाम रखे हैं
  • रिलायंस जियो ने कहा हमने शिकायतों पर तय समय में कार्रवाई की है

मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम ने अपने यूजर्स पर फिशिंग अटैक को लेकर एक्सेस प्रोवाइडर्स को कोर्ट में खींचने के लिए पेटीएम की खिंचाई की है। कंपनी ने आरोप लगाया है कि पेमेंट कंपनी अपने ऐप के जरिए होने वाली फाइनेंशियल धोखाधड़ी की कानूनी देनदारी से बचने के लिए अपनी खामियों का दोष शिफ्ट करने की कोशिश कर रही है।

जियो ने कोर्ट में दिया जवाबी हलफनामा

दिल्ली उच्च न्यायालय में पेटीएम की याचिका पर जवाबी हलफनामा कंपनी ने दिया है। इसमें जियो ने कहा कि मोबाइल फोन कंपनियों को टेलीकॉम रेगुलेटर के टेलिकॉम कमर्शियल कम्युनिकेशन कस्टमर प्रेफरेंस रेगुलेशन (TCCCPR) 2018 के अनुसार कॉल और मैसेज पर होने वाली "गैरकानूनी गतिविधि" के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। खासकर तब, जब इसका उद्देश्य पेस्की कॉल और मैसेज की जांच करना है।

वन 97 ने कोर्ट में 100 करोड़ के नुकसान की मांग के लिए डाली है याचिका

जियो ने कहा कि आईटी कानून के तहत बिचौलियों को किसी भी तीसरे पक्ष की जानकारी, डेटा या उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए या होस्ट किए गए लिंक के संबंध में कानून के तहत देनदारी से छूट दी गई है। पेटीएम की पैरेंट कंपनी वन 97 कम्युनिकेशंस ने टेलीकॉम ऑपरेटर्स वोडाफोन आइडिया, जियो, भारती एयरटेल, एमटीएनएल और बीएसएनएल के अलावा टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) और कम्युनिकेशंस मिनिस्ट्री के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें टेल्को को विभिन्न मोबाइल नेटवर्क पर फिशिंग गतिविधियों से अपने ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी करने वालों को ब्लॉक नहीं करने का दोषी ठहराया गया है।

इसने कैरियर्स की विफलता के लिए 100 करोड़ रुपए के नुकसान की भी मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 24 जून को होगी।

जियो ने कहा ट्राई को भी धोखाधड़ी पर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है

जियो ने अपने जवाब में कहा कि ट्राई को भी धोखाधड़ी पर कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। न ही वह सेवा प्रदाताओं पर इस संबंध में कोई कानूनी अड़चन थोप सकता है। जियो ने दलील दी कि आर्थिक धोखाधड़ी को रोकने की जिम्मेदारी आरबीआई के अनुसार बैंकों और वॉलेट कंपनियों जैसे पेटीएम पर है। इसके लिए उन्हें पीपीआई में लोडिंग/रीलोडिंग फंड सहित धोखाधड़ी लेनदेन की घटना को रोकने, पता लगाने और प्रतिबंधित करने की आवश्यकता है।

पेटीएम पर आरबीआई ने पहले ही की थी कार्रवाई

टेल्को ने कहा कि जून 2018 और दिसंबर 2018 में आरबीआई ने केवाईसी का पालन न करने पर पेटीएम द्वारा नए ग्राहक रजिस्ट्रेशन को अस्थायी रूप से रोक दिया था। यह भी आरोप लगाया कि आरबीआई को पेटीएम की याचिका में पार्टी नहीं बनाया गया है। क्योंकि भुगतान ऐप का पालन न करने पर आरबीआई ने उस पर कार्रवाई की थी। जियो ने आरोप लगाया कि पेटीएम जानबूझकर इस बात की अनदेखी कर रहा है कि फिशिंग घोटाले पेटीएम ऐप सहित ईमेल, वेबसाइट्स, ओटीटी चैनल्स और मोबाइल एप्स सहित कई रास्ते के जरिए किए जाते हैं।

पेटीएम की शिकायतों पर एक हफ्ते में हुई कार्रवाई

पेटीएम ने कहा था कि ऐसे लोग या संस्थाएं टेलीकॉम कंपनियों में रजिस्टर्ड हो जाती हैं और खुद को पेटीएम, PYTM, पीटीएम, IPAYTN, PYTKYC जैसे पेटीएम के ऑफिशियल हेडर से मिलते जुलते हैं। इसमें BPaytm, FPaytm, पेटीएमबी, इडेटीएम और एमपेटीएम जैसे नाम भी शामिल हैं। जियो ने यह भी दावा किया कि जिस सिंगल हेडर के खिलाफ पेटीएम ने शिकायत की थी, उसे एक सप्ताह के भीतर ब्लॉक कर दिया गया था।

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