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दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं में सुधार:मई में वर्ल्ड जीडीपी में गिरावट की दर 2.3% पर रहने का अनुमान, अप्रैल में जीडीपी में 4.8% की कमी आई थी

नई दिल्ली4 महीने पहले
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  • लॉकडाउन से तबाह वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को बचाने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं
  • आईएलओ ने कहा- अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए मिशन मोड में नौकरियां पैदा करनी होंगी

कोरोनावायरस के कारण अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान की भरपाई के लिए दुनियाभर की सरकारों ने कई कदम उठाए हैं। इसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं। लॉकडाउन के कारण अप्रैल में दुनियाभर की जीडीपी में 4.8 फीसदी की गिरावट आई थी लेकिन मई में इसमें सुधार आने का अनुमान जताया जा रहा है। मई महीने में जीडीपी ग्रोथ रेट में 2.3 फीसदी गिरावट आने का अनुमान है। यानी वर्ल्ड जीडीपी में गिरावट की दर आधी रह जाएगी। 

कोरोना महामारी के कारण पैदा हुई महामंदी से निपटने के लिए अब दुनियाभर की सरकारों और केंद्रीय बैंकों ने अपना फोकस बदलते हुए रेस्क्यू से रिकवरी की ओर रूख कर लिया है। लॉकडाउन के कारण तबाह हुई अर्थव्यवस्थाओं को बचाने के लिए अरबों डॉलर के उपाय किए जा रहे हैं। रिकवरी के लिए सरकारों ने खर्च को दोगुना कर दिया है।

वित्तीय संस्थानों-कंपनियों को दिया जा रहा सस्ता कर्ज

ड्यूश बैंक सिक्युरिटीज के मुख्य अर्थशास्त्री टॉरसेन स्लोक का कहना है कि दुनियाभर के नीति निर्माता अब अर्थव्यवस्था में रिकवरी की ओर देख रहे हैं। नीति निर्माताओं का मानना है कि नकदी संकट से निपटने के लिए हाउसहोल्ड और छोटे कारोबारों को अधिक वित्तीय मदद की आवश्यकता है। इससे उन्हें दिवालिया संकट से भी बचाया जा सकता है। इन उपायों के तहत सरकारों और केंद्रीय बैंकों की ओर से घोषित किए जा रहे प्रोत्साहन पैकेज में वित्तीय संस्थानों, बाजारों और कंपनियों को सस्ती दर पर कर्ज उपलब्ध कराया जा रहा है। 

दुनियाभर की सरकारों-केंद्रीय बैंकों की ओर से हाल में उठाए गए कदम

  • यूरोपियन केंद्रीय बैंक ने हाल ही में महामारी आपातकालीन सहायता कार्यक्रम की राशि को 672 अरब डॉलर बढ़ाकर 1.35 ट्रिलियन यूरो (1.5 ट्रिलियन डॉलर) तक कर दिया है। साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपने इस मौद्रिक प्रोत्साहन कार्यक्रम को जून 2021 तक के लिए बढ़ा दिया है।
  • जर्मनी सरकार ने 130 बिलियन यूरो के एक और प्रोत्साहन पैकेज को मंजूरी दी है। जर्मनी सरकार ने कहा है कि वह 750 बिलियन के यूरोपियन यूनियन रिकवरी फंड की स्थापना का भी प्रस्ताव पेश करेगी।
  • जापान सरकार रिकवरी में तेजी लाने के लिए 1.1 ट्रिलियन डॉलर और खर्च करने की योजना बना रही है। मई में जापान के केंद्रीय बैंक ने छोटे कारोबारों की मदद के लिए 30 ट्रिलियन येन (274 बिलियन डॉलर) का लोन कार्यक्रम शुरू करने के लिए आपातकालीन बैठक बुलाई थी।
  • चीन ने पिछले सप्ताह ही 3.6 ट्रिलियन युआन (508 बिलियन डॉलर) अतिरिक्त खर्च करने को मंजूरी दी थी।
  • दक्षिण कोरिया ने भी 63 बिलियन डॉलर के नए प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की है। यह अब तक का सबसे बड़ा पैकेज है।
  • अमेरिका के नीति निर्माता भी अतिरिक्त प्रोत्साहन पैकेज पर चर्चा कर रहा है। 10 जून को होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक में इस पर फैसला हो सकता है। हाल ही में फेडरल रिजर्व ने मेन स्ट्रीट लैंडिंग कार्यक्रम लॉन्च किया है जिसके जरिए अर्थव्यवस्था और बाजारों में अरबों डॉलर डाले गए हैं।

अमेरिका के नौकरी के आंकड़ों ने दी है राहत

हाल में जारी हुए अमेरिका के नौकरी के आंकड़ों ने कुछ राहत दी है। आंकड़ों के मुताबिक, मई में कंपनियों ने 2.5 मिलियन कामगारों को नौकरी दी है। इससे अमेरिका में बेरोजगारी दर भी गिरकर 13.3 फीसदी पर आ गई है। इन आंकड़ों से अर्थशास्त्रियों के वह दावे भी गलत साबित हो गए हैं जिनमें कोरोना के कारण नौकरियां का बड़ा नुकसान होने का अनुमान जताया गया था। नेटिक्स एसए की चीफ एशिया पेसिफिक इकोनॉमिस्ट अलीशिया ग्रोशिया हेरारो का कहना है कि वर्ष की शुरुआत में ग्रोथ को वापस लाने के लिए उठाए गए हालिया कदम काफी हैं। इसमें से कई कदम ऐसे हैं जो जल्द समाप्त होने वाली पॉलिसी की जगह ले सकते हैं।

मिशन मोड में पैदा करनी होंगी नौकरियां

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) का कहना है कि सुधारों में मजबूती लाने के लिए मिशन मोड में नौकरियां पैदा करनी होंगी। इसके लिए कंपनियों को कर्मचारियों को रिटेन करने के लिए मदद देने, पुराने कर्मचारियों को हायर करने में इंसेंटिव देने और सरकार को वेज सब्सिडी को लगातार जारी रखने की आवश्यकता होगी। आईएलओ के मुताबिक, कोरोना संकट शुरू होने के बाद प्रत्येक 6 में से 1 आदमी का काम बंद हो गया है। आईएलओ ने अप्रैल में 100 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों पर वेतन में कटौती या नौकरी खोने का खतरा होने का अनुमान जताया था। 

नौकरियां देने से ही अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा

मेबैंक किम ईएनजी रिसर्च पीटीई के सीनियर इकोनॉमिस्ट चुआ हाक बिन का कहना है कि जॉब मार्केट में तेज रिकवरी से ही अर्थव्यवस्था में सुधार होगा। इससे आय असमानता और सोशल तनाव का खतरा कम होगा। लंदन की एडवाइजरी फर्म यूरीजोन एसएलजे कैपिटल के संस्थापक स्टीफन जोन का कहना है कि नीति निर्माताओं को उपभोक्ताओं और एक्जीक्यूटिव की चिंताओं को दूर करने के लिए विश्वास पैदा करना होगा।

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