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  • Wheat Procurement From Farmers Increased By 13.7 Percent Over Last Year, Stock In Government Stores Rose To 38.83 Million Tonnes

उपलब्धि :किसानों से गेहूं खरीद पिछले साल की तुलना में 13.7 प्रतिशत बढ़ी, सरकारी भंडारों में स्टॉक बढ़कर 38.83 मिलियन टन पर पहुंचा

मुंबई16 दिन पहले
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कोविड-19 के कारण निजी व्यापारियों ने गेहूं खरीदने से परहेज किया है। इसलिए एफसीआई ज्यादा गेहूं खरीद रहा है
  • पिछले वर्ष 34.12 मिलियन टन गेहूं की खरीदी की गई थी
  • 2012 में 38.18 मिलियन टन गेहूं की खरीदी की गई थी
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देश के किसानों से नए सीजन में गेहूं की खरीद एक साल पहले की तुलना में 13.7 प्रतिशत बढ़ी है। इससे सरकारी भंडारों में स्टॉक को बढ़ावा मिला है। यह स्टॉक अब 38.83 मिलियन टन हो गया है। पिछले दस सालों से इन स्टोरेज की क्षमता पूरी होती जा रही है।

इस साल 40 से 41 मिलियन टन तक स्टोरेज होने की उम्मीद

सरकारी बयान में कहा गया है कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने राज्य द्वारा तय गारंटी मूल्य पर किसानों से रिकॉर्ड 38.83 मिलियन टन गेहूं खरीदा है। जबकि पिछले वर्ष एफसीआई ने 34.13 मिलियन टन गेहूं की खरीद की थी। सरकार के गेहूं खरीद कार्यक्रम की देखरेख करने वाले एक अधिकारी ने कहा कि अब ऐसा लग रहा है कि हम इस साल 40.5 से 41 मिलियन टन की खरीद करेंगे। 2012 में एफसीआई ने एक रिकॉर्ड 38.18 मिलियन टन गेहूं खरीदा था। हालांकि बाद में स्टॉक में गेहूं के सड़ने का पर्दाफाश हुआ था।

2007 से किसान गेहूं का ज्यादा उत्पादन कर रहे हैं

जानकारों के अनुसार यही हालत अब फिर से दोहराई जा सकती है। साल 2007 से जब से सरकार ने किसानों के गेहूं को ज्यादा मूल्य पर खरीदने का फैसला किया है तब से किसान इसका जबरदस्त उत्पादन करते आ रहे हैं। इससे गेहूं के स्टोरेज की समस्या खड़ी हो गई है। गौरतलब है की दुनिया में चीन के बाद गेहूं के उत्पादन में भारत का दूसरा स्थान है

ज्यादा पैदावार से स्टोरेज कम होते जा रहे हैं

गेहूं खरीद की इस गारंटीड कीमत ने सरकार के समक्ष दोहरी मुसीबत पैदा कर दी है। पहला तो यह कि अधिक पैदावार से इसके स्टोरेज कम पड़ते जा रहे हैं। दूसरा कि इसी पॉलिसी के चलते भारत के गेहूं की कीमत अंतरराष्ट्रीय मार्केट में 35 डॉलर से ज्यादा हो गई है। इसके चलते अब इसका निर्यात करने में भी दिक्कतें आती हैं। इस वर्ष देश में गेहूं उत्पादन 107.18 मिलियन टन तक पहुंचने की संभावना है। पिछले वर्ष 103.60 मिलियन टन गेहूं का उत्पादन हुआ था।

जून तक भंडारण क्षमता ओवरफ्लो होने की संभावना

निजी व्यापारी ज्यादातर नए कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से लॉकडाउन उपायों के कारण किसानों से गेहूं खरीदने से दूर रहे हैं। इससे एफसीआई को गेहूं की रिकॉर्ड मात्रा में खरीद करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। अगर एफसीआई इस साल 37 से 40 मिलियन टन से ज्यादा गेहूं की खरीद करता है तो जून तक उसकी भंडारण क्षमता ओवरफ्लो हो जाएगी।

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