रिपोर्ट:एनएसई की टॉप 100 कंपनियों में से 27 कंपनियां मौजूदा वेज बिल को बनाए रखने में होंगी असमर्थ-डेलॉय

मुंबई2 वर्ष पहले
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डेलॉइट के मुताबिक रिटेल, ट्रेवेल और मनोरंजन जैसे सेक्टरों में जीरो रेवेन्यू है, लेकिन परिचालन खर्च जारी है - Dainik Bhaskar
डेलॉइट के मुताबिक रिटेल, ट्रेवेल और मनोरंजन जैसे सेक्टरों में जीरो रेवेन्यू है, लेकिन परिचालन खर्च जारी है
  • लॉकडाउन के कारण कंपनियों के रेवेन्यू में आ सकती है गिरावट
  • डेलॉय ने 27 कंपनियों पर किए अध्ययन से यह निष्कर्ष निकाला

लॉकडाउन के कारण कंपनियों के रेवेन्यू में 30 प्रतिशत या उससे अधिक गिरावट आती है तो एनएसई में लिस्टेड टॉप 100 कंपनियों में से 27 कंपनियां मौजूदा वेज बिल को बनाए रखने में असमर्थ होंगी। यह बात डेलॉय के एक अध्ययन में कही गई है।

कंपनियों को वेतन भुगतान की क्षमता का मूल्यांकन करना होगा

डेलॉय के मुताबिक सभी स्तरों पर सामान्य खपत में मंदी को देखते हुए कंपनियों को वेतन का भुगतान करने की अपनी क्षमता का मूल्यांकन करना चाहिए। डेलॉय ने बाजार पूंजीकरण के मामले में एनएसई में लिस्टेड टॉप 100 कंपनियों का अध्ययन किया है। जिससे यह निष्कर्ष उसने निकाला है।

कंपनियों को या तो कैश बैलेंस में कमी करनी होगी या शॉर्ट टर्म कर्ज लेना होगा

इसमें कहा गया है कि 27 कंपनियां कम कैश प्रॉफिट से वर्तमान वेज बिल को बनाए रखने में सक्षम नहीं होंगी, अगर उनका रेवेन्यू 30 प्रतिशत या उससे अधिक गिर जाता है। यह प्रभाव वास्तव में और भी बड़ा हो जाएगा क्योंकि इन्वेंट्री और प्राप्तियों (receivables) में नकदी फंसी रह सकती है। इसमें कहा गया है कि इन कंपनियों को या तो अपने कैश बैलेंस में कमी करनी होगी या शॉर्ट टर्म में कर्ज लेना होगा।

कंपनियों का बिना नाम लिए अध्ययन में कही गई हैं बातें

कंपनियों का नाम लिए बिना अध्ययन में कहा गया है कि 27 कमजोर कंपनियों में से 11 पर 1 से अधिक के इक्विटी रेशियो का कर्ज है, जिससे सैलरी का भुगतान करने के लिए उधार लेना मुश्किल होगा। कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए 25 मार्च से लगाए गए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के चलते व्यवसायों और कारखानों को बंद कर दिया गया है। उड़ानों और ट्रेनों को निलंबित किया गया है। लोगों और वस्तुओं की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया गया है। इससे खपत में मंदी आई है और कई कंपनियों के रेवेन्यू में कमी आई है।

भारत में सबसे बड़ी कंपनियों के लिए वेतन में कटौती के आसार

इस प्रकार, भारत जैसे देश में कुछ सबसे बड़ी कंपनियों के लिए वेतन में कटौती के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। Deloitte ने कहा कि कंपनियों को वेतन का भुगतान करने की क्षमता का मूल्यांकन करना चाहिए और इसके लिए "मुआवजा लागत कवरेज अनुपात" अर्थात CCCR जैसे प्रभावी पैरामीटर का उपयोग किया जा सकता है। CCCR कंपनी के लिए टैक्स और मजदूरी अदायगी से पहले कैश प्रोफिट को देखता है।

ब्याज की लागत का भुगतान जारी रख सकती हैं कंपनियां

इसने आगे कहा, कंपनी की प्लांड कैपेक्स, डेट रिपेमेंट, अवमूल्यन परिसंपत्तियों (depreciated assets) के upgradation और वर्किंग कैपिटल आवश्यकताओं जैसे अन्य संभावित कैश कमिटमेंट को फैक्टरिंग करने के बाद भी एक टिकाऊ अनुपात कम से 1.5 या उससे अधिक होना चाहिए। रेवेन्यू में 30 प्रतिशत की गिरावट के मामले में, 1 से कम के मुआवजे की CCCR वाली 27 कंपनियां औसतन 4 महीने के लिए फिक्स्ड ओपेक्स, ब्याज और कॉम्पेनसेशन लागत का भुगतान जारी रख सकती हैं।

60 प्रतिशत कंपनियों ने 4 का सीसीसीआर दिखाया

एनएसई की टॉप 100 कंपनियों के सर्वेक्षण में 3.25 का औसत लागत मुआवजा कवरेज अनुपात (CCCR) मिला। 60 फीसदी से ज्यादा कंपनियों ने 4 का CCCR दिखाया। सेक्टर के आधार पर ब्रेकअप देते हुए डेलॉय ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों के पास औसतन 6.31 से अधिक का CCCR है। सर्विस सेक्टर 560 के औसत अनुपात के साथ दूसरे स्थान पर है। यदि एक पब्लिक सेक्टर की लॉजिस्टिक्स कंपनी को इस सेवा क्षेत्र के दायरे से बाहर ले जाया जाता है तो यह औसत तेजी से गिरकर 3.4 हो जाता है।

सोशल डिस्टेंसिंग के कारण रेवेन्यू पर अनिश्चितता के बादल

अध्ययन में कहा गया है कि सर्विस सेक्टर की कंपनियों को उच्च कवरेज अनुपात की आवश्यकता होगी क्योंकि लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के मानदंडों के कारण उनके रेवेन्यू पर अनिश्चितता के बादल मंडराते आ रहे हैं। इसने कहा कि आईटी कंपनियों का 1.51 का सबसे कम औसत है। ऑपरेटिंग कैश फ्लो का एक बड़ा हिस्सा आईटी कंपनियों के लिए मुआवजे की लागत में जाता है।

कैश प्रॉफिट कुछ तिमाहियों में तेजी से गिर सकता है

कई सेक्टरों के अध्ययन में यह पाया गया कि कैश प्रॉफिट वास्तव में वित्त वर्ष 21 की कुछ तिमाहियों की तुलना में तेजी से गिर सकता है, क्योंकि सभी जगह खपत में कमी आई है। रिटेल, ट्रेवेल और मनोरंजन जैसे सेक्टरों में जीरो रेवेन्यू है, लेकिन परिचालन खर्च जारी है जिससे नेगेटिव कैश प्रॉफिट हुआ। 100 कंपनियों में से 43 कंपनियों का औसत अनुपात 3 से नीचे है, 6 का औसत अनुपात 10 से अधिक है।

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