फ्रैंकलिन टेम्पल्टन का मामला:सेबी के एक नियम की वजह से फ्रैंकलिन टेंम्पल्टन को बंद करनी पड़ी डेट की 6 स्कीम्स-ग्लोबल सीईओ

मुंबई2 वर्ष पहले
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सेबी ने अक्टूबर 2019 में नियम लाया था जिसके अनुसार फंड स्कीम्स का 10 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अनलिस्टेड एनसीडी में निवेश नहीं कर सकते हैं - Dainik Bhaskar
सेबी ने अक्टूबर 2019 में नियम लाया था जिसके अनुसार फंड स्कीम्स का 10 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अनलिस्टेड एनसीडी में निवेश नहीं कर सकते हैं
  • कांफ्रेंस कॉल में कंपनी के सीईओ ने विश्लेषकों से की बातचीत
  • अनलिस्टेड एनसीडी में सेबी के मुताबिक कारोबार नहीं कर सकते हैं

फ्रैंकलिन टेंम्पल्टन म्यूचुअल फंड द्वारा हाल में 6 डेट स्कीम्स को बंद करने का मामला अब गरम हो गया है। कंपनी के ग्लोबल सीईओ ने आरोप लगाया है कि रेगुलेटर सेबी के एक नियम की वजह से उसे 6 डेट स्कीम्स को बंद करना पड़ा। यह नियम था कि म्यूचुअल फंड कंपनी स्कीम के कुल कॉर्पस का 10 प्रतिशत से ज्यादा अनलिस्टेड एनसीडी में नहीं लगा सकते हैं और उनमें ट्रेड भी नहीं हो सकता है।

अक्टूबर, 2019 में सेबी ने लाया था नया नियम

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2019 में मार्केट रेगुलेटर सेबी ने यह नियम लाया था। फ्रैंकलिन के सीईओ जेनिफर जॉनसन (Jennifer Johnson) ने बताया कि सेबी ने म्यूचुअल फंड हाउस के लिए यह अनिवार्य कर दिया था कि वह अपनी स्कीम के कुल फंड का 10 फीसदी से ज्यादा अनलिस्टेड नॉन-कंवर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) में नहीं लगा सकते हैं। जॉनसन ने कहा कि वे तब ये एसेट्स बेचना चाहते थे लेकिन इस नियम की वजह से खरीदार नहीं मिल पा रहे थे।

हाई यील्ड बाजार में भारत अभी काफी छोटा है

कंपनी के नतीजों के बाद एक कॉन्फ्रेंस कॉल पर जॉनसन ने बताया कि सेबी के इस नियम के बाद उनके फंड का करीब एक तिहाई हिस्सा बेकार हो गया क्योंकि सर्कुलर के बाद अनलिस्टेड NCDs में ट्रेड नहीं हो सकता था। जॉनसन ने कहा कि भारत में  एएए रेटिंग से नीचे किसी प्रोडक्ट को निवेश के लायक नहीं समझा जाता था। हाई यील्ड मार्केट भारत में अभी काफी छोटा है। हमारे पास ऐसे काफी फंड थे। असल में ये 6 फंड ही ऐसे थे जिन्होंने इस तरीके के प्राइवेट डेट में निवेश किया था।

बंद की गई 6 स्कीम्स में फंसे हैं 28,000 करोड़ रुपए

बता दें कि फ्रैंकलिन टेंम्पल्टन इंडिया ने अप्रैल में अपनी 6 डेट स्कीम्स को बंद कर दिया था। स्कीम्स के बंद होने का मतलब यह हो गया कि निवेशक न तो अपना पैसा निकाल सकते हैं और न ही निवेश कर सकते हैं। हालांकि अभी भी कंपनी निवेशकों को उनका पैसा वापस देने के लिए कह रही है। इसके लिए कंपनी या तो मैच्योरिटी का इंतजार करेगी या फिर वह इसे पहले बेचकर चुका सकती है। इसका एयूएम 28,000 करोड़ रुपए के करीब है।

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