• Hindi News
  • Business
  • Market
  • In the first two months of this fiscal, companies raised Rs 1.63 lakh crore from the bond issue in April May.

सफलता / इस वित्त वर्ष के पहले दो महीनों अप्रैल-मई में बांड इश्यू से कंपनियों ने 1.63 लाख करोड़ रुपए की जुटाई राशि

In the first two months of this fiscal, companies raised Rs 1.63 lakh crore from the bond issue in April-May.
X
In the first two months of this fiscal, companies raised Rs 1.63 lakh crore from the bond issue in April-May.

  • 2019 की तुलना में 2021 में चार गुना ज्यादा राशि जुटाई कंपनियों ने
  • बैंक कम रेटिंग हासिल करने वाली कंपनियों में निवेश से रहते हैं दूर

दैनिक भास्कर

Jun 04, 2020, 03:52 PM IST

मुंबई. लॉकडाउन से देश में कॉर्पोरेट बांड इश्यू की बाढ़ सी आ गई है। वित्त वर्ष 2021 का पहला दो महीना दशक का सबसे अच्छा महीना रहा है। इस दौरान कंपनियों ने बांड इश्यू के जरिए 1.63 लाख करोड़ रुपए की राशि जुटाई है। इससे पहले के साल की तुलना में यह राशि दोगुनी है। 2019 की तुलना में यह चार गुना राशि है।

ब्याज दर निचले स्तर पर जाने से आई बांड में तेजी

जानकारों के मुताबिक हाल में ब्याज दर निचले स्तर पर पहुंच गई है। जबकि बैंकों द्वारा दिए जाने वाले कर्ज में धीमापन आ गया है। जिन कंपनियों ने इस दौरान बांड इश्यू से राशि जुटाई है उसमें प्रमुख रूप से एचडीएफसी, लॉर्सन एंड टूब्रो समूह, पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन, टाटा ग्रुप और रिलायंस इंडस्ट्रीज का समावेश है। इन कंपनियों ने महज अप्रैल और मई के दो महीनों की अवधि में ही 1.63 लाख करोड़ रुपए की राशि जुटाई हैं।

पिछले वित्त वर्ष में 73,286 करोड़ रुपए जुटाई थीं कंपनियां

पिछले पूरे वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 73,286 करोड़ रुपए था। हालांकि पहले दो महीनों में यह राशि 44,062 करोड़ रुपए थी। आंकड़े से पता चलता है कि आर्थिक दिक्कत के समय में कंपनियों को नकदी की जरूरत होती है। विश्लेषकों के मुताबिक इस तरह का जो रुझान है, उससे यही पता चलता है। कम ब्याज दर और ज्यादा फ्लो से कंपनियां लॉकडाउन के बाद के बिजनेस की स्थिति से निपटना चाहती हैं। कंपनियां प्राइमरी बाजार से पैसा जुटाने में सफल हो रही हैं।

कई एनबीएफसी ने बेचा है बांड

एचडीबी फाइनेंशियल, एलएंडटी फाइनेंस, श्रीराम ट्रांसपोर्ट, बालाजी फाइनेंस, महिंद्रा फाइनेंस, आदित्य बिरला फाइनेंस और इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस जैसी कई एनबीएफसी ने बांड बेचा है। टॉप की रेटिंग एजेंसियों वाले कॉर्पोरेट बांड और सरकारी बांड के बीच स्प्रेड या अंतर इस समय 90 बेसिस अंक है। जबकि मार्च में यह 120 बेसिस अंक था। विश्लेषकों के मुताबिक कंपनियां भविष्य के लिए सस्ते में पैसे जुटा रही हैं। इससे बांड की बिक्री में उछाल दिख रहा है।

आरबीआई ने रेपो रेट में की थी कटौती

पिछले वित्त वर्ष के अंतिम तिमाही की अवधि में मांग दबी थी। लोकल प्राइमरी बांड सेल्स मार्च में सामान्य था, जबकि यह इसके लिए व्यस्त महीना होता है। आरबीआई द्वारा दरों में कटौती और लिक्विडिटी के लिए उठाए गए कदम ने बांड को काफी मदद किया। इस कैलेंडर साल में 27 मार्च से लेकर अब तक की अवधि में आरबीआई ने रेपो रेट में 115 बेसिस पॉइंट की कटौती की है। इससे रेपो रेट 4 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गया है।

विश्लेषकों के मुताबिक बैंक इस समय ब्रांडेड कंपनियों में निवेश करने को तैयार हैं। इसका सबसे ज्यादा लाभ उन कंपनियों को होगा जिनकी क्रेडिट रेटिंग अच्छी होगी। क्योंकि बैंक कम रेटिंग वाले डेट में निवेश से दूर रहते हैं। टॉप की रेटिंग वाली कंपनियों के पेपर्स तथा एए रेटिंग वाले पेपर्स के बीच स्प्रेड इस समय 300 बेसिस पॉइंट है जो कि मार्च महीने में 330 बेसिस पॉइंट था।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना