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  • SEBI imposes penalty of Rs 1.20 crore on two people for not complying with rules in GDRs of Bacons Industries

नियमों की अनदेखी / सेबी ने बेकॉन्स इंडस्ट्रीज के जीडीआर में नियमों का पालन नहीं करने पर दो लोगों पर 1.20 करोड़ रुपए की पेनाल्टी लगाई

सेबी ने जांच में पाया कि जीडीआर के मामले में बहुत कुछ कंपनी ने छिपाया था सेबी ने जांच में पाया कि जीडीआर के मामले में बहुत कुछ कंपनी ने छिपाया था
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सेबी ने जांच में पाया कि जीडीआर के मामले में बहुत कुछ कंपनी ने छिपाया थासेबी ने जांच में पाया कि जीडीआर के मामले में बहुत कुछ कंपनी ने छिपाया था

  • पिछले हफ्ते भी इसी मामले में 25 करोड़ रुपए की पेनाल्टी सेबी ने अलग-अलग लोगों पर लगाया था
  • 29 दिसंबर 2009 को बोर्ड ने जीडीआर को मंजूरी दी थी। कई मामलों की जानकारी नहीं दी गई

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 02:35 PM IST

मुंबई. पूंजी बाजार नियामक सेबी ने बेकॉन्स इंडस्ट्रीज पर ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसिप्ट (जीडीआर) के नियमों के उल्लंघन के मामले में दो लोगों पर 1.20 करोड़ रुपए की पेनाल्टी लगाई है। इसमें गुरमीत सिंह पर एक करोड़ रुपए और आई.एस सुखीजा पर 20 लाख रुपए का जुर्माना है। इस पेनाल्टी को नोटिस मिलने के 45 दिनों के अंदर भुगतान करना होगा। पिछले हफ्ते ही सेबी ने 25 करोड़ रुपए की पेनाल्टी इसी मामले में अलग-अलग लोगों पर लगाई थी।

2010 में बेकॉन्स ने लाया था जीडीआर

सेबी के ऑर्डर के मुताबिक बेकॉन्स ने एक जून 2010 से 30 जून 2010 के बीच जीडीआर जारी किया था। सेबी ने पाया की कंपनी ने इस मामले में स्टॉक एक्सचेंज को क्रेडिट एग्रीमेंट और अकाउंट चार्ज एग्रीमेंट के बारे में कोई खुलासा नहीं किया। साथ ही उसने जो खुलासे किए थे, उसमें भी मिसलीडिंग डिस्क्लोजर दिया था।

कंपनी ने कई मामलों की जानकारी नहीं दी

सेबी ने कहा कि जांच में यह भी पाया गया कि कंपनी ने बीएसई को यह भी नहीं बताया कि उसने औरम बैंक के साथ प्लेज एग्रीमेंट किया है और विंटेज एफजेडई से कर्ज लिया है। सेबी ने पाया कि यह प्राइस से जुड़ा हुआ संवेदनशील मामला था और इसके डिस्क्लोज करना जरूरी था। सेबी के मुताबिक बेकॉन्स ने कुल 10.54 मिलियन डॉलर के लिए यह जीडीआर जारी किया था। यह भारतीय रुपए में 50.14 करोड़ रुपए था। इस जीडीआर को लक्जमबर्ग स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट कराया गया था।

2009 में 29 दिसंबर को दी गई थी बोर्ड में मंजूरी

इसके मुताबिक 29 दिसंबर 2009 को जीडीआर को बोर्ड की मीटिंग में कंपनी ने मंजूरी दी थी। इसमें जीडीआर से 50 करोड़ रुपए जुटाने की योजना थी। कंपनी ने बीएसई को इसकी जानकारी दी थी। कंपनी की बोर्ड मीटिंग में गुरमीत सिंह, आईएस सुखजिया और चंद्रा प्रकाश आदि थे। लेकिन इसी बीच पता चला कि कंपनी ने विंटेज और औरम बैंक के साथ एक लोन एग्रीमेंट किया जो 10.54 मिलियन डॉलर के सब्सक्रिप्शन के लिए था। कंपनी के बोर्ड ने 21 फरवरी 2008 को एक रिजोल्यूशन पास किया था जिसमें उसने औरम बैंक को ऑथोराइज्ड किया था कि वह जीडीआर से मिलने वाले पैसे को लोन के एवज में उपयोग करेगा।

जीडीआर को इक्विटी शेयर में बदला गया

सेबी ने पाया कि जीडीआर को बाद में इक्विटी में बदल दिया गया और यह इक्विटी शेयर बाद में भारतीय इक्विटी बाजार में बेचे गए। जीडीआर को 17 सितंबर 2010 से 7 मार्च 2011 तक कैंसल किया गया। शेयर को बेचकर मिले पैसों को कई खातों में ट्रांसफर किया गया। सेबी ने पाया की जीडीआर का कोई उद्देश्य नहीं था और यह बस पैसे इधर से उधर करने का मामला था।

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