नॉलेज / ज्यादा रिटर्न के लिए कॉरपोरेट एफडी में कर सकते हैं निवेश, लेकिन इसमें रहता है ज्यादा जोखिम

कॉरपोरेट डिपॉजिट कंपनी द्वारा जारी की जाती है। मैच्युरिटी की अवधि 6 माह से 3 साल तक होती है कॉरपोरेट डिपॉजिट कंपनी द्वारा जारी की जाती है। मैच्युरिटी की अवधि 6 माह से 3 साल तक होती है
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कॉरपोरेट डिपॉजिट कंपनी द्वारा जारी की जाती है। मैच्युरिटी की अवधि 6 माह से 3 साल तक होती हैकॉरपोरेट डिपॉजिट कंपनी द्वारा जारी की जाती है। मैच्युरिटी की अवधि 6 माह से 3 साल तक होती है

  • RBI कंपनियों को कॉर्पोरेट एफडी के माध्यम से पैसे जुटाने की अनुमति देता है
  • कॉर्पोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट में बैंक एफडी से ज्यादा ब्याज जाता है

दैनिक भास्कर

Jun 02, 2020, 08:09 AM IST

बैंक एफडी हमारे देश में निवेश के लिए पहली पसंद मानी जाती रही है। लेकिन कई लोग अब कंपनी फिक्स्ड डिपॉजिट या कॉर्पोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट में भी निवेश कर रहे हैं। कॉर्पोरेट एफडी भी बैंक एफडी की तरह काम करती है। बैंक एफडी बैंक द्वारा जारी की जाती है। इसमें ब्याज दर औसत होती है। जोखिम कम होता है। कॉरपोरेट डिपॉजिट कंपनी द्वारा जारी की जाती है। इसमें जोखिम बैंक एफडी से अधिक होता है।


कैसे काम करती है कॉरपोरेट एफडी?
कंपनियों को बिजनस से जुड़े अलग-अलग जरूरतों के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है। वे बैंकों, इक्विटी इन्वेस्टरों या फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में पब्लिक से पैसे मांग सकती हैं। भारतीय रिजर्व बैंक इन कंपनियों को कॉर्पोरेट एफडी के माध्यम से पैसे जुटाने की अनुमति देता है। अलग-अलग कंपनियों और अलग-अलग इन्वेस्टमेंट पीरियड के आधार पर इंट्रेस्ट रेट भी अलग-अलग होता है। आम तौर पर लंबे समय के लिए ज्यादा ब्याज दर होता है।


कॉर्पोरेट एफडी पर भी मिलता है टैक्स बेनिफिट
बैंक और कंपनी डिपॉजिट पर निवेशक आयकर की जिस स्लैब में आता है उसके मुताबिक टैक्स लगता है। आयकर कानून 1961 के तहत यदि बैंक एफडी पर एक साल में ब्याज 10,000 रुपए से अधिक बनता है तो स्रोत पर टैक्स कटौती (टीडीएस) की जाती है। कंपनी एफडी में इसकी सीमा 5,000 रुपए है। 


बीच में भी निकाल सकते हैं पैसा 
बैंक एफडी की ही तरह निवेशक पेनल्टी अदाकर मैच्युरिटी से पहले एफडी से रकम निकाल सकता है। पेनल्टी की रकम मैच्युरिटी और निवेश की रकम संस्थान के मुताबिक अलग-अलग हो सकती है। बैंक एफडी की स्थिति में पेनल्टी ब्याज के 2% के बराबर होती है।


बैंक एफडी से मिलता है ज्यादा ब्याज
सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंक एफडी पर 6% तक ब्याज की पेशकश करते हैं। जबकि स्मॉल फाइनेंस बैंक 9% तक ब्याज की पेशकश करते हैं। बैंक एफडी में सीनियर सिटीजन के लिए ब्याज की दर 60 वर्ष से कम उम्र के लोगों की तुलना में अधिक होती हे। ऐसी कंपनियां जिनकी रेटिंग ऊंची होती है, वे विभिन्न अवधि की कॉरपोरेट एफडी पर 9.25% - 10.75% तक ब्याज की पेशकश करती हैं। ऐसे लोग जो नियमित आय चाहते हैं और आयकर की निचली सीमा में हैं उनके लिए फिक्स्ड डिपॉजिट एक सही ऑप्शन है।


कितनी सुरक्षित है कॉर्पोरेट एफडी
बैंक एफडी एक सुरक्षित फाइनेंशियल प्रोडक्ट माना जाता है क्योंकि इनमें रिजर्व बैंक के सख्त नियमों का पालन किया जाता है। बैंक दिवालिया होने की स्थिति में एफडी की राशि चाहे जितनी हो, एक लाख रुपए तक की राशि डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन के तहत सुरक्षित रहती है। लेकिन कॉर्पोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट पर इस तरह का कोई प्रोटेक्शन नहीं रहता है। इसका मतलब यह नहीं है कि आपका इन्वेस्टमेंट जोखिम भरा है। फिर भी आपको किसी कंपनी के कॉर्पोरेट एफडी में पैसे इन्वेस्ट करने से पहले उस कंपनी की क्रेडिट रेटिंग जरूर देख लेनी चाहिए।


कॉर्पोरेट एफडी लेते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • ऊंची ब्याज दर के साथ क्या जोखिम जुड़े हैं उस पर भी गौर कर लेना चाहिए। यदि आप जोखिम लेना चाहते हैं तो कॉरपोरेट एफडी चुन सकते हैं। 
  • ज्यादा क्रेडिट रेटिंग वाली कंपनी में ही निवेश करना चाहिए। इससे आपका पैसा सुरक्षित रहेगा।
  • अच्छी तरह देख लें कि जी कंपनी में आप निवेश कर रहे हैं उस कंपनी की बैलेंस शीट में पिछले 2-3 साल का मुनाफा दिखाई दे रहा हो।

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