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कोरोना के साइड इफेक्ट:असंगठित क्षेत्र के 160 करोड़ कामगारों के रोजगार पर संकट, दुनिया की कुल वर्कफोर्स में इनकी आधे से ज्यादा भागीदारी

नई दिल्ली2 वर्ष पहले
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  • अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने मौजूदा रोजगार संकट को तीन हफ्ते पहले के अनुमान से बड़ा बताया
  • कोरोना से 43.6 करोड़ से ज्यादा एंटरप्राइजेज, कारोबार और स्वरोजगार पर ज्यादा खतरा

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने बुधवार को कहा कि कोरोनावायरस महामारी के कारण दुनियाभर में अंसगठित क्षेत्र के 160 से ज्यादा कामगारों के रोजगार पर संकट पैदा हो गया है। आईएलओ के मुताबिक यह संख्या दुनियाभर की कुल वर्कफोर्स में आधे से ज्यादा भागीदारी रखती है। आईएलओ के डायरेक्टर जनरल गे राइडर ने ब्रीफिंग के दौरान कहा कि संगठन के तीन सप्ताह पहले के अनुमान के मुकाबले अब रोजगार संकट और इसके परिणामों के ज्यादा गहरे होने की संभावना है।

पहले 1 महीने में असंगठित क्षेत्र के 60% कामगारों की आय प्रभावित
आईएलओ के मुताबिक, पूरी दुनिया की कुल वर्फोर्स करीब 330 करोड़ है। इसमें से 200 करोड़ कामगार असंगठित क्षेत्र से जुड़े हैं। कोरोना महामारी के दौरान असंगठित क्षेत्र के लोग सामाजिक सुरक्षा की कमी, अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और वर्क फ्रॉम होम ना होने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। आईएलओ का कहना है कि कोरोना महामारी के वैश्विक स्तर पर उभरने के बाद 1 महीने में अंदर असंगठित क्षेत्र के 60 फीसदी से ज्यादा कामगारों की आय प्रभावित हुई है।

लाखों कामगारों के पास कमाई के बिना भोजन नहीं: राइडर
राइडर ने कहा कि लाखों कामगारों के कमाई नहीं होने का मतलब ना खाना, ना सुरक्षा और ना भविष्य है। इस समय दुनियाभर में लाखों कारोबार मुश्किल से सांस ले पा रहे हैं। इन कारोबारों के पास ना तो बचत है और ना ही क्रेडिट तक पहुंच है। यह विश्व के काम का असली चेहरा है। यहि हम अब इनकी मदद नहीं करेंगे तो इनका तबाह होने निश्चित है। आईएलओ का कहना है कि लंबे लॉकडाउन और ऑफिस-प्लांट में बंदी के कारण दूसरी तिमाही में वैश्विक स्तर पर काम के घंटों में सबसे बड़ी गिरावट आएगी। यह उसके तीन सप्ताह पहले के अनुमान से बड़ी गिरावट होगी। इससे मैन्युफैक्चरिंग, एकोमोडेशन एंड फूड सर्विसेज, होलसेल एंड रिटेल ट्रेड और रियल एस्टेट से जुड़ी कारोबारी गतिविधियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी।
काम के घंटों में 10.5% गिरावट का अनुमान
आईएलओ ने अनुमान जताया है कि कोरोना संकट से पहले की तिमाही के मुकाबले दूसरी तिमाही में काम के घंटों में 10.5 फीसदी की गिरावट हो सकती है। यह 30.05 करोड़ फुलटाइम नौकरी के बराबर है। इससे पहले 7 अप्रैल को आईएलओ ने अनुमान जताया था कि कोरोना के कारण वैश्विक स्तर पर 19.5 करोड़ कामगार प्रभावित होंगे और काम के घंटों में 6.7 फीसदी की गिरावट आएगी। संगठन ने कहा कि 43.6 करोड़ एंटरप्राइजेज, कारोबार और स्वरोजगार पर ज्यादा खतरा है। हालांकि अभी लंबी अवधि के परिदृश्य को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है।

कोरोना से देश और दुनिया में मौतें
देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 33,062 हो गई है। इनमें 23,546 की रिपोर्ट पॉजीटिव है। वहीं 8,437 संक्रमित ठीक हो गए हैं। देश में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 1,079 हो चुकी है। ये आंकड़े covid19india.org के अनुसार हैं। दूसरी तरफ, दुनियाभर में कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 3,219,424 हो चुकी है। इनमें 228,197 की मौत हो चुकी है। इसी दौरान 999,699 मरीज स्वस्थ भी हुए हैं। अमेरिका में कोरोना से मरने वालों की संख्या 61,656 हो चुकी है।