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सूरत के व्यापारियों के अरबों फंसे:कपड़ा निर्यातकों के 4,000 करोड़ रुपए फंसे, अफगानिस्तान के सेंट्रल बैंक ने रोका डॉलर का लेनदेन

नई दिल्ली3 महीने पहले
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सूरत के कपड़ा व्यापारी आजकल बहुत परेशान हैं। अफगानिस्तान में उनकी लगभग 4,000 करोड़ रुपए का पेमेंट फंस गया है। यह संकट वहां की सत्ता तालिबान के हाथों में आने के बाद पैदा हुआ है।

सेंट्रल बैंक ने रोकी हुई है डॉलर की सप्लाई

अफगानिस्तान के सेंट्रल बैंक ने कमर्शियल बैंकों को निर्देश दिया है कि वे कॉरपोरेट बैंक खाता धारकों को किसी भी मकसद से रकम निकालने या देश-विदेश में लेन-देन के लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन करने की इजाजत न दें।

अटका हुआ है 4,000 करोड़ रुपए का पेमेंट

फेडरेशन ऑफ सूरत टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी चंपालाल बोथरा ने कहा, 'हम पहले कपड़े दुबई के रास्ते अफगानिस्तान भेजते थे। हमने देखा कि बांग्लादेश से निर्यात सस्ता पड़ रहा है तो हम बांग्लादेश के जरिए वहां माल भेजने लगे। निर्यात फिलहाल रुक गया है। पेमेंट कब मिलेगा, नहीं पता। 4,000 करोड़ रुपए अटके हुए हैं।'

आयातक-निर्यातक करें थोड़ा इंतजार- FIEO

वहां भारत से कपड़ों के अलावा पगड़ियों के लिए सिल्क और स्कार्फ, ड्रेस और काफ्तान जैसे रेडीमेड गारमेंट भेजा जाता रहा है। गौरतलब है कि आयातकों और निर्यातकों को फेडरेशन ऑफ इंडिया एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) ने इंतजार करने के लिए कहा है।

डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई है अफगानी करेंसी

FIEO के डायरेक्टर जनरल अजय सहाय के मुताबिक, 'पिछले एक हफ्ते में अफगानी करेंसी की कीमत डॉलर के मुकाबले कमजोर हुई है। हफ्ते भर पहले एक डॉलर की कीमत 80 अफगानी (अफगानिस्तान की करेंसी) थी जो अब 87 अफगानी हो गई। यह निर्यातकों के लिए अच्छी खबर है लेकिन इससे आयातकों पर मार पड़ रही है।'

उन्होंने कहा, 'अफगानिस्तान के कारोबारियों ने बताया है कि वहां का सेंट्रल बैंक लोकल बैंकों को पर्याप्त डॉलर मुहैया नहीं करा रहा है। इसका मतलब वहां के कारोबारी निर्यातकों का पेमेंट नहीं कर पाएंगे।'

दुर्गा पूजा, नवरात्रि और दिवाली में सेल्स बढ़ने की उम्मीद

सूरत के कपड़ा कारोबार की हालत कोविड-19 के चलते पहले से ही पस्त है। बोथरा ने बताया कि ज्यादातर मिलों में 60-70% कैपेसिटी पर उत्पादन हो रहा है। डिमांड पूरी तरह रिकवर नहीं हुई है। दूसरी लहर में हुए लॉकडाउन और दूसरी पाबंदियों के चलते अप्रैल से सेल्स घटी। दुर्गा पूजा, नवरात्रि और दिवाली के मौके पर बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।'

सूरत के टेक्सटाइल ट्रेड में लगे हैं लगभग 11 लाख लोग

सूरत में 380 कपड़ा मिलें, 650,000 लूम, 65,000 ट्रेडर और 100,000 एंब्रायडरी यूनिटें हैं। इनमें लगभग 11 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। बोथरा के मुताबिक, 'यहां ज्यादातर प्रवासी मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और उड़ीसा के हैं। कोविड के बाद से लगभग 30% प्रवासी मजदूर लौटे नहीं हैं।'

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