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त्योहारी सीजन में भी बेरोजगारी बढ़ी:अक्टूबर में 54.6 लाख लोगों की गई नौकरी, गांवों में ज्यादा असर दिखा

मुंबईएक वर्ष पहले
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अक्टूबर महीने में देश में 54.6 लाख लोगों की नौकरी चली गई। यह हालात तब है, जब त्योहारी सीजन है। आर्थिक रिकवरी है और अच्छा खासा सेंटीमेंट बाजार का है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) ने यह आंकड़ा जारी किया है।

लेबर मार्केट में तनाव बना हुआ है

CMIE ने बताया कि लेबर मार्केट में लगातार तनाव बना हुआ है। हालांकि जॉब मार्केट दूसरी ओर उत्साह से भरा हुआ है। रोजगार के आंकड़े पर जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर में देश में 400.77 मिलियन लोगों के पास रोजगार था। सितंबर में 406.24 मिलियन लोगों के पास रोजगार था।रिपोर्ट में कहा गया है कि महीने के आधार पर नेशनल लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट सितंबर में 40.66% था जो अक्टूबर में घटकर 40.41% हो गया। अगस्त में यह 40.52% था। रिपोर्ट में शहरी क्षेत्रों में हालात अच्छे बताए गए हैं, पर गावों में रोजगार की हालत बहुत ही खराब है।

आर्थिक गतिविधियों में तेजी, पर बेरोजगारी में भी तेजी

कोरोना के बीच आर्थिक गतिविधियों में तेजी भले है, लेकिन सरकार को अभी भी रोजगार के मोर्चे पर अच्छी खबर नहीं मिल पा रही है। वैसे मासिक आधार पर अक्टूबर में शहरों में बेरोजगारी दर 1.24% घटी है, पर इसी महीने में गांवों में काम की कमी के चलते बेरोजगारी दर बढ़ गई है। गांवों में बेरोजगारी दर 1.75% बढ़ी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की बेरोजगारी दर अक्टूबर महीने में 7.75% बढ़ गई जो कि एक महीने पहले 6.87% थी।

शहरों में तीन महीने के निचले स्तर पर बेरोजगारी दर

शहरों में बेरोजगारी बढ़ने की दर तीन महीने के निचले स्तर पर 7.38% पर पहुंच गई है और गांवों में यह 4 महीने के ऊंचे स्तर 7.91% पर पहुंच गई है। अगस्त के मुकाबले सितंबर महीने में बेरोजगारी दर 1.46% गिर कर 6.86% पर आ गई थी। इस दौरान करीबन 85 लाख रोजगार के मौके बढ़े। सितंबर महीने में 40.62 करोड़ लोगों के पास रोजगार था। मार्च 2020 के बाद से यह सबसे अधिक था। कोरोना के पहले की तुलना में हालांकि यह अभी भी इसलिए कम है क्योंकि तब 40.89 करोड़ लोगों के पास रोजगार था।

त्योहारी सीजन में रोजगार बढ़ने का अनुमान था

वैसे यह अनुमान था कि त्योहारी सीजन में रोजगार बढ़ सकते हैं। CMIE ने ही ऐसा अनुमान लगाया था। इसमें खासकर रिटेल इंडस्ट्री में रोजगार ज्यादा होने के अवसर थे लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। बेरोजगारी के आंकड़े देखें तो जनवरी में पूरे भारत में यह 6.52% था। उस समय गांवों में 5.81 और शहरों में 8.09% बेरोजगारी रेट था। गांवों की हालत हर समय दयनीय होती गई है और मई 2021 में यह आंकड़ा 10.55% पर पहुंच गया था। हालांकि बाद में इसमें गिरावट आती गई।