पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Business
  • 8 10% Growth Is Necessary For The Economy To Reach The Pre Covid Condition, It Is Difficult To Tell The Time Of Full Recovery

इकोनॉमिक इंडिकेटर्स में V शेप रिकवरी:कोविड से पहले वाली हालत में पहुंचने के लिए 8-10% की ग्रोथ जरूरी, फुल रिकवरी का समय बताना अभी मुश्किल

मुंबई2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

भारत की अर्थव्यवस्था कोविड से पहले वाले स्तर पर पहुंच सकती है, लेकिन कब, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। इसके साथ ही जानकारों का यह भी कहना है कि ऐसा भी तभी हो पाएगा, जब GDP ग्रोथ 8-10% के दायरे में रहेगी। जानकार यह बात इसलिए कह पा रहे हैं, क्योंकि बहुत से इकोनॉमिक इंडिकेटर महामारी से पहले वाली स्थिति में आ गए हैं।

RBI ने GDP ग्रोथ रेट का अनुमान 10.5% से घटाकर 9.5% किया

रिजर्व बैंक ने पिछले महीने इस वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ रेट का अनुमान 10.5% से घटाकर 9.5% कर दिया था। इधर, बुधवार को इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड यानी IMF ने इतनी (9.5%) ग्रोथ होने की बात कही थी। लेकिन, उसने मार्च 2022 में खत्म होने वाले साल के लिए पहले 12.5% ग्रोथ रेट का अनुमान दिया था। मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रह्मणियन ने हाल ही में कहा था कि GDP ग्रोथ 10.5% के RBI के अनुमान से ज्यादा कम नहीं रहेगी।

ग्रोथ अनुमान जितना रहा, तो FY 2021 में हुए GDP लॉस की भरपाई हो जाएगी

SBI के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर सौम्य कांति घोष कहते हैं, 'ग्रोथ अनुमान 10.4% जितना रहा, तो वित्त वर्ष 2021 में हुए जीडीपी लॉस की भरपाई हो जाएगी। लेकिन बड़ा सवाल यह उठता है कि महामारी के चलते जीडीपी में कितना लॉस परमानेंट है और GDP को कोविड से पहले वाले लेवल पर आने में कितना समय लगेगा।

FY23 में ग्रोथ 6.5% से 7% रह सकती है, फिर 7 से 7.5% के बीच रहने का अनुमान

चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर सुब्रह्मण्यन ने कहा था कि कई इंडिकेटर इकोनॉमिक एक्टिविटीज में V शेप में रिकवरी होने के संकेत दे रहे हैं। यानी कोविड के चलते हुए लॉकडाउन की वजह से इकोनॉमी जितनी तेजी से गिरी थी, उतनी ही तेजी से उठ भी रही है। उनके मुताबिक, कोविड के दौरान सिर्फ भारत ही ऐसा देश था, जिसकी इकोनॉमी लगातार दो तिमाही बढ़ी थी। उन्होंने यह भी कहा था कि वित्त वर्ष 2023 में ग्रोथ 6.5% से 7% रह सकती है। फिर उसके 7 से 7.5% के बीच रहने का अनुमान है।

इस वित्त वर्ष फिस्कल डेफिसिट का टारगेट 6.8% रह सकता है: सुब्रह्मण्यन

सुब्रह्मण्यन ने यह भी कहा है कि महंगाई जुलाई में 6% से नीचे रहेगी लेकिन कुछ समय के लिए 5% से ऊपर बनी रह सकती है। उन्होंने कहा कि कुछ मोर्चों पर खर्च बढ़ा है, लेकिन सरकार इस साल के बजट के हिसाब से आगे बढ़ेगी। उनके मुताबिक इस वित्त वर्ष फिस्कल डेफिसिट का टारगेट 6.8% रह सकता है। उन्होंने यह भी कहा है कि महामारी से असंगठित क्षेत्र पर ज्यादा दबाव बना है।

खबरें और भी हैं...