अमेजन के पक्ष में फैसला:सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत ने रिलायंस-फ्यूचर डील पर रोक लगाई, अगस्त में हुआ था सौदा

नई दिल्लीएक वर्ष पहले
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अमेजन का आरोप है कि फ्यूचर ग्रुप ने रिलायंस के साथ सौदा करके समझौते का उल्लंघन किया है। - Dainik Bhaskar
अमेजन का आरोप है कि फ्यूचर ग्रुप ने रिलायंस के साथ सौदा करके समझौते का उल्लंघन किया है।
  • अदालत ने कहा- अंतिम फैसला आने तक नहीं हो सकता सौदा
  • 3 सदस्यीय मध्यस्थता अदालत 90 दिन में देगी अंतिम फैसला
  • रिलायंस-फ्यूचर ग्रुप के बीच 24,713 करोड़ रु. में हुआ है सौदा

सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत ने रिलायंस-फ्यूचर ग्रुप की डील में अमेजन को अंतरिम राहत दी है। इस मामले के एकमात्र मध्यस्थ वीके राजा ने रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप के बीच हुई डील पर रोक लगा दी है। 24,713 करोड़ रुपए की यह डील अगस्त में हुई थी। रिलायंस और फ्यूचर ग्रुप का कहना है कि यह सौदा भारतीय कानूनों के तहत हुआ है।

अमेजन ने खटखटाया था मध्यस्थता अदालत का दरवाजा

अगस्त 2019 में अमेजन ने फ्यूचर कूपंस में 49% हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके लिए अमेजन ने 1,500 करोड़ रुपए का पेमेंट किया था। इस डील में शर्त थी कि अमेजन को तीन से 10 साल की अवधि के बाद फ्यूचर रिटेल लिमिटेड की हिस्सेदारी खरीदने का अधिकार होगा। इस दौरान किशोर बियानी ने फ्यूचर ग्रुप के खुदरा स्टोर, होलसेल और लॉजिस्टिक्स कारोबार को रिलायंस को बेचने का सौदा कर लिया। इसी के खिलाफ अमेजन ने मध्यस्थता अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

अंतिम फैसले से साफ होगी स्थिति

मध्यस्थता अदालत के एकमात्र मध्यस्थ वीके राजा ने फिलहाल इस सौदे को रोकने के लिए कहा है। राजा का कहना है कि जब तक इस मामले में मध्यस्थ का अंतिम फैसला नहीं आ जाता है, तब तक यह सौदा पूरा नहीं हो सकता है। अमेजन के प्रवक्ता ने मध्यस्थता अदालत के फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि फ्यूचर ग्रुप ने रिलायंस के साथ डील करके करार का उल्लंघन किया है।

3 सदस्यीय पीठ 90 दिनों में करेगी फैसला

अब इस मामले में अंतिम फैसला करने के लिए तीन सदस्यीय मध्यस्थता पीठ का गठन किया जाएगा। यह पीठ 90 दिनों में अंतिम निर्णय लेगी। इस पीठ में फ्यूचर और अमेजन की ओर से एक-एक नामित सदस्य होंगे। एक सदस्य तटस्थ होगा।

कानून के तहत शुरू की अधिग्रहण प्रक्रिया: रिलायंस

उधर, रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड (RRVL) ने कहा है कि उन्हें मध्यस्थता अदालत के फैसले की जानकारी मिल गई है। कंपनी ने कहा कि RRVL ने उचित कानूनी सलाह के बाद ही फ्यूचर रिटेल की संपत्ति और कारोबार के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की है। यह भारतीय कानून के तहत की जा रही है। वहीं फ्यूचर ग्रुप का कहना है कि रिलायंस के साथ सौदा भारतीय कानूनों के तहत हुआ है। इसका अमेजन के साथ हुआ समझौते से कोई लेना-देना नहीं है। फ्यूचर ग्रुप ने संकेत दिया है कि वह इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है।

भारत में पकड़ मजबूत करना चाहती है अमेजन

रिलायंस की नजर भारत में ऑनलाइन रिटेल स्पेस पर है, जिसे अमेजन और फ्लिपकार्ट लीड कर रहे हैं। वहीं, अमेजन भारत में मजबूत ऑनलाइन मौजूदगी के चलते ऑफलाइन रिटेल बिजनेस में अपनी पकड़ मजबूत करने पर काम कर रही है। इसके लिए अमेजन ने प्राइवेट इक्विटी फंड समारा कैपिटल के साथ 2018 में आदित्य बिरला ग्रुप के सुपरमार्केट चेन का अधिग्रहण किया था। जानकारों का कहना है कि अमेजन, आरआईएल और फ्यूचर ग्रुप के बीच हुए इस डील चिंतित हुई है। क्योंकि इससे भारत में कंपनी को कड़ी टक्कर मिल सकती है।

रिटेल में बड़ा दांव खेल रही है रिलायंस

इस समय रिलायंस रिटेल देश में करीब 12 हजार स्टोर चलाती है और मुकेश अंबानी रिटेल पर बड़ा दांव खेल रहे हैं। रिलायंस रिटेल का इक्विटी वैल्यूएशन इस समय 4.28 लाख करोड़ रुपए है। इसमें लगातार हिस्सेदारी बेची जा रही है। अब तक करीबन 8 कंपनियों ने इसमें पैसे लगाए हैं। इसकी हिस्सेदारी बेचकर मुकेश अंबानी अब तक 37 हजार करोड़ रुपए जुटा चुके हैं। रिलायंस रिटेल, जियोमार्ट के साथ डिजिटल डिलिवरी भी कर रही है।

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