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विरोध / अमेरिका डेटा लोकलाइजेशन के खिलाफ, कहा- भारत इस पर फिर से विचार करे



America wants to prohibit data localisation top official of US says
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America wants to prohibit data localisation top official of US says

  • आरबीआई के निर्देशों के मुताबिक पेमेंट से जुड़ा डेटा भारत में स्टोर करना जरूरी
  • विदेशी कंपनियों को 15 अक्टूबर से आरबीआई के नियमों की पालना करनी पड़ेगी
  • अमेरिकी फाइनेंशियल कंपनियां डेटा लोकलाइजेशन पॉलिसी का विरोध कर रही हैं
  • वीजा, मास्टरकार्ड, पेपल जैसी अमेरिकी कंपनियों के भारत में सर्वर नहीं

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 02:30 PM IST

वॉशिंगटन. आरबीआई के निर्देशों के मुताबिक विदेशी कंपनियों को भुगतान से जुड़ा डेटा 15 अक्टूबर से भारत में ही स्टोर करना पड़ेगा। लेकिन, अमेरिका ऐसा नहीं चाहता। वहां के डिप्टी ट्रे़ड रिप्रजेंटेटिव डेनिस शिया ने शुक्रवार को कहा कि इन्फॉर्मेशन का फ्री फ्लो सुनिश्चित करने के लिए हम डेटा का लोकलाइजेशन नहीं चाहते। शिया ने कहा कि ऐसा करने वाले देशों को फिर से सोचना चाहिए।

कंपनियों पर बोझ बढ़ेगा- अमेरिका

  1. ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका की फाइनेंशियल कंपनियों की शिकायत के बाद वहां के अधिकारियों ने डेटा लोकलाइजेशन पर आपत्ति जताई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सलाहकार एंडी सुराबियन ने कहा कि डेटा लोकलाइजेशन की वजह से अमेरिकी कंपनियों पर बोझ बढ़ेगा।

  2. सुराबियन ने कहा कि अमेरिका कई सालों से भारत को आर्थिक मदद दे रहा है। इसके बावजूद डेटा लोकलाइजेशन जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। ट्रम्प प्रशासन को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।

  3. मोबाइल मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप ने पिछले दिनों कहा कि वह आरबीआई के निर्देश मानेगा। उसने पेमेंट संबंधी डेटा भारत में स्टोर करने का सिस्टम तैयार कर लिया है।

  4. आरबीआई ने अप्रैल में सर्कुलर जारी कर कहा था कि जिन कंपनियों का सर्वर विदेश में है उन्हें पेमेंट सिस्टम से जुड़ा डेटा भारत में ही स्टोर करना होगा।

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