शेयरहोल्डर्स से मांगी मंजूरी:रुचि सोया के बोर्ड में डायरेक्टर बनेंगे योग गुरु बाबा रामदेव, छोटे भाई राम भरत बनेंगे मैनेजिंग डायरेक्टर

नई दिल्लीएक वर्ष पहले
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इस खरीदारी से पतंजलि को रुचि सोया के खाद्य तेल प्लांट और इसके महाकोष-रुचि गोल्ड जैसे सोयाबीन ब्रांड के अधिग्रहण में मदद मिली है। - Dainik Bhaskar
इस खरीदारी से पतंजलि को रुचि सोया के खाद्य तेल प्लांट और इसके महाकोष-रुचि गोल्ड जैसे सोयाबीन ब्रांड के अधिग्रहण में मदद मिली है।
  • पतंजलि ग्रुप ने पिछले साल ही किया था रुचि सोया का अधिग्रहण
  • आचार्य बालकृष्ण को फिर से रुचि सोया का चेयरमैन बनाया गया

योग गुरु बाबा रामदेव, उनके छोटे भाई राम भरत और आचार्य बालकृष्ण खाद्य तेल बनाने वाली कंपनी रुचि सोया के बोर्ड में शामिल होंगे। पतंजलि आयुर्वेद ने हाल ही में रुचि सोया का अधिग्रहण किया था। रुचि सोया इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने शेयरहोल्डर्स को एक नोटिस भेजकर राम भरत की कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) पद पर नियुक्ति की मंजूरी मांगी है।

नोटिस में कहा- नए मैनेजमेंट को बोर्ड नियुक्त करने का अधिकार मिला

पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड, दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट, पतंजलि परिवहन प्राइवेट लिमिटेड और पतंजलि ग्रामोद्योग के कंसोर्टियम ने पिछले साल दिवालिया प्रक्रिया के जरिए रुचि सोया का अधिग्रहण किया था। नोटिस में रुचि सोया ने कहा है कि नए मैनेजमेंट को बोर्ड नियुक्त करने का अधिकार मिल गया है। नोटिस के मुताबिक, 19 अगस्त 2020 को हुई कंपनी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में राम भरत को मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया था। यह नियुक्ति 19 अगस्त 2020 से 17 दिसंबर 2022 तक के लिए हुई थी। उनके होल-टाइम डायरेक्टर के पद को बदलकर मैनेजिंग डायरेक्टर किया गया था। अब उनकी नियुक्ति को शेयरहोल्डर्स की मंजूरी मांगी जा रही है।

राम भरत को 1 रुपए वार्षिक सैलरी मिलेगी

नोटिस के मुताबिक, मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर राम भरत को 1 रुपए प्रति वर्ष सैलरी दी जाएगी। इसके अलावा आचार्य बालकृष्ण की कंपनी के चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति की गई है। उनको भी 1 रुपए प्रति वर्ष की सैलरी दी जाएगी। नोटिस में बाबा रामदेव को कंपनी के बोर्ड में डायरेक्टर पद पर नियुक्त करने के लिए मंजूरी मांगी गई है। इसके अलावा गिरिश कुमार आहुजा, ज्ञान सुधा मिश्रा और तेजेंद्र मोहन भषीन की कंपनी में स्वतंत्र डायरेक्टर के पद पर नियुक्ति के लिए मंजूरी मांगी है।

4350 करोड़ रुपए में किया था अधिग्रहण

पिछले साल बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद में 4350 करोड़ रुपए में रुचि सोया का अधिग्रहण किया था। इससे पतंजलि को रुचि सोया के खाद्य तेल प्लांट और इसके महाकोष-रुचि गोल्ड जैसे सोयाबीन ब्रांड के अधिग्रहण में मदद मिली है। दिसंबर 2017 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने लोन की रिकवरी के लिए रुचि सोया के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था।

पतंजलि ने अडानी ग्रुप को मात देकर खरीदी थी रुचि सोया

पतंजलि ग्रुप ने 4350 करोड़ रुपए में से 4235 करोड़ रुपए का भुगतान क्रेडिटर्स को करने जबकि 115 करोड़ रुपए कैपिटल एक्सपेंडिचर और रुचि सोया की वर्किंग कैपिटल की आवश्यकताओं पर खर्च करने का ऑफर दिया था। पतंजलि ने अडानी विल्मर को मात देकर रुचि सोया की खरीदारी की थी। अडानी विल्मर खाद्य तेल ब्रांड फॉरच्यून ब्रांड की पैरेंट कंपनी है।

FPO के जरिए रुचि सोया में से हिस्सेदारी घटाएंगे प्रमोटर

पतंजलि ग्रुप फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO) के जरिए रुचि सोया में से अपनी हिस्सेदारी घटाएगा। कंपनी का कहना है कि सेबी के नियमों के मुताबिक प्रमोटर्स को 10% हिस्सेदारी जून 2021 तक और 25% हिस्सेदारी 36 महीनों में कम करनी होगी। वर्तमान में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 98.90% और पब्लिक की हिस्सेदारी 1.10% है। जबकि मार्केट रेगुलेटर सेबी के नियमों के मुताबिक कंपनी में कम से कम 25% हिस्सेदारी पब्लिक की होनी चाहिए।