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बैंकों के प्राइवेटाइजेशन के विरोध में प्रदर्शन:बैंक यूनियंस ने प्रमुख शहरों में धरना-प्रदर्शन किया, अगले महीने निकालेंगे संसद मार्च

नई दिल्ली3 महीने पहले
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस महीने के शुरू में आम बजट पेश करते हुए दो सरकारी बैंकों के निजीकरण की योजना की घोषणा की थी - Dainik Bhaskar
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस महीने के शुरू में आम बजट पेश करते हुए दो सरकारी बैंकों के निजीकरण की योजना की घोषणा की थी
  • युनाइटेड फोरम ऑफ यूनियंस के बैनर तले करीब 10 लाख बैंककर्मियों और अधिकारियों ने सरकार के प्रस्ताव के विरोध में प्रदर्शन किया
  • युनाइटेड फोरम ऑफ यूनियंस में नौ यूनियंस शामिल हैं, ये हैं AIBEA, AIBOC, NCBE, AIBOA, BEFI, INBEF, INBOC, NOBW और NOBO

सरकार की निजीकरण योजना के विरोध में बैंक यूनियंस ने शुक्रवार को देश के सभी राज्यों की राजधानियों में धरना प्रदर्शन किया। यदि उनकी मांग नहीं मानी गई, तो वे मार्च में संसद के लिए मार्च निकालेंगे। यह बात ऑल इंडिया बैंक इंप्लॉईज एसोसिएशन (AIBEA) ने कही।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस महीने के शुरू में आम बजट पेश करते हुए दो सरकारी बैंकों के निजीकरण की योजना की घोषणा की थी। AIBEA ने कहा कि युनाइटेड फोरम ऑफ यूनियंस के बैनर तले करीब 10 लाख बैंककर्मी और अधिकारीगण सरकार के प्रस्ताव के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। युनाइटेड फोरम ऑफ यूनियंस में नौ यूनियंस शामिल हैं। ये यूनियंस हैं AIBEA, AIBOC, NCBE, AIBOA, BEFI, INBEF, INBOC, NOBW और NOBO।

10 मार्च को संसद के सामने धरना-प्रदर्शन की है योजना

AIBEA ने कहा कि शुक्रवार के धरना के बाद बैंक युनियंस देशभर में अगले 15 दिनों में प्रदर्शन करेंगे। 10 मार्च को हम बजट सत्र के दौरान संसद के सामने धरना प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद 15 और 16 मार्च 2021 को बैंकों के 10 लाख कर्मचारी और अधिकारी लगातार दो दिनों तक हड़ताल करेंगे।

अनिश्चितकालीन हड़ताल की भी योजना

संगठन ने कहा कि यदि सरकार निजीकरण की योजना पर और आगे बढ़ी, तो हम अपना प्रदर्शन तेज करेंगे और लंबी अवधि का और अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे। हमारी मांग है कि सरकार अपने फैसले पर फिर से विचार करे। युनियन ने कहा कि देश के आजाद होने के बाद कोई भी निजी बैंक देश के आर्थिक विकास के लिए आगे नहीं आया। इसके कारण 1969 में प्रमुख निजी बैंकों का सरकारीकरण करना पड़ा।

बैंकों का सरकारीकरण के बाद शाखाओं की संख्या 8,000 से बढ़कर 1 लाख हुईं

तब से अब तक बैंकों ने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 1969 में बैंकों की सिर्फ 8,000 शाखाएं थीं। आज देशभर में एक लाख शाखाएं हैं। इनमें से बहुत सी शाखाएं ग्रामीण इलाकों में हैं। AIBEA ने कहा कि 2010 से 2020 के बीच सरकारी बैंकों ने कुल 14,57,000 करोड़ रुपए का प्रॉफिट हासिल किया है।

बैड लोन बैंकों की एकमात्र समस्या

AIBEA के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा कि बैंकों की एकमात्र समस्या है बैड लोन। अधिकांश बैड लोन कंपनियों और धनी उद्योगपतियों के हैं। उन पर कार्रवाई न कर सरकार बैंकों का निजीकरण करना चाहती है और उनके हाथों में सौंप देना चाहती है।

निजी बैंक भी समस्या से मुक्त नहीं

युनियन ने निजी सेक्टर के बैंकों के बारे में कहा कि उनमें से कई बैंक डूब चुके हैं। पिछले साल यस बैंक संकट में फंस गया था। हाल में लक्ष्मी विलास बैंक को एक विदेशी बैंक ने खरीद लिया। AIBEA ने कहा कि हमने ICICI बैंक में संकट देखा है। इसलिए यह नहीं माना जा सकता है कि निजी बैंक ज्यादा सक्षम होते हैं। सिर्फ सरकारी बैंक ही आम लोगों को, कृषि सेक्टर को और लघु उद्योगों को लोन देते हैं। निजी बैंक सिर्फ कॉरपोरेट सेक्टर को लोन देते हैं।

बैंकों में आम लोगों के कुल 146 लाख करोड़ रुपए जमा

वेंकटचलम ने कहा कि बैंकों में कुल 146 लाख करोड़ रुपए जमा हैं, जो आम लोगों की मेहनत की कमाई है। हम प्राइवेट सेक्टर के लोगों को आम लोगों की बचत से खेलने नहीं दे सकते। यदि सरकार देश के आर्थिक विकास को लेकर गंभीर है, तो उसे सरकारी बैंकों को मजबूत करना चाहिए।

3 साल में सरकारी बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 पर आई

2019 में सरकार ने IDBI बैंक का नियंत्रण LIC के हाथ में दे दिया। 2020 में 10 सरकारी बैंकों को मिलाकर बड़े आकार के 6 बैंक बनाए गए। 2017 में देश में 27 सरकारी बैंक थे। आज इनकी संख्या घटकर 12 रह गई है।

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