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गांव के जरिए कमाई पर फोकस:3.61 लाख गांव में इंटरनेट पहुंचाने के लिए 40 कंपनियां रेस में, रिलायंस, टाटा, एलएंडटी प्रमुख दावेदार

मुंबई2 महीने पहले
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  • सरकार ने भारतनेट प्रोग्राम को 9 जोन में बांटा है
  • पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए 1,206 करोड़ रुपए मंजूर हैं

देश के गांवों में इंटरनेट पहुंचाने के लिए 40 दिग्गज कंपनियां मैदान में आमने-सामने आ गई हैं। हालांकि इसमें अंतिम फैसला सरकार का होगा। सरकार के भारतनेट प्रोग्राम के लिए इन कंपनियों ने अपनी दिलचस्पी दिखाई है। 3.61 लाख गांवों में इंटरनेट पहुंचाने का यह प्रोग्राम है।

भारती एयरटेल, रिलायंस इंफ्राटेल भी हैं दावेदार

सरकार के इस प्रोग्राम में जो प्रमुख कंपनियां दावेदारी ठोंक रही हैं, उसमें भारती एयरटेल, रिलायंस इंफ्राटेल, एसटीएल, सिस्को, लार्सन एंड टुब्रो और ह्यूजेश कम्युनिकेशन प्रमुख हैं। दरअसल, सरकार भारतनेट के जरिए गावों में इंटरनेट देने की योजना पर काम कर रही है। इसके जरिए ब्राडबैंड सेवा गांवों में दी जाएगी। अगले साल अगस्त तक 3.61 लाख गांवों में इस सेवा को पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। ये गांव देश के 16 राज्यों में हैं।

भारतनेट का दूसरा चरण

भारतनेट का यह दूसरा चरण होगा। कोरोना के समय में देश में डिजिटल की बढ़ रही जरूरतों को देखते हुए प्राइवेट कंपनियां इसमें दिलचस्पी दिखा रही हैं। हालांकि सबसे बड़ी दिक्कत इन कंपनियों को फंडिंग गैप की होगी। सरकार ने इस प्रोग्राम को सपोर्ट करने के लिए 19,041 करोड़ रुपए का प्लान बनाया है।

वोडाफोन भी है रेस में

इसमें प्रमुख कंपनियों के अलावा आर्थिक दिक्कतों से जूझ रही वोडाफोन ग्रुप, इंडस टॉवर्स, सरकारी कंपनी रेलटेल, पावर ग्रिड और तेजस नेटवर्क भी हैं। तेजस में टाटा संस की बड़ी हिस्सेदारी है। जानकारों का मानना है कि गांवों के ग्राहक इस समय हाई स्पीड वाले इंटरनेट की जरूरत महसूस कर रहे हैं। उन्हें ऑन लाइन एजुकेशन, हेल्थ सेवाओं और ऑन लाइन शॉपिंग के लिए हाई स्पीड इंटरनेट की जरूरत है।

ब्राडबैंड की पहुंच काफी कम है

गांवों में अभी ब्राडबैंड की पहुंच काफी कम है। यहां पर फिलहाल ज्यादातर मोबाइल नेट के जरिए ही काम होते हैं। इसमें ग्राहकों को काफी कम स्पीड मिलती है। ग्राहक अब 4 जी के बढ़ते दायरे के कारण ब्राडबैंड पर फोकस कर रहे हैं। कंपनियों को लगता है कि ग्राहकों की इन जरूरतों से उनके निवेश पर उन्हें अच्छा खासा फायदा मिल सकता है।

1 लाख ग्राम पंचायत को जोड़ा गया था

भारतनेट के पहले चरण में सरकार ने 1 लाख ग्राम पंचायतों को जोड़ा था। इसके लिए किसी भी प्राइवेट कंपनी की मदद नहीं ली गई थी। ज्यादातर कंपनियां पब्लिक पार्टनरशिप के रूप में इस काम को करना चाहती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वे हर जगह मौजूद नहीं हैं। इसलिए दूसरे के साथ मिलकर इसमें शामिल होना चाहती हैं।

गांवों में कंपनियों का फोकस बढ़ रहा है

गांवों में तेजी से बन रहे कई लेन के हाइवे से कंपनियों का फोकस बढ़ रहा है। क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा रहेगी तो उन्हें काम करने में आसानी होगी। जो भी कंपनी बिडिंग में चुनी जाएगी, उसे 30 सालों के लिए इस प्रोजेक्ट को बिल्ड करना होगा, ऑपरेट और मैनेज करना होगा। भारतनेट को 9 जोन में बांटा गया है। इसमें पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए 1,206 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के लिए 1,078 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट है। असम के लिए सबसे कम 325 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं।

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