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एजीआर विवाद / सुप्रीम कोर्ट की फटकार के 6 घंटे बाद ही सरकार का टेलीकॉम कंपनियों को आदेश, बकाया रकम चुकाएं

Vodafone Idea AGR Issue | Bharti Airtel, Vodafone Idea AGR Dues Supreme Court Today Latest News and Updates
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Vodafone Idea AGR Issue | Bharti Airtel, Vodafone Idea AGR Dues Supreme Court Today Latest News and Updates

  • टेलीकॉम विभाग के एक डेस्क ऑफिसर के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट गुस्से में, कहा- वहां पैसे की ताकत से हमारे आदेश दबाए जा रहे
  • रिकवरी में रोक के आदेश पर कोर्ट ने कहा- कंपनियों पर मेहरबानी की जा रही; सॉलिसिटर जनरल ने माफी मांगी
  • सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद कहा था- टेलीकॉम कंपनियां रात 11.59 बजे तक बकाया रकम चुकाएं
  • एयरटेल ने कहा- 20 फरवरी तक हम 10 हजार करोड़ रुपए चुका देंगे, बाकी की रकम अगली सुनवाई से पहले देंगे

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2020, 05:51 AM IST

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट की फटकार के करीब 6 घंटे बाद ही सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को शुक्रवार रात 11:59 बजे तक बकाया रकम का भुगतान करने के निर्देश दिया। भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया और अन्य कंपनियों को सरकार द्वारा तय मियाद से पहले रकम चुकानी होगी। हालांकि, इस आदेश के बाद एयरटेल ने कहा कि वह 20 फरवरी तक 10 हजार करोड़ तक की रकम चुकाएगी। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को ही टेलीकॉम कंपनियों से रिकवरी स्थगित करने पर दूरसंचार विभाग को फटकार लगाई थी। 1.47 लाख करोड़ रुपए के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद ज्यादातर कंपनियों ने रकम जमा नहीं करवाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन कंपनियों से पूछा था कि क्यों ना आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाए? क्या इस देश में कोई कानून नहीं बचा? इस देश में रहने से बेहतर है कि इसे छोड़कर चले जाना चाहिए।"

सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी की वजह?

दूरसंचार विभाग के राजस्व मामलों से जुड़े एक डेस्क ऑफिसर ने पिछले दिनों संवैधानिक पदों पर बैठे अन्य अफसरों को लिखी चिट्‌ठी में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश तक टेलीकॉम कंपनियों पर कोई कार्रवाई न की जाए, भले ही वे एजीआर मामले में बकाया भुगतान नहीं करें।

एक डेस्क ऑफिसर अकाउंटेंट जनरल को पत्र लिखता है, क्या यह धनबल नहीं: कोर्ट
जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा- "मुझे लगता है कि इस कोर्ट और इस व्यवस्था में काम नहीं करना चाहिए। मैं बहुत दुखी हूं। मैं पूरी जिम्मेदारी के भाव ऐसा कह रहा हूं। एक डेस्क ऑफिसर अकाउंटेंट जनरल (एजी) को पत्र लिख रहा है। वहां इतना ज्यादा धनबल है। क्या यह पैसे की ताकत का नतीजा नहीं है।" सुप्रीम कोर्ट ने डेस्क ऑफिसर के पत्र का हवाला देकर कहा कि यह कंपनियों पर मेहरबानी का तरीका है। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से माफी मांगी। उन्होंने कहा डेस्क ऑफिसर ऐसा नहीं कर सकता। हम इस बारे में स्पष्टीकरण देंगे, कृपया अभी कोई कार्रवाई न करें।

23 जनवरी तक बकाया जमा करने के आदेश थे

सुप्रीम कोर्ट ने 24 अक्टूबर को आदेश दिया था कि टेलीकॉम कंपनियां 23 जनवरी तक बकाया राशि जमा करें। कंपनियों ने फैसले पर फिर से विचार करने की अपील की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और टाटा टेली ने भुगतान के लिए ज्यादा वक्त मांगते हुए नया शेड्यूल तय करने की अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इसे भी खारिज कर दिया।

दूरसंचार विभाग ने आदेश वापस लिया, सुप्रीम कोर्ट ने एक घंटे का वक्त दिया था

सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद दूरसंचार विभाग ने कंपनियों पर कार्रवाई नहीं करने वाला आदेश वापस ले लिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब हम पहले ही टेलीकॉम कंपनियों को भुगतान का आदेश दे चुके हैं, तब कोई डेस्क ऑफिसर ऐसा आदेश कैसे जारी कर सकता है? हमें नहीं पता कि कौन माहौल बिगाड़ रहा है? क्या देश में कोई कानून ही नहीं बचा है? कोई अधिकारी कोर्ट के आदेश के खिलाफ जुर्रत कर सकता है तो सुप्रीम कोर्ट को बंद कर देना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि अगर इस अफसर ने एक घंटे के अंदर आदेश वापस नहीं लिया तो उसे जेल भेजा जा सकता है। कंपनियों ने एक पैसा भी नहीं चुकाया और आप सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रोक चाहते हैं?

एयरटेल ने कहा- एजीआर की गणना लंबी प्रक्रिया, हमें थोड़ा समय चाहिए

दूरसंचार विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी आदेश में कहा गया, “लाइसेंस फीस और स्पैक्ट्रम उपयोग शुल्क के भुगतान को लेकर टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडरों को 14 फरवरी को रात 11.59 बजे तक बकाया रकम चुकाने का निर्देश दिया गया है।” एयरटेल ने कहा कि 10 हजार करोड़ 20 फरवरी तक चुकाने के बाद हम बाकी रकम सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई होने से पहले दे देंगे। एजीआर की गणना लंबी प्रक्रिया है और इसलिए हमें थोड़ा समय चाहिए।

मोबाइल टैरिफ 20% से 25% बढ़ सकते हैं: एक्यूट रेटिंग्स

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी एक्यूट रेटिंग्स एंड रिसर्च लिमिटेड का कहना है कि टेलीकॉम कंपनियां दिसंबर में टैरिफ बढ़ा चुकी हैं। एजीआर मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद उन्हें आने वाले समय में मोबाइल टैरिफ में 20% से 25% इजाफा और करना पड़ सकता है।

टेलीकॉम कंपनियों के एमडी को 17 मार्च को पेशी के आदेश

जिन टेलीकॉम कंपनियों पर एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू के आधार पर स्पेक्ट्रम और लाइसेंस फीस के 1.47 लाख करोड़ रुपए बकाया हैं, उनमें से सिर्फ रिलायंस जियो ने करीब 195 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान किया है। इस पर जस्टिस अरुण मिश्रा की बेंच ने भारती एयरटेल, वोडाफोन, एमटीएनएल, बीएसएनएल, रिलायंस कम्युनिकेशंस, टाटा टेलीकम्युनिकेशंस और अन्य के मैनेजिंग डायरेक्टर्स से 17 मार्च को पेश होने को कहा है।

एजीआर : सरकार और कंपनियों का कैलकुलेशन अलग-अलग था, इसलिए विवाद शुरू हुआ
टेलीकॉम कंपनियों और सरकार के बीच पिछले 14 साल से एजीआर को लेकर विवाद था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले टेलीकॉम ट्रिब्यूनल ने 2015 में टेलीकॉम कंपनियों के पक्ष में फैसला दिया था। ट्रिब्यूनल ने कहा था कि किराए, स्थायी संपत्ति को बेचने पर होने वाले प्रॉफिट, डिविडेंड और ब्याज जैसे नॉन कोर रिसोर्सेस से मिली रकम को छोड़कर बाकी रेवेन्यू एजीआर में शामिल होगा। विदेशी मुद्रा विनिमय (फॉरेक्स) एडजस्टमेंट को भी एजीआर में शामिल किया गया। हालांकि, फंसे हुए कर्ज, विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव और कबाड़ की बिक्री को इससे अलग रखा गया। विवाद इसलिए था क्योंकि सरकार किराए, स्थायी संपत्ति को बेचने पर होने वाले प्रॉफिट और कबाड़ बेचने से मिलने वाली रकम को भी एजीआर में शामिल करती है। 24 अक्टूबर 2019 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की गणना को ही सही माना था। टेलीकॉम कंपनियों को इसी आधार पर ब्याज और पेनल्टी समेत बकाया फीस चुकाने का आदेश दिया था। कंपनियों को एजीआर का 3% स्पेक्ट्रम फीस और 8% लाइसेंस फीस के तौर पर सरकार को देना होता है।

1.47 लाख करोड़ में से किस कंपनी पर कितना बकाया

कंपनी बकाया (रुपए)
वोडाफोन-आइडिया 53,038 करोड़
भारती एयरटेल 35,586 करोड़
टाटा टेली 13,823 करोड़
रिलायंस जियो, रिलायंस कम्युनिकेशंस, बीएसएनएल, एमटीएनएल और अन्य पर बकाया 45,000 करोड़ 
सभी कंपनियों पर ब्याज और पेनल्टी समेत कुल बकाया 1,47000 करोड़
रिलायंस जियो ने चुकाए -195 करोड़
अब बाकी कंपनियों पर बकाया 1,46,805 करोड़

एयरटेल को छोड़ बाकी टेलीकॉम कंपनियों के शेयरों में 23% तक गिरावट

कंपनी शेयर में गिरावट
वोडाफोन-आइडिया 23.21%
भारती इन्फ्राटेल 4.04%
रिलायंस कम्युनिकेशंस 4.11%
टाटा टेली 9.89%

(एयरटेल का शेयर 4.69% फायदे में रहा)

टेलीकॉम सेक्टर पर इस वक्त सबसे ज्यादा खतरा: एनालिस्ट
कंसल्टिंग फर्म कॉम फर्स्ट इंडिया के डायरेक्टर महेश उप्पल का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से टेलीकॉम इंडस्ट्री की स्थिति खराब होगी। वोडाफोन-आइडिया की मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ेंगी। विश्लेषकों का कहना है कि टेलीकॉम सेक्टर में दो कंपनियों का दबदबा होने का जोखिम इस वक्त सबसे ज्यादा है। अभी भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया और रिलायंस जियो बाजार में हैं। एजीआर मामले में वोडाफोन-आइडिया पर 53,000 करोड़ की देनदारी है। कंपनी पहले ही चेतावनी दे चुकी है कि राहत नहीं मिली तो कारोबार बंद करना पड़ सकता है। दिसंबर तिमाही में वोडाफोन-आइडिया को को 6,439 करोड़ का घाटा हुआ है।

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