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खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता आएगी:कैबिनेट ने पाम ऑयल मिशन को दी मंजूरी, उत्पादन बढ़ाने पर खर्च होंगे 11,040 करोड़

नई दिल्लीएक वर्ष पहले
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कोविड के बीच खाद्य तेलों के दाम में महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों को तुरंत तो नहीं, लंबे समय में राहत मिलने की उम्मीद जरूर है। सरकार ने देश में खाद्य तेलों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 11,040 करोड़ रुपए के पाम ऑयल मिशन को मंजूरी दी है। इसमें से 8,844 करोड़ रुपए केंद्र देगा जबकि 2,196 करोड़ रुपए का योगदान राज्य सरकारों को करना होगा।

सरकार का कहना है कि नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स- ऑयल पाम (NMEO-OP) से पाम ऑयल के आयात पर निर्भरता घटेगी, किसानों की आमदनी बढ़ेगी और ऑयल इंडस्ट्री को भी फायदा होगा। दरअसल, उसने पाम ऑयल से जुड़ी इंडस्ट्री को उत्पादन बढ़ाने के लिए 5 करोड़ रुपए की सहायता देने का एलान भी किया है।

इस बारे में केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि सरकार ने पाम मिशन का जो कदम उठाया है, उसके दूरगामी परिणाम होंगे। इससे तुरंत तो खाने के तेल की कीमतों में कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है, लेकिन इससे एडिबल ऑयल के इंटरनेशनल मार्केट में सेंटीमेंट पर असर जरूर होगा।

आयात पर निर्भरता घटेगी

नेशनल एडिबल ऑयल मिशन के तहत सरकार पाम ऑयल उत्पादन बढ़ाने पर फोकस कर रही है। देश में तिलहन की उपज काफी कम है, जिसको बढ़ाने की योजना बनाई गई है। इसके तहत किसानों की आमदनी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। कैबिनेट मीटिंग में पाम ऑयल मिशन पर लिए गए फैसलों की जानकारी यूनियन मिनिस्टर अनुराग ठाकुर और यूनियन मिनिस्टर नरेंद्र सिंह तोमर ने दी है।

यूनियन मिनिस्टर नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, 'पाम ऑयल के उत्पादन को बढ़ावा देने के सरकार के फैसले से बहुत फायदे होंगे। इससे पूंजी निवेश बढ़ेगा, ज्यादा रोजगार पैदा करने में मदद मिलेगी, पाम ऑयात के आयात पर निर्भरता घटेगी और किसानों की आमदनी बढ़ेगी।' सरकार ने पाम ऑयल के किसानों को कीमत के मोर्चे पर सिक्योर बनाने की भी कोशिश की है।

किसानों को अभी फ्रेश फ्रूट बंचेज (FFB) के हिसाब से कीमत मिलती है। यह कीमत क्रूड पाम ऑयल के इंटरनेशनल प्राइस के हिसाब से तय होती है। सरकार ने कहा है कि इस प्राइस में उतार-चढ़ाव के चलते ऑयल पाम के किसानों को नुकसान होने नहीं दिया जाएगा। उनको जो घाटा होगा, उसकी भरपाई सरकार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए करेगी।

क्या है पाम ऑयल मिशन?

सरकार ने जो 11,040 करोड़ रुपए का पाम ऑयल मिशन अपनाया है, उसके तहत ज्यादा से ज्यादा क्षेत्रफल में ताड़ के पेड़ लगाए जाएंगे। इसके साथ ही ताड़ के बीज और पाम ऑयल के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। इस मिशन में खासतौर पर नॉर्थ ईस्ट क्षेत्र और अंडमान निकोबार पर फोकस किया है।

केडिया के मुताबिक, नॉर्थ-ईस्ट रीजन और अंडमान निकोबार में फोकस इसलिए किया गया है, क्योंकि वहां की आबोहवा इंडोनेशिया और मलेशिया जैसी है जो ऑयल पाम के लिए एकदम सही है। सरकार ने आयल पाम के किसानों को प्राइस एश्योरेंस के लिए एमएसपी जैसी व्यवस्था की है, जो पॉजिटिव कदम है।

मिशन के तहत वित्त वर्ष 2025-26 तक और 6.5 लाख हेक्टयर एरिया में ताड़ के पेड़ लगाए जाएंगे। इससे पाम ऑयल के लिए जितने एरिया में ताड़ के पेड़ होंगे, उनका क्षेत्रफल लगभग 10 लाख हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा। इस समय सिर्फ 3.70 लाख हेक्टेयर में ही ऑयल पाम की खेती हो रही है।

प्रति हेक्टेयर 4 टन तेल

ऑयल पाम से दूसरे तिलहन के मुकाबले प्रति हेक्टेयर 10 से 46 गुना ज्यादा तेल मिलता है। सरकार का कहना है कि प्रति हेक्टेयर ऑयल पाम से लगभग 4 टन तेल मिल सकता है। उसने मिशन के तहत ताड़ के पेड़ों के लिए क्षेत्रफल बढ़ाने से 2025-26 तक देश में क्रूड पाम ऑयल का उत्पादन बढ़कर 11.20 लाख टन हो जाने का अनुमान दिया है। उसका मानना है कि 2029-30 तक यह 28 लाख टन तक पहुंच सकता है।

क्या है पाम ऑयल?

केडिया के मुताबिक मुताबिक, खाद्य तेलों में पाम ऑयल बेस ऑयल की तरह काम करता है। रोजमर्रा के इस्तेमाल की लगभग 80% चीजों में इसका इस्तेमाल होता है। इसलिए प्रॉडक्शन और एरिया पर फोकस बढ़ाना सरकार के लिए सही रणनीति रहेगी।

पाम ऑयल एक तरह का खाने का तेल है जो ताड़ के पेड़ के बीजों से निकाला जाता है। होटल, रेस्तरां में पाम ऑयल का इस्तेमाल खाद्य तेल की तरह होता है। नहाने वाले साबुन बनाने में भी पाम ऑयल का काफी इस्तेमाल होता है। इससे मुंह में पिघल जाने वाली क्रीम और टॉफी-चॉकलेट भी बनाए जाते हैं।

फिलहाल दुनियाभर में लगभग 8 करोड़ टन पाम ऑयल का उत्पादन हो रहा है। देश में खाने के तेलों के टोटल इंपोर्ट में पाम ऑयल का हिस्सा 40% है। घरेलू खपत के लिए पाम अधिकांश पाम ऑयल इंडोनेशिया और मलेशिया से आता है। जुलाई में पाम तेल का इंपोर्ट 43% घटकर 4,65,606 टन रह गया जो पांच महीने का निचला स्तर था।

आठ महीनों में बढ़ा आयात

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA) के मुताबिक, नवंबर 2020 से जुलाई 2021 तक 56,15,029 टन पाम ऑयल का इंपोर्ट हुआ है, जो सालभर पहले के 50,62,602 टन से 11% ज्यादा है। आठ महीने में पाम ऑयल का आयात बढ़ने की वजह इस पर सॉफ्ट ऑयल से कम ड्यूटी होना है। सॉफ्ट ऑयल में सोयाबीन का आयात आर्जेंटीना जबकि सनफ्लावर का आयात उक्रेन और रूस से होता है।

SEA के मुताबिक, सरकार ने क्रूड पाम ऑयल के आयात पर लगने वाली ड्यूटी को जुलाई से सितंबर तक के लिए 35.75% (प्रभावी तौर पर) से 30.25% कर दिया है। इसके अलावा 31 दिसंबर तक के लिए पाम ऑयल के मुक्त आयात की इजाजत दी गई है, जो घरेलू रिफाइनरों और तिलहन उत्पादकों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।