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ब्लैकमनी पर लगाम की तैयारी:मॉरीशस से आने वाले पैसे के मालिक का खुलासा जरूरी होगा, बजट से पहले आ सकता है नियम

मुंबई17 दिन पहलेलेखक: अजीत सिंह
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  • भारत में आने वाले एफडीआई में मॉरीशस दूसरे नंबर पर है। 2019-20 में सिंगापुर से 14.67 अरब डॉलर और मॉरीशस से 8.24 अरब डॉलर का एफडीआई आया
  • मॉरीशस की जीडीपी दुनिया में 123 वें नंबर पर है। 2019 में यह 1,439 करोड़ डॉलर थी। ऐसे में एफडीआई में इसके निवेश पर सवाल उठता रहता है

भारत अब मॉरीशस से आने वाली ब्लैकमनी पर लगाम लगाने की तैयारी में है। सरकार वहां से आने वाले पैसों की पूरी जानकारी देना जरूरी कर सकती है। अब पैसों का मालिक कौन है, उसका नाम, पता, पासपोर्ट नंबर आदि बताने होंगे। इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स मामलों की सबसे बड़ी बॉडी सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) जल्द ही इसका सर्कुलर जारी कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक यह सर्कुलर बजट से पहले ही जारी हो सकता है।

पैसे के असली मालिक की जानकारी देनी होगी
नए नियम के मुताबिक, पैसे का बेनिफिशियरी ओनरशिप किसके पास है, यह भी बताना होगा। बेनिफिशियरी ओनरशिप का मतलब है जिसके पास कंपनी या फंड की कम से कम 25% हिस्सेदारी है। हाल में अमेरिका ने शेल यानी मुखौटा कंपनियों पर लगाम लगाने के लिए भ्रष्टाचार विरोधी कानून बनाया है। उसमें भी कंपनियों के लिए बेनिफिशियरी ओनरशिप की जानकारी देना जरूरी किया गया है। इसी के बाद भारत ने यह फैसला लिया है।

अभी तक मॉरीशस के निवेश पर केवल 3 जानकारी देनी होती थी
अभी तक अगर आप मॉरीशस के जरिए भारत में निवेश करते हैं तो आपको केवल कंपनी के डायरेक्टर, कंपनी का पता और कंपनी कब बनी है, यह जानकारी देनी होती थी। लेकिन, इस जानकारी से यह पता नहीं लगता था कि पैसों का असली मालिक कौन है। क्योंकि डायरेक्टर कंपनी का मालिक हो भी सकता है या नहीं भी हो सकता है। इसलिए 25% ओनरशिप से पैसे का सोर्स पता चलेगा।

भारत में दरअसल आप किसी बैंक से कहीं भी पैसे भेजते हैं तो ओरिजिनल रूट का पता चलता है। पैसा कहां से आता है, कहां जाता है सब पता चलता है। लेकिन मॉरीशस में यह सिस्टम नहीं है।

चंदा कोचर के पति की कंपनी में भी मॉरीशस से पैसा आया था
ICICI बैंक की पूर्व MD चंदा कोचर के पति दीपक कोचर का नाम मॉरीशस के एक फंड के मामले में शामिल हैं। जिस न्यूपावर रिन्यूएबल्स को कर्ज देने के मामले में चंदा कोचर की कुर्सी गई, वह दीपक कोचर की थी। इस कंपनी में मॉरीशस से 5 बार में 320 करोड़ रुपए का निवेश आया। यह पैसा मॉरीशस की कंपनी फर्स्ट लैंड होल्डिंग और डीएच रिन्यूएबल के जरिए आया था। रिजर्व बैंक ने 2016 में यह जानकारी दी थी, लेकिन वह इस फंड के सोर्स को नहीं पकड़ सका था।

IL&FS का मामला भी मुखौटा कंपनी से जुड़ा
IL&FS मामले में पिछले हफ्ते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 452 करोड़ रुपए के शेयर जब्त किए हैं। ये शेयर एस कोल कंपनी सिंगापुर के हैं। यह एक मुखौटा कंपनी है जिसके मालिक ब्रिटिश नागरिक जयमिन व्यास हैं। ED ने मनीलॉन्ड्रिंग कानून के तहत यह कार्रवाई की है।

सरकार ने फरवरी 2017 में टास्कफोर्स बनाई थी
भारत में फरवरी 2017 में मुखौटा कंपनियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से टास्कफोर्स बनाई गई थी। अमेरिका के सिक्योरिटीज एक्ट में तो मुखौटा कंपनियों को बिजनेस के साइज और असेट के हिसाब से परिभाषित किया गया है, लेकिन भारत में ऐसा नहीं है।

मुखौटा कंपनी का कारोबार सिर्फ कागजों पर होता है
मुखौटा कंपनियां असल में कोई कारोबार नहीं करतीं। बस पैसा एक कंपनी से दूसरी कंपनी के खाते में ट्रांसफर होता है। सेबी ने 2017 अगस्त में स्टॉक एक्सचेंजों को 331 संदिग्ध मुखौटा कंपनियों पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। उसी साल सितंबर में कंपनी मामलों के मंत्रालय ने 2 लाख 9 हजार 32 कंपनियों के रजिस्ट्रेशन रद्द किए थे।

फर्जी बिलों पर ब्लैकमनी बाहर भेजते हैं, FDI के रूप में वही वापस आता है
भारत में मॉरीशस से आने वाला पैसा टैक्स फ्री होता है, क्योंकि भारत और मॉरीशस के बीच टैक्स ट्रीटी (समझौता) है। अब इसी पर भारत वार करना चाहता है। भारत के व्यापारी फर्जी इंपोर्ट-एक्सपोर्ट के नाम पर पैसा बाहर भेजते हैं, फिर मॉरीशस के जरिए एफडीआई के रूप में देश में वापस लाते हैं। इसे राउंड ट्रिपिंग कहते हैं।

मॉरीशस की जीडीपी 123वें नंबर पर, फिर भी FDI में आगे
भारत में आने वाले एफडीआई में मॉरीशस दूसरे नंबर पर है। 2019-20 में सिंगापुर से 14.67 अरब डॉलर और मॉरीशस से 8.24 अरब डॉलर का एफडीआई आया। वह भी तब जब उसकी जीडीपी दुनिया में 123 वें नंबर पर है। मॉरीशस की जीडीपी 2019 में 1,439 करोड़ डॉलर थी। जानकार कहते हैं कि मॉरीशस में इतना पैसा ही नहीं होता है। वह खुद दक्षिण अफ्रीका पर निर्भर है। ऐसे में वह भारत में कैसे इन्वेस्ट कर सकता है?

ब्लैकमनी पर लगाम के लिए ही हुई थी नोटबंदी
नवंबर 2016 में मोदी सरकार ने 500 और 1000 रुपए के नोट बंद कर दिए थे। इसका मकसद यही बताया गया था कि ब्लैकमनी के रूप में चल रहे ये नोट सिस्टम से बाहर हो जाएंगे। हालांकि ब्लैकमनी उसके बाद फिर सिस्टम में आ गई है।

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