टेक्नोलॉजी पेशेवरों की बढ़ेगी दिक्कत:अमेरिका में H-1B स्पेशियल्टी प्रोफेशन के लिए बिजनेस वीजा मिलना हो सकता है बंद, विदेश मंत्रालय ने रखा प्रस्ताव

नई दिल्लीएक वर्ष पहले
अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने से यह धारणा पूरी तरह से खत्म हो जाएगी कि 'B-1 इन लियू ऑफ H पॉलिसी' विदेशी प्रोफेशनल्स को स्किल्ड वर्क करने के लिए अमेरिका में प्रवेश करने का वैकल्पिक तरीका प्रदान करती है
  • इस वीजा के जरिये भारतीय कंपनियां अपने प्रोफेशनल्स को अमेरिका में साइट पर स्किल्ड वर्क करने के लिए भेजती हैं
  • विदेशी कंपनियां H नॉन-इम्मिग्रेंट क्लासिफिकेशन से जुड़ी शर्तों और पाबंदियों से बचने के लिए B-1 वीजा का इस्तेमाल करती हैं

अमेरिका में H-1B स्पेशियल्टी नौकरियों के लिए अस्थायी बिजनेस वीजा मिलना बंद हो सकता है। इससे हजारों भारतीय पेशेवर प्रभावित हो सकते हैं। इस वीजा के जरिये दूसरे देश की कंपनियां अपने टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स को अमेरिका में कुछ समय के लिए साइट पर स्किल्ड वर्क करने के लिए भेजती हैं।

अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने इस वीजा को नहीं जारी करने का प्रस्ताव रखा है। मंत्रालय ने कहा कि प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने से यह धारणा पूरी तरह से खत्म हो जाएगी कि 'B-1 इन लियू ऑफ H पॉलिसी' (H के बदले B-1 पॉलिसी) विदेशी प्रोफेशनल्स को स्किल्ड वर्क करने के लिए अमेरिका में प्रवेश करने का वैकल्पिक तरीका प्रदान करती है। विदेशी कंपनियां H नॉन-इम्मिग्रेंट क्लासिफिकेशन से जुड़ी शर्तों और पाबंदियों से बचने के लिए B-1 वीजा का इस्तेमाल करती हैं।

अमेरिकी कामगारों पर विदेशी कामगारों का घटेगा असर

मंत्रालय ने कहा कि प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से अमेरिकी कामगारों पर विदेशी कामगारों के कारण पड़ने वाले प्रभाव में कमी आएगी। बुधवार को जारी नोटिफिकेशन में विदेश मंत्रालय ने कहा कि देश में बढ़ते लेबर कॉस्ट से प्रोटेक्शन चाहने वाली अमेरिकी आर्किटेक्चर कंपनियों को समझना होगा कि इस प्रोटेक्शन से अमेरिकी आर्किटेक्ट्स रोजगार से बाहर हो जाएंगे और वही सेवा विदेशी आर्किटेक्चर कंपनियां देने लगेंगी।

H-1B वीजा वाले कामगार को अमेरिकी प्रोफेशनल्स के समान वेतन मिलता है

यदि विदेशी कंपनी अपने आर्किटेक्ट्स के लिए H-1B वीजा लेती हैं, तो उस कंपनी को अपने आर्किटेक्ट को उतना ही वेतन देना होगा, जो अमेरिकी आर्किटेक्ट्स को मिलता है। इसके साथ ही अमेरिकी कामगारों की सुरक्षा के लिए कांग्रेस द्वारा तय की गई अन्य शर्तें भी पूरी करनी होगी।

B-1 वीजा वाले कामगार को अमेरिकी कामगार से कम वेतन मिलता है

मंत्रालय ने कहा कि दूसरी ओर B-1 इन लियू ऑफ H पॉलिसी के तहत उसी आर्किटेक्ट को B-1 वीजा लेना होगा और वह टेंपररी आर्किटेक्चर जॉब के लिए अमेरिका जा सकेगा। वह तभी तक अमेरिका में रह सकेगा, जब तक विदेश में उसका आवास बरकरार रहेगा और उसे वेतन मिलता रहेगा। इस वीजा वाले आर्किटेक्ट को कंपनी आमतौर पर उतना वेतन नहीं देती, जितना एक अमेरिकी आर्किटेक्ट को मिलता है।

B-1 वीजा का फीस H-1B वीजा के मुकाबले काफी कम होता है

विदेश मंत्रालय ने कहा कि बी-1 वीजा की आवेदन प्रक्रिया में अमेरिकी कामगारों के प्रोटेक्शन के लिए उसी तरीके से जांच नहीं की जाती, जिस तरीके की जांच H-1B वीजा की आवेदन प्रक्रिया में की जाती है। साथ ही B-1 वीजा का फीस H-1B वीजा के मुकाबले काफी कम होता है। नोटिफिकेशन के मुताबिक मंत्रालय के इस प्रस्ताव का असर हर साल 6,000 से 8,000 विदेशी वर्कर्स पर पड़ेगा। B-1 इन लियू ऑफ H पॉलिसी के तहत अमेरिका हर साल करीब 8,000 B-1 वीजा जारी करता है।

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